बचाव

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समुद्री कछुए का खोल शिकारियों से सुरक्षा प्रदान करता है।

बाहरी बलों के कारण होने वाली क्षति के खिलाफ किसी चीज की सुरक्षा के लिये कोई उपाय बचाव या हिफाजत कहलाता है। जीवों, प्रणालियों, नागरिक और राजनीतिक अधिकारों जैसी अमूर्त चीज़ों सहित भौतिक वस्तुओं को हिफाजत प्रदान की जा सकती है। कुछ प्रकार की सुरक्षा सभी जीवों की विशेषता है, क्योंकि जीवों ने कम से कम पराबैंगनी विकिरण जैसे हानिकारक पर्यावरणीय घटनाओं का सामना करने के लिए सुरक्षात्मक तंत्र विकसित किये हुए हैं। पेड़ पर छाल और जानवरों पर त्वचा जैसी जैविक झिल्ली विभिन्न खतरों से सुरक्षा प्रदान करती है। वह त्वचा रोगजनकों और अत्यधिक पानी के नुकसान के खिलाफ जीवों की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। शल्क और बाल जैसे अतिरिक्त ढांचे तत्वों और शिकारियों के सामने सुरक्षा प्रदान करते हैं। मनुष्यों ने मूल रूप से तत्वों से बचाव के लिए प्रागैतिहासिक काल में कपड़ों और आश्रयों का निर्माण शुरू किया। मनुष्यों और जानवरों दोनों को अक्सर दूसरों की सुरक्षा की चिंता रहती है। वयस्क जानवर विशेष रूप से अपने बच्चों को प्रकृति के तत्वों और शिकारियों से बचाने के इच्छुक होते हैं।

मानव क्षेत्र में, बचाव की अवधारणा को गैर-जीवित वस्तुओं तक बढ़ा दिया गया है, जिसमें कंप्यूटर जैसे तकनीकी सिस्टम और बौद्धिक संपदा, परम्परा और आर्थिक प्रणालियों जैसी अमूर्त चीजें शामिल हैं। मनुष्य ऐतिहासिक बचाव प्रयासों के माध्यम से ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व के स्थानों की रक्षा करना चाहते हैं, और मानव गतिविधि के कारण होने वाले नुकसान से पर्यावरण की रक्षा करने और अंतरिक्ष से संभावित हानिकारक वस्तुओं से पृथ्वी के बचाव के लिये भी चिंतित हैं।

शारीरिक बचाव[संपादित करें]

वस्तुओं का बचाव[संपादित करें]

पारिस्थितिकीय प्रणालियों का बचाव[संपादित करें]

सामाजिक प्रणालियों का बचाव[संपादित करें]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]