अस्पष्ट तर्क

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अस्पष्ट तर्क (Fuzzy logic/फजी लॉजिक) एक प्रकार का बहु-मान तर्क (many-valued logic) है जिसमें चरों के सत्यमान (truth values) ० और १ के बीच में कुछ भी हो सकते हैं (न कि केवल ० या १)। इसका उपयोग 'आंशिक सत्य' की अवधारणा के अनुरूप है क्योंकि प्रायः हम जीवन में पाते हैं कि कोई तर्क न पूर्णतः 'सत्य' होता है न पूर्णतः 'असत्य'। इसके विपरीत बूलीय तर्क में चरों के मान या तो ० होते हैं या १। डिजिटल परिपथ बूलीय तर्क पर ही काम करते हैं।

'फजी लॉजिक' शब्दसमूह का उपयोग सबसे पहले १९६५ में लोट्फी जादेह (Lotfi Zadeh) ने अस्पष्ट समुच्चय-सिद्धान्त (फजी सेट थियरी) के प्रतिपादन के साथ किया था। [1][2] किन्तु अस्पष्ट तर्क का अध्ययन १९२० के दशक के समय से ही चल रहा था जिसको अनन्त-मान तर्क कहते थे।

अस्पष्ट तर्क का उपयोग बहुत से क्षेत्रों में कुशलतापूर्वक किया जाता है जिसमें कुछ प्रमुख क्षेत्र हैं- नियंत्रण सिद्धान्त, कृत्रिम बुद्धि आदि।

सत्य की कोटि (ट्रुथ की डिग्रियां)[संपादित करें]

ट्रुथ और प्रोबैबिलिटिज़ (संभावनाओं) की दोनों डिग्रियों का रेंज 0 और 1 के बीच होता है और इसलिए शुरू-शुरू में ये एक जैसे लग सकते हैं। हालांकि, वैचारिक रूप से वे अलग होते हैं; ट्रुथ, अस्पष्ट रूप से परिभाषित सेट में मेम्बरशिप का प्रतिनिधित्व करता है जो प्रोबैबिलिटी (अधिसम्भाव्यता) थ्यौरी (संभाव्यता का सिद्धांत) की तरह किसी इवेंट (घटना) या कंडीशन (स्थिति) के लाइकलिहुड (अनुरूप) नहीं होता है। उदाहरण के लिए, 100 ml का एक गिलास लेते हैं जिसमें 30 ml जल है। तब हम दो अवधारणाओं पर विचार कर सकते हैं: एम्प्टी (खाली) और फुल (भरा हुआ)। इनमें से प्रत्येक के अर्थ को एक निश्चित फ़ज़ी सेट के द्वारा प्रदर्शित किया जा सकता है। उसके बाद ही कोई इस गिलास को 0.7 खाली और 0.3 भरे हुए गिलास के रूप में परिभाषित कर सकता है। ध्यान दें कि खालीपन की अवधारणा, सब्जेक्टिव (व्यक्तिपरक) होगी और इस प्रकार यह पर्यवेक्षक या डिज़ाइनर पर निर्भर करेगी। दूसरा डिज़ाइनर भी बराबर-बराबर अच्छी तरह से एक सेट मेम्बरशिप कार्य का डिजाइन करेगा जहां गिलास को 50 ml से कम के सभी वैल्यूज़ के लिए भरा हुआ माना जाएगा. यह समझना बहुत जरूरी है कि फ़ज़ी लॉजिक, ट्रुथ डिग्रियों को वेगनेस फेनोमेनन (अस्पष्टता की घटना) के एक गणितीय मॉडल के रूप में प्रयोग करता है जबकि प्रोबैबिलिटी (अधिसम्भाव्यता), रैंडमनेस का एक गणितीय मॉडल है।

एक प्रोबैबिलिस्टिक सेटिंग सबसे पहले गिलास के पूरा भरा होने के लिए एक स्केलर वेरिएबल (अदिश परिवर्तनीय) को परिभाषित करेगा और फिर प्रोबैबिलिटी (अधिसम्भाव्यता) का वर्णन करते हुए कंडीशनल डिस्ट्रीब्यूशंस को परिभाषित करेगा जिसे कोई व्यक्ति एक विशिष्ट पूर्णता के स्तर को दर्शाकर गिलास को भरा हुआ कहेगा. हालांकि, कुछ घटना के घटित होने की स्वीकृति के बिना इस मॉडल का कोई अर्थ नहीं है, उदाहरण के लिए, कुछ मिनट के बाद, गिलास आधा खाली हो जाएगा. ध्यान दें कि कंडीशनिंग को एक स्पेसिफिक ऑब्ज़र्वर (विशिष्ट पर्यवेक्षक) को रखकर प्राप्त किया जा सकता है जो गिलास के लिए स्तर और नियतात्मक पर्यवेक्षकों के एक वितरण (डिस्ट्रीब्यूशन) या दोनों का अनियमित रूप से चयन करता है। परिणामस्वरूप, प्रोबैबिलिटी (अधिसम्भाव्यता) (अधिसम्भाव्यता) में साधारणतः फ़ज़ीनेस के सिवा कुछ नहीं है, ये तो मात्र अलग-अलग अवधारणाएं हैं जो बाहर से एक जैसी लगती हैं क्योंकि इनमें वास्तविक संख्याओं [0, 1] के एक जैसे अन्तराल का प्रयोग होता है। डे मॉर्गन (De Morgan) के प्रमेय में दोहरी प्रयोज्यता और अनियमित वेरिएबल्स के गुण हैं। फिर भी, चूंकि ऐसे प्रमेय बाइनरी लॉजिक स्टेट्स के गुणों के अनुरूप होते हैं, इसलिए व्यक्ति यह देख सकता है कि कहां पर भ्रम पैदा हो सकता है।

ट्रुथ वैल्यूज़ का अनुप्रयोग[संपादित करें]

एक बेसिक अनुप्रयोग, एक सतत परिवर्तनीय के उप-श्रेणियों को परिलक्ष्यित कर सकता है। उदाहरण के लिए, एंटी-लॉक ब्रेक के तापमान के मापन में विशेष तापमान की श्रेणियों को परिभाषित करने वाले कई अलग मेम्बरशिप (सदस्यता) वाले फंक्शंस का समावेश हो सकता है जो ब्रेक्स को अच्छी तरह से नियंत्रित करने के लिए आवश्यक होते हैं। प्रत्येक फंक्शन, एक ट्रुथ वैल्यू के उसी तापमान वैल्यू को चित्रित करता है जिसका रेंज 0 से 1 के बीच होता है। इन ट्रुथ वैल्यूज़ को तब ब्रेक्स को नियंत्रित करने के तरीक़ों को निर्धारित करने के लिए प्रयोग में लाया जा सकता है।

फ़ज़ी लॉजिक तापमान

इस इमेज में, कोल्ड (शीतल), वार्म (उष्ण) और हॉट (गर्म) अभिव्यक्तियों के अर्थ को एक तापमान स्केल के फंक्शंस मैपिंग के ज़रिये दर्शाया गया है। उस स्केल पर के एक बिंदु में तीन "ट्रुथ वैल्यूज़" हैं — तीन फंक्शंस में से प्रत्येक के लिए एक-एक वैल्यू. इमेज की खड़ी रेखा एक विशेष तापमान को तीन तीर (ट्रुथ वैल्यूज़) गेज़ के माध्यम से दर्शाती है। चूंकि लाल तीर शून्य को सूचित करता है इसलिए इस तापमान को "नॉट हॉट" (गर्म नहीं) माना जा सकता है। नारंगी रंग का तीर (0.2 पर इशारा करते हुए) इसे "स्लाइट्ली वार्म" (हल्का उष्ण) और नीला तीर (0.8 पर इशारा करते हुए) इसे "फेयरली कोल्ड" (काफी शीतल) के रूप में वर्णित कर सकता है।

भाषाई वेरिएबल्स (भाषाई अस्थिरता) (भाषाई अस्थिरता)[संपादित करें]

जबकि गणित में वेरिएबल्स साधारणतः संख्यात्मक वैल्यूज़ को ग्रहण करते हैं लेकिन फ़ज़ी लॉजिक के अनुप्रयोगों में, गैर-संख्यात्मक भाषाई वेरिएबल्स (भाषाई अस्थिरता) का प्रायः नियमों और तथ्यों की अभिव्यक्ति की सुविधा प्रदान करने के लिए प्रयोग किया जाता है।[3]

एक भाषाई वेरिएबल जैसे कि एज (उम्र), में यंग या युवा अथवा इसके विपरीत ओल्ड या वृद्ध जैसा एक वैल्यू शामिल हो सकता है। हालांकि, भाषाई वेरिएबल्स (भाषाई अस्थिरता) की सबसे बड़ी प्रयोज्यता यही है कि प्राथमिक शर्तों पर लागू भाषाई हेजेज के माध्यम से इसे संशोधित किया जा सकता है। भाषाई हेजेज कुछ कार्यों के साथ संबद्ध हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, L. A. ज़ादेह ने मेम्बरशिप कार्य के वर्ग को लेने का सुझाव दिया। हालांकि, यह मॉडल अच्छी तरह से काम नहीं करता है। अधिक जानकारी के लिए सन्दर्भ देखें.

उदाहरण[संपादित करें]

फ़ज़ी सेट थ्यौरी, फ़ज़ी सेट्स पर फ़ज़ी प्रचालकों को परिभाषित करता है। इसके अनुप्रयोग में यही समस्या है कि उपयुक्त फ़ज़ी प्रचालक ज्ञात नहीं हो सकता है। इसी कारणवश, फ़ज़ी लॉजिक आम तौर पर IF-THEN (यदि-तो) नियमों का प्रयोग करता है या उसकी संरचना करता है, जैसे - फ़ज़ी एसोसिएटिव मेट्रिसेस.

नियमों को आम तौर पर निम्न रूप से व्यक्त किया जाता है:
IF वेरिएबल IS प्रोपर्टी THEN एक्शन

उदाहरण के लिए, एक साधारण तापमान नियामक जो एक पंखे का प्रयोग करता है, उसे इस प्रकार देख सकते हैं:

यदि (IF) तापमान बहुत शीतल है (IS) तो (THEN) पंखे को रोक दें
यदि (IF) तापमान शीतल है (IS) तो (THEN) पंखे को धीमा कर दें
यदि (IF) तापमान (IS) सामान्य है तो (THEN) इस स्तर को बनाए रखें
यदि (IF) तापमान गर्म है (IS) तो (THEN) पंखे की गति बढ़ा दें

इसमें कोई "ELSE" (अन्यथा) नहीं है - सभी नियमों का मूल्यांकन किया जाता है क्योंकि तापमान एक ही समय पर अलग-अलग डिग्रियों में "कोल्ड" (शीतल) और "नोर्मल" (सामान्य) हो सकते हैं।

बूलीयन लॉजिक के AND (और), OR (या) तथा NOT (नहीं) प्रचालक, फ़ज़ी लॉजिक में मौजूद होते हैं जिन्हें आम तौर पर मिनिमम (न्यूनतम), मैक्सिमम (उच्चतम) और कंप्लीमेंट (पूरक) के रूप में परिभाषित किया जाता है; जब उन्हें इस तरह से परिभाषित किया जाता है तब उन्हें ज़ादेह प्रचालक कहा जाता है। इसलिए फ़ज़ी वेरिएबल्स x और y के लिए:

NOT x = (1 - truth(x))
x AND y = minimum(truth(x), truth(y))
x OR y = maximum(truth(x), truth(y))

अन्य प्रचालक भी हैं जो स्वभावतः भाषाई होते हैं उन्हें हेजेज़ कहते हैं और उनका भी अनुप्रयोग किया जा सकता है। ये आम तौर पर एड्वर्ब्स (क्रिया-विशेषण) होते हैं, जैसे - "वेरी" (बहुत) या "समव्हाट" (कुछ-कुछ), जो एक गणितीय सूत्र का प्रयोग करके सेट के अर्थ को संशोधित कर देते हैं।

अनुप्रयोग में, प्रोग्रामिंग लैंग्वेज प्रोलोग (Prolog) को इसके फैसिलिटिज़ के साथ फ़ज़ी लॉजिक[तथ्य वांछित] को कार्यान्वित करने के लिए अच्छी तरह से गिअर किया जाता है ताकि "नियमों" के एक डेटाबेस को स्थापित किया जा सके जो लॉजिक को घटाने के लिए पूछे जाते हैं। इस तरह की प्रोग्रामिंग को लॉजिक प्रोग्रामिंग के रूप में जाना जाता है।

जब एक बार फ़ज़ी रिलेशंस को परिभाषित कर दिया जाता है, तब फ़ज़ी रिलेशनल डेटाबेस को विकसित करना संभव हो जाता है। प्रथम फ़ज़ी रिलेशनल डेटाबेस, FRDB को मारिया ज़ेमांकोवा के शोध प्रबंध में देखा गया। बाद में, बकल्स-पेट्री मॉडल (Buckles-Petry model), प्रेड-टेस्टेमेल मॉडल (Prade-Testemale Model), उमानो-फुकामी मॉडल (Umano-Fukami model) या जे. एम. मेडिना (J.M. Medina), एम. ए. विला et al. द्वारा GEFRED मॉडल जैसे कुछ अन्य मॉडलों का उद्भव हुआ। फ़ज़ी डेटाबेस के सन्दर्भ में, कुछ फ़ज़ी क्वेरिंग लैंग्वेजों को परिभाषित किया गया है और पी. बोस्क (P. Bosc) et al. द्वारा SQLf पर और जे. गैलिंडो (J. Galindo) et al. द्वारा FSQL पर प्रकाश डाला गया है। ये लैंग्वेज, SQL स्टेटमेंट्स में फ़ज़ी ऐस्पेक्ट्स को शामिल करने के उद्देश्य से कुछ संरचनाओं को परिभाषित करते हैं, जैसे फ़ज़ी कंडीशंस, फ़ज़ी कम्पैरेटर्स, फ़ज़ी कांस्टैंट्स, फ़ज़ी कंस्ट्रेंट्स, फ़ज़ी थ्रेसहोल्ड्स, भाषाई लेबल्स और अन्य.

गणितीय फ़ज़ी लॉजिक[संपादित करें]

गणितीय लॉजिक में, "फ़ज़ी लॉजिक" के कई औपचारिक सिस्टम्स हैं; उनमें से अधिकांश तथाकथित टी-नोर्म फ़ज़ी लॉजिक्स से संबंधित हैं।

प्रोपोज़िशनल फ़ज़ी लॉजिक्स[संपादित करें]

सबसे महत्वपूर्ण प्रोपोज़िशनल फ़ज़ी लॉजिक्स हैं:

  • मोनोइडल टी-नोर्म-आधारित प्रोपोज़िशनल फ़ज़ी लॉजिक, लॉजिक का एक एक्सिओमेटाइज़ेशन है जहां कंजंक्शन (संयोजन) को एक लेफ्ट कंटीन्युअस (सतत) टी-नोर्म द्वारा परिभाषित किया जाता है और इम्प्लिकेशन (निहितार्थ) को टी-नोर्म के रेसिडुअम (अवशेष) के रूप में परिभाषित किया जाता है। इसके मॉडल्स MTL-अल्जेब्रास के अनुरूप होते हैं जो प्रिलाइनियर कम्युटेटिव बाउंडेड इंटीग्रल रेसिडुएटेड लेटिसेस होते हैं।
  • बेसिक प्रोपोज़िशनल फ़ज़ी लॉजिक, MTL लॉजिक का ही एक विस्तार है जहां कंजंक्शन को एक सतत टी-नोर्म के द्वारा परिभाषित किया जाता है और इम्प्लिकेशन को टी-नोर्म के रेसिडुअम के रूप में भी परिभाषित किया जाता है। इसके मॉडल्स, BL-अल्जेब्रास के अनुरूप होते हैं।
  • ल्युकासिएविक्ज़ फ़ज़ी लॉजिक (Łukasiewicz fuzzy logic), बेसिक फ़ज़ी लॉजिक BL का विस्तार है जहां स्टैंडर्ड कंजंक्शन, ल्युकासिएविक्ज़ टी-नोर्म होता है। इसमें बेसिक फ़ज़ी लॉजिक के एक्सिओम्स के साथ डबल निगेशन के एक्सिओम भी होते हैं और इसके मॉडल्स, MV-अल्जेब्रास के अनुरूप होते हैं।
  • गोडेल फ़ज़ी लॉजिक, बेसिक फ़ज़ी लॉजिक BL का विस्तार है जहां कंजंक्शन, गोडेल टी-नोर्म होता है। इसमें BL के एक्सिओम्स के साथ-साथ कंजंक्शन के आइडेम्पोटेंस का एक एक्सिओम भी होता है और इसके मॉडल्स को G-अल्जेब्रास कहा जाता है।
  • प्रोडक्ट फ़ज़ी लॉजिक, बेसिक फ़ज़ी लॉजिक BL का विस्तार है जहां कंजंक्शन, प्रोडक्ट टी-नोर्म होता है। इसमें BL के एक्सिओम्स के साथ-साथ कंजंक्शन के कैंसेलेटिविटी के लिए एक और एक्सिओम भी होता है और इसके मॉडल्स को प्रोडक्ट अल्जेब्रास कहा जाता है।
  • मूल्यांकित वाक्यविन्यास वाला फ़ज़ी लॉजिक (कभी-कभी पावेल्का'स लॉजिक (Pavelka's logic) भी कहा जाता है), EVŁ द्वारा सूचित, गणितीय फ़ज़ी लॉजिक का एक और सामान्यीकरण है। जबकि फ़ज़ी लॉजिक के उपरोक्त प्रकारों में परंपरागत वाक्यविन्यास और मेनी-वैल्यूड सिमेंटिक्स होते हैं, लेकिन EVŁ में, वाक्यविन्यास का भी मूल्यांकन किया जाता है। इसका अर्थ यही है कि प्रत्येक सूत्र का एक मूल्यांकन होता है। EVŁ के एक्सिओमेटाइज़ेशन की उत्पत्ति ल्युकास्ज़िएविक्ज़ फ़ज़ी लॉजिक से हुई है। क्लासिकल गोडेल कम्प्लीटनेस प्रमेय का सामान्यीकरण,EVŁ में प्रूवेबल (साध्य) होता है।

प्रेडिकेट फ़ज़ी लॉजिक्स[संपादित करें]

ये उपरोक्त-उल्लिखित फ़ज़ी लॉजिक में यूनिवर्सल और एक्ज़िस्टेंशियल क्वांटिफाइयर्स को ठीक उसी प्रकार से योग करके इसका विस्तार करते हैं जिस प्रकार से प्रोपोज़िशनल लॉजिक से प्रेडिकेट लॉजिक निर्मित होता है। टी-नोर्म फ़ज़ी लॉजिक्स में यूनिवर्सल (रेस्प. एक्ज़िस्टेंशियल) क्वांटिफाइयर के सिमेंटिक्स, क्वांटिफाइड उप-सूत्र के उदाहरणों के ट्रुथ डिग्रियों के इन्फिमम (रेस्प. सुप्रीमम) होते हैं।

हाइयर-ऑर्डर फ़ज़ी लॉजिक्स[संपादित करें]

ये लॉजिक्स, जिन्हें फ़ज़ी टाइप थ्यौरी भी कहा जाता है, प्रेडिकेट फ़ज़ी लॉजिक्स का विस्तार करते हैं ताकि प्रेडिकेट्स और हाइयर-ऑर्डर ऑब्जेक्ट्स को भी क्वांटिफाइ करने में सक्षम हो सके। फ़ज़ी टाइप थ्यौरी, बी. रसेल द्वारा शुरू की गई क्लासिकल सिंपल टाइप थ्यौरी का एक सामान्यीकरण है [4] और इसका गणितीय रूप से सविस्तार ए. चर्च [5] और एल.हेन्किन[6] द्वारा किया गया है।

फ़ज़ी लॉजिक के लिए डिसाइडेबिलिटी के मुद्दे[संपादित करें]

"डिसाइडेबल सबसेट" और "रिकर्सिवली इन्युमरेबल सबसेट" की धारणा, क्लासिकल मैथमेटिक्स और क्लासिकल लॉजिक के मूलभूत विचार हैं। उसके बाद, फ़ज़ी सेट थ्यौरी के ऐसी अवधारणाओं के एक उपयुक्त विस्तार का प्रश्न उठता है। फ़ज़ी ट्यूरिंग मशीन (Turing machine), मार्कोव नोर्मल फ़ज़ी एल्गोरिदम और फ़ज़ी प्रोग्राम के धारणाओं के आधार पर इ. एस.सैंटोस ने ऐसी एक दिशा में एक पहला प्रस्ताव रखा (सैंटोस 1970 देखें)। उसके बाद, एल. बायासिनो और जी. गेर्ला ने सिद्ध किया कि ऐसी परिभाषा पर्याप्त नहीं है और इसलिए निम्नलिखित परिभाषा का प्रस्ताव दिया। Ü, [0,1] में रैशनल संख्याओं के सेट को सूचित करता है। सेट S का फ़ज़ी सबसेट S [0,1], रिकर्सिवली इन्युमरेबल होता है यदि रिकर्सिव मैप h : S ×N Ü, इस तरह से मौजूद हो कि S में प्रत्येक x के लिए, n के सन्दर्भ में फंक्शन h(x,n) बढ़ रहा हो और s (x) = lim h (x, n) हो। हम कहते हैं कि s, डिसाइडेबल है यदि s और इसका पूरक –s दोनों ही रिकर्सिवली इन्युमरेबल हो। L-सबसेट्स के सामान्य मामले में ऐसी एक थ्यौरी का विस्तार, गेर्ला 2006 में प्रस्तावित है। प्रस्तावित परिभाषाएं, फ़ज़ी लॉजिक के साथ अच्छी तरह से संबंधित हैं। वास्तव में, निम्नलिखित प्रमेय सच साबित होते हैं (यदि फ़ज़ी लॉजिक के डिडक्शन अपारेटस (कटौती करने वाले साधन), कुछ स्पष्ट कार्यसाधकता को अच्छी तरह से संतुष्ट करते हों)।

प्रमेय. कोई भी एक्सिओमेटाइज़ेबल फ़ज़ी थ्यौरी, रिकर्सिवली इन्युमरेबल होता है। विशेष रूप से, लॉजिक के आधार पर ट्रू फार्मूलों (सच के सूत्र) का फ़ज़ी सेट, इस तथ्य के बावजूद रिकर्सिवली इन्युमरेबल होता है कि वैलिड फार्मूलों (वैध सूत्रों) का क्रिस्प सेट आम तौर पर रिकर्सिवली इन्युमरेबल नहीं होता है। इसके अलावा, कोई भी एक्सिओमेटाइज़ेबल और कम्प्लीट थ्यौरी, डिसाइडेबल होता है।

फ़ज़ी लॉजिक के चर्च थीसिस (Church thesis) को समर्थन देने के लिए यह एक मुक्त प्रश्न है जो यह दावा करता है कि फ़ज़ी सबसेट्स के रिकर्सिव इन्युमरेबिलिटी की प्रस्तावित धारणा, एक पर्याप्त धारणा है। इस उद्देश्य के लिए, फ़ज़ी व्याकरण और फ़ज़ी ट्यूरिंग मशीन की धारणा पर आगे की जांच आवश्यक होनी चाहिए (उदाहरण के लिए वीडर्मंस पेपर देखें)। एक और मुक्त प्रश्न, फ़ज़ी लॉजिक में गोडेल के प्रमेयों के विस्तार को ढूंढने के लिए इस धारणा को शुरू करना है।

अनुप्रयोग के क्षेत्र[संपादित करें]

फ़ज़ी लॉजिक का प्रयोग निम्न के ऑपरेशन और प्रोग्रामिंग में किया जाता है:

बहुत बड़ी सेना के क्रमानुसार चाल या गति के साथ-साथ क्रमरहित चाल को दर्शाना संभव हुआ

फ़ज़ी लॉजिक की आपत्तियां[संपादित करें]

"इमप्रिसाइज़ लॉजिक" के समान[संपादित करें]

फ़ज़ी लॉजिक, लॉजिक के किसी अन्य रूप की अपेक्षा कम प्रिसाइज़ नहीं होता है: यह इनहेरेंट्ली इमप्रिसाइज़ अवधारणाओं को हैंडल करने का एक संगठित और गणितीय पद्धति है। "कोल्डनेस" (शीतलता) की अवधारणा को समीकरण में व्यक्त नहीं किया जा सकता है क्योंकि यद्यपि तापमान, एक क्वांटिटी है लेकिन "कोल्डनेस" नहीं. हालांकि, लोगों को यह पता है कि "कोल्ड" क्या है और वे इस बात से सहमत है कि "कोल्ड" और "नॉट कोल्ड" में ज्यादा अंतर नहीं है जहां कोई वस्तु N डिग्रियों पर "कोल्ड" है लेकिन N+1 डिग्रियों पर "नॉट कोल्ड" है — बाइवैलेंस के सिद्धांत के अनुसार एक कॉन्सेप्ट क्लासिकल लॉजिक को आसानी से हैंडल नहीं किया जा सकता है। परिणाम में कोई सेट जवाब नहीं होता है इसलिए इसे 'फ़ज़ी' जवाब मान लिया जाता है। फ़ज़ी लॉजिक साधारणतया वेगनेस का एक गणितीय मॉडल है जिसे उपरोक्त उदाहरण में साबित कर दिया गया है।

प्रोबैबिलिटी (अधिसम्भाव्यता) को व्यक्त करने का एक नया तरीका[संपादित करें]

फ़ज़ी लॉजिक और प्रोबैबिलिटी (अधिसम्भाव्यता), अनिश्चितता को व्यक्त करने के अलग-अलग तरीकें हैं। जबकि फ़ज़ी लॉजिक और प्रोबैबिलिटी (अधिसम्भाव्यता) थ्यौरी दोनों का प्रयोग सब्जेक्टिव बिलीफ को प्रकट करने के लिए किया जा सकता है लेकिन फ़ज़ी सेट थ्यौरी, फ़ज़ी सेट मेम्बरशिप (अर्थात्, एक सेट में कितना वेरिएबल है) की अवधारणा का प्रयोग करता है और प्रोबैबिलिटी (अधिसम्भाव्यता) थ्यौरी, सब्जेक्टिव प्रोबैबिलिटी (व्यक्तिपरक अधिसम्भाव्यता) (व्यक्तिपरक अधिसम्भाव्यता) (अर्थात, मुझे कैसे संभाव्य लगता है कि सेट में वैरिएबल है) की अवधारणा का प्रयोग करता है। हालांकि यह अंतर अधिकतर दार्शनिक है, फ़ज़ी लॉजिक से उत्पन्न पॉसिबिलिटी मेज़र (संभावना की माप), स्वाभाविक रूप से प्रोबैबिलिटी (अधिसम्भाव्यता) मेज़र (संभाव्यता की माप) से अलग है इसलिए वे प्रत्यक्ष रूप से समकक्ष नहीं हैं। हालांकि, ब्रुनो डे फिनेटी के कार्य से कई सांख्यिकीविद् सहमत है कि सिर्फ एक ही तरह की गणितीय अनिश्चितता की आवश्यकता है और इस प्रकार फ़ज़ी लॉजिक की कोई आवश्यकता नहीं है। दूसरी ओर, बार्ट कोस्को का तर्क है कि प्रोबैबिलिटी (अधिसम्भाव्यता), फ़ज़ी लॉजिक का एक सबथ्यौरी है क्योंकि प्रोबैबिलिटी, सिर्फ एक ही तरह की अनिश्चितता को हैंडल करती है। वह फ़ज़ी सबसेटहुड की अवधारणा से बायेस के प्रमेय की व्युत्पत्ति साबित होने का दावा भी करते हैं। लोत्फी ज़ादेह का तर्क है कि फ़ज़ी लॉजिक स्वभाव से प्रोबैबिलिटी (अधिसम्भाव्यता) से अलग होता है और यह इसकी जगह नहीं ले सकता है। उन्होंने प्रोबैबिलिटी (अधिसम्भाव्यता) को फ़ज़ी प्रोबैबिलिटी (अधिसम्भाव्यता) में फ़ज़ीफ़ाइ कर दिया और इसे उसमें सामान्यीकृत भी कर दिया जिसे प्रोबैबिलिटी (अधिसम्भाव्यता) थ्यौरी कहा जाता है। अनिश्चितता के अन्य तरीकों में डेम्प्स्टर-शेफर थ्यौरी (Dempster-Shafer theory) और रफ सेट्स शामिल हैं।
ध्यान दें, हालांकि, कि फ़ज़ी लॉजिक, प्रोबैबिलिटी (अधिसम्भाव्यता) के प्रति विवादास्पद नहीं बल्कि कुछ-कुछ पूरक होता है (cf.[7])

बड़ी-बड़ी समस्याओं को मापने में कठिनाई[संपादित करें]

इस आलोचना का मुख्य कारण यही है कि जो भी समस्याएं हैं, वे सब कंडीशनल पॉसिबिलिटी के साथ ही हैं लेकिन फ़ज़ी सेट थ्यौरी, कंडीशनल प्रोबैबिलिटी (अधिसम्भाव्यता) के समकक्ष है (हैल्पर्न (2003), सेक्शन 3.8 देखें). निष्कर्ष निकालने में यह कठिनाई पैदा करता है। हालांकि प्रोबैबिलिस्टिक प्रणालियों के साथ फ़ज़ी-आधारित सिस्टम्स के तुलनात्मक क्षेत्र में अभी तक अधिक अध्ययन नहीं हो पाया है।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

नोट्स[संपादित करें]

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  2. ज़ादेह, एल. ए. (1965). "फ़ज़ी सेट्स", इनफोर्मेशन ऐंड कंट्रोल 8 (3): 338–353.
  3. ज़ादेह, एल.ए. et al. 1996 फ़ज़ी सेट्स, फ़ज़ी लॉजिक, फ़ज़ी सिस्टम्स, वर्ल्ड साइंटिफिक प्रेस, ISBN 981-02-2421-4
  4. रसेल, बी. मैथमेटिकल लॉजिक ऐज़ बेस्ड ऑन द थ्यौरी ऑफ टाइप्स, अमेरिकन जर्नल ऑफ मैथमेटिक्स 30 (1908) 222-262.
  5. चर्च, ए. ए फोर्मुलेशन ऑफ द सिंपल थ्यौरी ऑफ टाइप्स, जे. सिम्ब. लॉजिक 5 (1940) 56—68.
  6. हेन्किन, एल. कम्प्लीटनेस इन द थ्यौरी ऑफ टाइप्स, जे सिम्ब. लॉजिक 15 (1950) 81-91.
  7. नोवाक, वी. आर फ़ज़ी सेट्स ए रिज़नेबल टूल फॉर मॉडलिंग वेग फेनोमेना?, फ़ज़ी सेट्स ऐंड सिस्टम्स 156 (2005) 341—348.

ग्रंथ सूची[संपादित करें]

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