प्रेरक

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
यहाँ जाएँ: भ्रमण, खोज
कुछ छोटे आकार-प्रकार के प्रेरकत्व
अपेक्षाकृत बड़ा प्रेरकत्व जो पावर सप्लाइयों में प्रयुक्त होते हैं।

प्रेरक (inductor or a reactor) एक वैद्युत अवयव है जिसमें कोई विद्युत धारा प्रवाहित करने पर यह चुम्बकीय क्षेत्र के रूप में उर्जा का भंडारण करता है। प्रेरक द्वारा चुम्बकीय उर्जा के भंडारण की क्षमता को इसका प्रेरकत्व (inductance) कहा जाता है और इसे मापने की इकाई हेनरी है।

प्रेरक को साधारण भाषा में 'चोक' (choke) और 'कुण्डली' (coil) भी कहते हैं।

उपयोग[संपादित करें]

  • वैद्युत फिल्टर बनाने के लिये
  • उर्जा भंडारित करने के लिये ( E = L.I2/2 )
  • इम्पीडैंस मैचिंग के लिये
  • ट्यूबलाइट आदि को जलाने के लिये आरम्भ में हजारों वोल्ट पैदा करने एवं जलने के बाद उससे बहने वाली धारा को सीमित रखने के लिये।
  • पुरानी कारों एवं स्कूटरों आदि में स्पार्क पैदा करने के लिये (इग्नीशन क्वायल)

प्रेरकत्व गणना के लिये सूत्र[संपादित करें]

संरचना सूत्र प्रतीकों के अर्थ टिप्पणी
बेलनाकार वायु-कोर प्रेरक[1] L=\frac{\mu_0KN^2A}{l}
Straight wire conductor [2] L = \frac{\mu_{0}}{2\pi}\left[l\ln\frac{l+\sqrt{l^{2}+c^{2}}}{c}-\sqrt{l^{2}+c^{2}} + c \right]


 + \frac{\mu}{2\pi} o\left(\frac{l}{4+c\sqrt{\frac{2\omega\mu}{\rho}}}\right)

  • L = inductance
  • l = cylinder length
  • c = cylinder radius
  • μ0 = vacuum permeability = 4\pi nH/cm
  • μ = conductor permeability
  • p = resistivity
  • ω = phase rate
exact if ω = 0 or ω = ∞
L = 0.2 l\left(\ln\frac{4l}{d}-1\right) -0+3%
  • L = inductance (µH)
  • l = length of conductor (mm)
  • d = diameter of conductor (mm)
  • f = frequency
  • Cu or Al
  • l > 100 d
  • d2 f > 1 mm2 MHz
L = 0.2 l\left(\ln\frac{4l}{d}-\frac{3}{4}\right) +0-3%
  • L = inductance (µH)
  • l = length of conductor (mm)
  • d = diameter of conductor (mm)
  • f = frequency
  • Cu or Al
  • l > 100 d
  • d2 f < 1 mm2 MHz
वायु-क्रोड लघु बेलनाकार कुण्डली[3] L=\frac{r^2N^2}{9r+10l}
  • L = inductance (µH)
  • r = outer radius of coil (in)
  • l = length of coil (in)
  • N = number of turns
Multilayer air-core coil[कृपया उद्धरण जोड़ें] L = \frac{0.8r^2N^2}{6r+9l+10d}
  • L = inductance (µH)
  • r = mean radius of coil (in)
  • l = physical length of coil winding (in)
  • N = number of turns
  • d = depth of coil (outer radius minus inner radius) (in)
Flat spiral air-core coil[कृपया उद्धरण जोड़ें] L=\frac{r^2N^2}{(20r+28d)}
  • L = inductance (µH)
  • r = mean radius of coil (cm)
  • N = number of turns
  • d = depth of coil (outer radius minus inner radius) (cm)
L=\frac{r^2N^2}{8r+11d}
  • L = inductance (µH)
  • r = mean radius of coil (in)
  • N = number of turns
  • d = depth of coil (outer radius minus inner radius) (in)
Toroidal core (circular cross-section)[कृपया उद्धरण जोड़ें] L=\mu_0\mu_r\frac{r^2N^2}{D}
  • L = inductance (H)
  • μ0 = permeability of free space = 4\pi × 10−7 H/m
  • μr = relative permeability of core material
  • r = radius of coil winding (m)
  • N = number of turns
  • D = overall diameter of toroid (m)

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Nagaoka, Hantaro (1909-05-06). The Inductance Coefficients of Solenoids [1]. 27. Journal of the College of Science, Imperial University, Tokyo, Japan. p. 18. 
  2. The Self and Mutual Inductances of Linear Conductors, By Edward B. Rosa, Bulletin of the Bureau of Standards, Vol.4, No.2, 1908, p301-344
  3. ARRL Handbook, 66th Ed. American Radio Relay League (1989).

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]