प्रतापसिंह बारहठ

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प्रतापसिंह बारहठ (२४ मई १८९३ - २७ मई १९१८) भारत के स्वतंत्रता संग्राम के एक क्रांतिवीर थे।

परिचय[संपादित करें]

उनका जन्म राजस्थान के उदयपुर में २४ मई १८९३ में हुआ था।वे क्रान्तिवीर ठा.केसरी सिंह बारहठ के पुत्र थे। प्रारंभिक शिक्षा कोटा, अजमेर और जयपुर में हुई। क्रांतिकारी मास्टर अमीरचंद से प्रेरणा लेकर देश को स्वतंत्र करवाने में जुट गए।

वे रासबिहारी बोस का अनुसरण करते हुए क्रांतिकारी आन्दोलन में सम्मिलित हुए। रास सिंह बिहारी बोस का प्रताप पर बहुत विश्वास था। २३ दिसम्बर १९१२ को लॉर्ड हर्डिंग्स पर बम फेंकने की योजना में वे भी सम्मिलित थे। उन्हें बनारस काण्ड के सन्दर्भ में गिरफ्तार किया गया और सन् १९१६ में ५ वर्ष के सश्रम कारावास की सजा हुई। बरेली के केंद्रीय कारागार में उन्हें अमानवीय यातनाएँ दी गयीं ताकि अपने सहयोगियों का नाम उनसे पता किया जा सके किन्तु उन्होने किसी का नाम नहीं लिया। २४मई १९१८ को जेल में ही अंग्रेजों की कठोर यातनाओं से वे शहीद हो गये।बरेली जेल में चार्ल्स क्लीवलैंड ने इन्हें घोर यातनाएं दी ओर कहा - "तुम्हारी माँ रोती है " तो इस वीर ने जबाब दिया - " में अपनी माँ को चुप कराने के लिए हजारों माँओ को नहीं रुला सकता। " और किसी भी साथी का नाम नहीं बताया।

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