पुलिकट झील
| पुलिकट झील | |
|---|---|
| Pulicat Lagoon பழவேற்காடு ஏரி పులికాట్ సరస్సు | |
झील के बाधा द्वीपों पर ताड़ के पेड़ | |
| स्थान | कोरोमंडल तट आन्ध्र प्रदेश व तमिल नाडु |
| निर्देशांक | 13°33′57″N 80°10′29″E / 13.56583°N 80.17472°E |
| प्रकार | नुनखरा से खारा |
| मुख्य अन्तर्वाह | आरणी नदी, कलंगी नदी, स्वर्णामुखी नदी |
| मुख्य बहिर्वाह | बंगाल की खाड़ी |
| द्रोणी देश | |
| अधिकतम लम्बाई | 60 km (37.3 mi) |
| अधिकतम चौड़ाई | 17.5 km (10.9 mi) |
| सतही क्षेत्रफल | 250–450 km2 (97–174 mi2) (निम्न ज्वार से उच्च ज्वार) |
| औसत गहराई | 1 m (3.3 ft) |
| अधिकतम गहराई | 10 m (32.8 ft) (मुख पर) |
| द्वीप | इरुक्कम, वेनाडु तथा अन्य |
| बस्तियाँ | श्रीहरिकोटा पुलिकट सूल्लुरपेटा |
पुलिकट झील (Pulicat Lagoon) भारत के आन्ध्र प्रदेश और तमिल नाडु राज्यों में स्थित एक अनूपझील है। चिलिका झील के बाद यह 759 वर्ग किमी क्षेत्रफल वाली झील भारत की दूसरी सबसे बड़ी नुनखरा जल पारितंत्र है। इसका बड़ा भाग आन्ध्र प्रदेश के नेल्लोर ज़िला (तिरुपति ज़िले) में आता है। बालू के बने बाधा द्वीप झील को बंगाल की खाड़ी से पृथक करते हैं, और श्रीहरिकोटा एक मुख्य बाधा द्वीप है, जिसपर सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र स्थित है। झील की लम्बाई 60 किमी और चौड़ाई 5 से 15 किमी है। औसत गहराई लगभग 1 मीटर है, लेकिन समुद्र से लगे मुख के भाग में यह 10 मीटर तक हो जाती है। पुलिकट झील पक्षी अभयारण्य भी इसी झील क्षेत्र में है।[1][2]
भूगोल और स्थलाकृति
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पुलीकट झील 13.33° से 13.66° N और 80.23° to 80.25°E, के बीच स्थित है जबकि अगर इसके सूख चुके हिस्सों को भी शामिल किया जाय तो उत्तर में इसका विस्तार 14.0°N. तक है। इसका लगभग 84% हिस्सा आन्ध्र प्रदेश में और 16% हिस्सा तमिलनाडु राज्य में आता है। झील का क्षेत्रफल ज्वार के दौरान 450 square kilometre (170 mi2)और भाते के दौरान 250 square kilometre (97 mi2) के आसपास रहता है। इसकी कुल लम्बाई 60 kiloमीटर (37 mi) और चौड़ाई लगभग 0.2 kiloमीटर (0.12 mi) से 17.5 kiloमीटर (10.9 mi) के बीच है। जलवायु की दृष्टि से यह झील उष्णकटिबंधीय मानसूनी जलवायु के अंतर्गत आती है जहाँ तापमान लगभग 15 °C (59 °F) से 45 °C (113 °F) के मध्य रहता है।
संकटापन्न जलीय निकाय
[संपादित करें]हाल में हुए कुछ सर्वेक्षणों में पुलीकट झील के संकटग्रस्त होने का दावा किया गया है और इसके लिये मानवीय गतिविधियों को जिम्मेवार ठहराया गया है। एक सर्वेक्षण के मुताबिक इस झील का कुल सतही क्षेत्रफल पहले 450 वर्ग फीट हुआ करता था जो अब घटकर मात्र 350 वर्ग फीट गया है। इससे इस झील के बाशिंदों और यहाँ आने वाले हजारों प्रवासी पक्षियों के अस्तित्व पर संकट उत्पन्न हो गया है। यही नहीं इस झील की गहराई में कमी और लवणता में वृद्धि भी दर्ज की गयी है।[3]
चित्र दीर्घा
[संपादित करें]- मछली पकड़ने की परंपरागत नाव
- एशियाई ओपनबिल स्टॉर्क
- झींगा
- चानो चानो मछली (Milk fish)
- EsacusRecurvirostris (Great thick-knee)
- समुद्री कछुआ
- ओस्प्रे
- फ्लेमिंगों (रोहित)
- पुराना डच कब्रिस्तान
- पुलीकट झील
इन्हें भी देखें
[संपादित करें]सन्दर्भ
[संपादित करें]- ↑ "Lonely Planet South India & Kerala," Isabella Noble et al, Lonely Planet, 2017, ISBN 9781787012394
- ↑ "Tamil Nadu, Human Development Report," Tamil Nadu Government, Berghahn Books, 2003, ISBN 9788187358145
- ↑ कुमार, सुजीत (6 May 2015). "भारत की दूसरी बड़ी झील 'पुलिकट' खतरे में". हिन्दुस्तान टाइम्स (हिन्दी दैनिक). मूल से से 1 नवंबर 2023 को पुरालेखित।. अभिगमन तिथि: 6 May 2015.