पासवान
| पासवान | |
|---|---|
| धर्म | हिन्दू धर्म |
| भाषा | |
| देश | भारत |
| वासित राज्य | |
| क्षेत्र | पूर्वी भारत |
| आबादी | 6,943,000 (बिहार की जनसंख्या का 5.31%) |
पासवान, जिन्हें दुसाध के नाम से भी जाना जाता है, पूर्वी भारत का एक दलित समुदाय है।[1] यह समुदाय मुख्यतः बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड जैसे राज्यों में पाया जाता है। उर्दू शब्द "पासवान" का अर्थ संभवतः "अंगरक्षक" होता है। पासवान समुदाय के लोग ऐसा दावा करते है कि, यह नाम उन्हें उस समय दिया गया जब उन्होंने सिराजुद्दौला के विरुद्ध ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की ओर से युद्ध में भाग लिया था। हालांकि प्रामाणिकता संदिग्ध है। युद्ध के बाद उन्हें स्थानीय स्तर पर चौकीदार या कर-संग्राहक के रूप में कार्य करने का अवसर मिला।[2]
व्युत्पत्ति
[संपादित करें]पासवान समुदाय अपनी उत्पत्ति को विभिन्न पौराणिक या लोककथाओं से जोड़कर देखता है। कुछ लोगों का मानना है कि वे राहु से उत्पन्न हुए हैं, जबकि अन्य दुशासन से अपना संबंध जोड़ते हैं। कुछ नवयुवक समूह स्वयं को गहलोत वंश से जोड़ते हैं, जबकि अन्य इस दावे से असहमति जताते हैं।[3]
कुछ विद्वान यह तर्क देते हैं कि पासवान मिश्रित वंश से उत्पन्न हुए।[3]
इतिहास
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पासवान समुदाय को ऐतिहासिक रूप से अस्पृश्य वर्ग के रूप में देखा गया है।[4] बिहार में यह समुदाय प्रायः भूमिहीन कृषि श्रमिक, चौकीदार और संदेशवाहक के रूप में कार्यरत रहा है।[5] यह समुदाय ग्रामीण सामंती समाज में सबसे अधिक भेदभाव झेलने वाले समूहों में से एक रहा है।
1900 से पहले पासवान समुदाय के लोग सूअर पालन का कार्य भी करते थे, जो स्थानीय स्तर पर सामाजिक और धार्मिक कारणों से विवादास्पद था।[3] कुछ अध्ययनों में इस बात का उल्लेख है कि उन्होंने इस पेशे को आत्मरक्षा के प्रतीक के रूप में अपनाया था।
पासवानों का एक सैन्य परंपरा से भी संबंध रहा है, और 18वीं शताब्दी में इनके कई सदस्य ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना में शामिल हुए थे।[6]
2011 की भारत जनगणना के अनुसार, उत्तर प्रदेश में पासवान समुदाय की आबादी 2,30,593 और बिहार में 49,45,165 थी।[7]
पासवान समुदाय के लोकनायक बाबा चौहरमल माने जाते हैं, जिनकी कथा बिहार के लोकसाहित्य में प्रसिद्ध है। कथा के अनुसार चौहरमल ने सामाजिक अन्याय के विरुद्ध संघर्ष किया, और यह कथा समुदाय की सामूहिक चेतना का प्रतीक बन गई।[8]
राजनीति
[संपादित करें]1900 के दशक की शुरुआत में सामाजिक और राजनीतिक अधिकारों की मांग के लिए कई जातीय संगठन बने। पासवानों ने 1911 में अपनी "पासवान सभा" का गठन किया, जिसका उद्देश्य सामाजिक उन्नयन और क्षत्रिय दर्जे की मांग करना था।[9]
बाद में, बिहार की राजनीति में राम विलास पासवान के नेतृत्व में यह समुदाय एक सशक्त राजनीतिक शक्ति के रूप में उभरा। उन्होंने लोक जनशक्ति पार्टी की स्थापना की, जिसने राष्ट्रीय जनता दल के साथ गठबंधन किया और सामाजिक न्याय की राजनीति को आगे बढ़ाया।[10]
अंतर-जातीय संघर्ष
[संपादित करें]1970 के दशक में बेलछी नरसंहार जैसे कई घटनाक्रमों में पासवान समुदाय की सामाजिक-आर्थिक असमानता उजागर हुई।[11] इसके अतिरिक्त, भोजपुर क्षेत्र में हुए किसान आंदोलनों और सेनारी नरसंहार में भी यह समुदाय शामिल रहा।[12]
नेपाल में पासवान
[संपादित करें]नेपाल के केन्द्रीय सांख्यिकी ब्यूरो के अनुसार पासवान, मधेशी दलित समुदाय का एक उपसमूह हैं। 2011 की नेपाल जनगणना के अनुसार, देश में 2,08,910 (0.8%) पासवान जनसंख्या दर्ज की गई।[13]
यह भी देखें
[संपादित करें]सन्दर्भ
[संपादित करें]- ↑ Mendelsohn, Oliver; Vicziany, Marika (1998). The Untouchables: Subordination, Poverty and the State in Modern India. Cambridge University Press. p. xiii. ISBN 978-0-52155-671-2.
- ↑ "Who are the Paswans? 'Upwardly mobile, powerful' Dalit group at centre of Bihar polls buzz". The Print. अभिगमन तिथि: 2020-11-30.
- 1 2 3 Narayan, Badri (2013). "Documenting Dissent". In Channa, Subhadra Mitra; Mencher, Joan P. (eds.). Life as a Dalit: Views from the Bottom on Caste in India. SAGE Publications India. p. 322–323. ISBN 978-8-13211-777-3.
- ↑ Mendelsohn, Oliver; Vicziany, Marika (1998). The Untouchables: Subordination, Poverty and the State in Modern India. Cambridge University Press. p. 6. ISBN 978-0-52155-671-2.
- ↑ Hewitt, J. F. (1893). "The Tribes and Castes of Bengal". Journal of the Royal Asiatic Society of Great Britain and Ireland: 237–300.
- ↑ Society and Circulation: Mobile People and Itinerant Cultures in South Asia, 1750–1950. Anthem Press. 2006. p. 299.
- ↑ "DATA HIGHLIGHTS : THE SCHEDULED CASTES Census of India 2001" (PDF).
- ↑ Communication, Culture and Confrontation. SAGE Publications. 2010. p. 111.
- ↑ Kunnath, George (2018). Rebels From the Mud Houses: Dalits and the Making of the Maoist Revolution. Taylor and Francis Group. p. 66.
- ↑ Kumar, Sanjay (2018). Post Mandal Politics in Bihar. p. 133.
- ↑ Sinha, A. (2011). Nitish Kumar and the Rise of Bihar. pp. 82–83.
- ↑ "10 get death penalty for Senari massacre". The Hindu. 2016-11-16.
- ↑ Population Monograph of Nepal, Volume II