पाश्चुरीकरण

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पाश्चुरीकरण (Pasteurization) एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमे किसी भोज्य पदार्थ (अमूमन तरल) को खास तापमान पर निर्धारित समय के लिए गर्म करने के

बाद तुरंत ठंडा कर लिया जाता है, जिससे इसमे मौजूद सूक्ष्म जीवाणु निष्क्रिय हो जाते है | इसके चलते इसे लम्बे समय तक संरक्षित रखना संभव हो जाता है |

इस प्रक्रिया को इजाद करने का श्रेय फ्रांसीसी केमिस्ट व्

माइक्रोबायोलोजीस्ट लुई पाश्चर को जाता है, जिनके नाम

पर ही इसका नाम पाश्चुरीकरण

पड़ा |वर्ष १८६२ में इसया का






प्रथम परीक्षण किया गया था

| इसे मूलत: वाइन व बियर जैसे

मद्य पदार्थो को जल्द खराब होने

से बचाने के लिए ईजाद किया

गया था | बाद में इसका इस्तेमाल दुग्ध पदार्थो के संरक्षण में भी होने लगा |दूध को पाश्चुरिकृत करने का ख्याल सबसे पहले वर्ष १८८६ में जर्मन कृषि रसायनशास्त्री फ्रांज वाँन सॉक्सलेट के मन में आया | उच्च तापमान व कम समय में पाश्चुरिकृत किए गए दूध को रेफ्रिजरेटर में दो से तीन हफ्ते तक संरक्षित रखा जा सकता है, वही अल्ट्रा पाश्चुरिकृत दूध दो - तीन महीनो तक सुरक्षित रह सकता है |

सन्दर्भ[संपादित करें]