शारदा सिन्हा
| शारदा सिन्हा | |
|---|---|
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2018 में शारदा सिन्हा | |
| जन्म |
01 अक्टूबर 1952 हुलास, बिहार, भारत |
| मौत |
5 नवम्बर 2024 (उम्र 72 वर्ष) नई दिल्ली, भारत |
| राष्ट्रीयता | भारतीय |
| उपनाम | बिहार स्वर कोकिला |
| शिक्षा की जगह | मगध महिला कॉलेज, प्रयाग संगीत समिति, ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय |
| पेशा | गायिका, लोकगायिका, शास्त्रीय गायिका |
| कार्यकाल | 1980–2024 |
| जीवनसाथी | ब्रजकिशोर सिन्हा (वि. 1970–2024) |
| बच्चे | 2 |
| पुरस्कार |
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शारदा सिन्हा (1 अक्टूबर 1952 – 5 नवम्बर 2024) एक भारतीय लोक संगीत और हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत की गायिका थीं। वे मुख्यतः मैथिली, भोजपुरी और मगही भाषाओं में लोकगीत गाती थीं, और उन्हें बिहार कोकिला और भोजपुरी कोकिला के नाम से जाना जाता था।[1][2]
प्रारंभिक जीवन
[संपादित करें]शारदा सिन्हा का जन्म 1 अक्टूबर 1952 को बिहार के सुपौल ज़िले के रघोपुर प्रखंड के हुलास गाँव में एक भूमिहार परिवार में हुआ था।[3] वे अपने पिता सुखदेव ठाकुर की नौ संतानों में इकलौती बेटी थीं।[4] उनकी ससुराल बेगूसराय जिले के सिहामा गाँव में है।

करियर
[संपादित करें]शारदा सिन्हा ने अपने गायन की शुरुआत मैथिली लोकगीतों से की थी। वे छठ महापर्व पर गाए जाने वाले पारंपरिक गीतों के लिए विशेष रूप से जानी जाती हैं। उन्होंने भोजपुरी, मगही और हिंदी में भी कई लोकगीत गाए।[5][6][7]
उन्होंने "काहे टोसे सजना" (मैंने प्यार किया), "तार बिजली" (गैंग्स ऑफ वासेपुर 2) जैसी फ़िल्मी गीतों में भी अपनी आवाज़ दी।[8][9]
छठ गीत
[संपादित करें]शारदा सिन्हा की सबसे प्रसिद्ध कृतियाँ छठ पूजा के गीत हैं। "पाहिले पहिल छठी मईया", "सुपवो ना मिले माई", "केलवा के पात पर", "बहंगी लचकत जाए", "पटना के घाट पर", जैसे अनेक गीत आज भी बिहार और पूर्वांचल में छठ पूजा के दौरान गूंजते हैं।[10][11]
व्यक्तिगत जीवन एवं निधन
[संपादित करें]शारदा सिन्हा का विवाह 1970 में ब्रजकिशोर सिन्हा से हुआ था।[12] उनके दो संतान – पुत्र अंशुमान और पुत्री वंदना हैं। 2024 में पति की मृत्यु के कुछ सप्ताह बाद, 5 नवम्बर को AIIMS दिल्ली में 72 वर्ष की उम्र में शारदा सिन्हा का निधन हो गया।[13] उनका अंतिम संस्कार पटना में राज्य सम्मान के साथ किया गया।[14][15]
पुरस्कार
[संपादित करें]- 1991 – पद्म श्री
- 2000 – संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार
- 2018 – पद्म भूषण
- 2025 – पद्म विभूषण (मरणोपरांत) [16]
- 2015 - बिहार रत्न व बिहार गौरव
संदर्भ
[संपादित करें]- ↑ "Sharda Sinha aka Bihar Kokila admitted to Delhi AIIMS emergency ward". अभिगमन तिथि: 30 October 2024.
- ↑ Sinha, Ragini (15 November 2021). "शारदा सिन्हा बिहार की एक लोकप्रिय मैथिली गायिका हैं।". Dainik Jagran. अभिगमन तिथि: 15 November 2021.
- ↑ "Veteran Folk Singer Sharda Sinha passes away in New Delhi". अभिगमन तिथि: 8 November 2024.
- ↑ "पिता ने की थी 2 शादियां, 9 बच्चों में इकलौती बेटी थीं शारदा सिन्हा". 6 November 2024.
- ↑ "Beauty of spring narrated through folk songs". 22 March 2009.
- ↑ Manisha Prakash (4 October 2003). "Music maestros add to Puja festivities". The Times of India. अभिगमन तिथि: 25 April 2009.
- ↑ Faizan Ahmad & Dipak Mishra (19 February 2008). "Mauritius scholarship for two". The Times of India. अभिगमन तिथि: 25 April 2009.
- ↑ "A new brand of music in Gangs Of Wasseypur". August 2012.
- ↑ "शारदा सिन्हा: स्कूल में टेप रिकॉर्डर पर रिकॉर्ड किया था पहला गाना, इस शिक्षिका ने की थी मदद". प्रभात खबर. 6 नवम्बर 2024. अभिगमन तिथि: 28 मई 2025.
- ↑ "Sweet and sour festive notes in the air – Sharda back with a bang after decade". 4 November 2016.
- ↑ "पद्म विभूषण शारदा सिन्हा की छठ गीतों की गूंज, हर साल होती है नयी याद ताजा". अमर उजाला. 25 जनवरी 2025. अभिगमन तिथि: 28 मई 2025.
- ↑ "Sharda Sinha who could barely survive a month after her husband passed away". 5 November 2024.
- ↑ "Sharda Sinha dies at 72". 5 November 2024.[मृत कड़ियाँ]
- ↑ "Sharda Sinha's Last Rites To Be Performed With Full State Honours". 7 November 2024.
- ↑ "Famous folk singer Sharda Sinha dies at the age of 72, was admitted to Delhi AIIMS for treatment" (अंग्रेज़ी भाषा में). DD News. 5 November 2024. अभिगमन तिथि: 28 May 2025.
- ↑ "Padma Awards 2025 announced" (अंग्रेज़ी भाषा में). Press Information Bureau, Government of India. 25 January 2025. अभिगमन तिथि: 28 May 2025.
बाहरी कड़ियाँ
[संपादित करें]- इंटरनेट मूवी डेटाबेस पर शारदा सिन्हा
- शारदा सिन्हा discography at Discogs