पदमंजरी

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पदमंजरी काशिकावृत्ति का भाष्य है। इसके रचयिता हरदत्त हैं[1][2] जिन्होंने आपदस्तम्ब के धर्मसूत्र का भी भाष्य लिखा है। यह ग्यारहवीं शताब्दी की रचना है। इसका प्रकाशन बनारस से हुआ था[3]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Caturvedī, S. (1969) (lv में). Vāgvijñāna: bhāshāśāstra. Vidyābhavana Rāshṭrabhāshā granthamālā. Chŏkhambā Vidyābhavana. http://books.google.co.in/books?id=0w8-AAAAMAAJ. अभिगमन तिथि: Dec 3, 2017. 
  2. Chaturvedi, R.P. (hi में). Hindi Vyakaran:. प॰ 5. आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 978-81-7482-782-1. http://books.google.co.in/books?id=cjilBQAAQBAJ&pg=PA5. अभिगमन तिथि: Dec 3, 2017. 
  3. Jhā, V. (1977) (lv में). Kāmatāprasāda Gurū śatī-smr̥ti-grantha. Rājā Baladevadāsa Biṛalā granthamālā. Nāgarīpracāriṇī Sabhā. http://books.google.co.in/books?id=cNnorSzdZJUC. अभिगमन तिथि: Dec 3, 2017. 

इन्हें भी देखें[संपादित करें]