निम्नस्खलन

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महासागरीय भौगोलिक तख़्ते निम्नस्खलित होने से महासागरीय गर्त (खाईयाँ या ट्रेन्च) बन जाते हैं

भूविज्ञान में निम्नस्खलन या सबडक्शन (subduction) उस प्रक्रिया को कहते हैं जिसमें दो भौगोलिक तख़्तों की संमिलन सीमा पर एक तख़्ता दूसरे के नीचे फिसलकर दबने लगता है, यानि कि उसका दूसरे तख़्ते के नीचे स्खलन होने लगता है। निम्नस्खलन क्षेत्र (सबडक्शन ज़ोन, subduction zone) पृथ्वी के वे इलाक़े होते हैं जहाँ यह निम्नस्खलन चल रहा हो। अक्सर इन निम्नस्खलन क्षेत्रों में ज्वालामुखी, पर्वतमालाएँ, या (यदि यह समुद्री क्षेत्र में हो) महासागरीय गर्त (खाईयाँ या ट्रेन्च) बन जाते हैं। निम्नस्खलन की प्रक्रिया की गति चंद सेन्टीमीटर प्रति वर्ष ही होती है। एक तख़्ता दूसरे तख़्ते के नीचे दो से आठ सेमी प्रति वर्ष के औसत दर से खिसकता है। भारतीय उपमहाद्वीप में भारतीय प्लेट के यूरेशियाई प्लेट की संमिलन सीमा पर भारतीय प्लेट के निम्नस्खलन से ही हिमालयतिब्बत के पठार की उच्चभूमि का निर्माण हुआ है।[1]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "Essentials of Physical Geology," Reed Wicander, James S. Monroe; Cengage Learning, 2008, ISBN 9781133008729, ... The Himalayas began forming when India collided with Asia about 40 to 50 million years ago ... As the Indian plate moved northward, a subduction zone formed along the southern margin of Asia where oceanic lithosphere was consumed. Partial melting generated magma, which rose to form a volcanic arc ...