नाभीस्थान

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नाभीस्थान स्थित सदियों से निरंतर जलती दो ज्वालायें

नाभीस्थान नेपाल के दैलेख जिले में स्थित एक तीर्थस्थल है। नेपाल के प्रख्यात पंचकोशी तिर्थस्थल के पांच मुख्य स्थानों में शामिल यह तीर्थस्थल शिरस्थान मन्दिर से आधा घंटे की पैदल दुरी पर स्थित है।

विशेषताएं[संपादित करें]

नाभीस्थान में भी शिरस्थान की तरह इन्द्रज्वाला और बडीज्वाला नाम की दो ज्वालायें चौवीस घंटे जलती हुई दिखती हैं। यहां कालभैरव का मन्दिर है, कालभैरव मन्दिर में हमेशा पर्दा लगाया रहता है, धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कालभैरव मन्दिर के भितर केवल पुजारी का रहना ही मान्य है । अन्य व्यक्तियों के लिए मूर्ति को देखना वर्जित है। पूजारी भी केवल मुख्य पूजा के दिन ही मन्दिर के अन्दर प्रवेस कर सकते हैं।

यहाँ का करीब २०० साल पुराना शमी वृक्ष इस स्थान को और भी मन मोहक बनाता है। इस स्थान पर दुर्लभ रुद्राक्ष का वृक्ष भी अवस्थित है। नेपाल भ्रमण में निकले योगी नरहरीनाथ ने नाभीस्थान में कोटीहोम कराकर दैलेख जिले में रहे ऐतिहासिक, पुरातात्विक शिलालेख, अग्नीकुंड, छिपे हुए पानी के स्रोत और छिपे हुए मुर्तीओं का समेत उत्खनन किया था। नाभीस्थान में भी शिरस्थान जैसा ही गाधीघर है। दुल्लु के राजा भक्तबहादुर शाह ने विक्रम संवत १७९४ में चढाया हुआ घंटा लगायत के अति प्राचिन सामाग्री ईस मन्दिर में रहे हें। महन्त और पूजारी मन्दिर की गुठी से यहां की पूजा आजा का खर्चा चलाते हें।[1]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "पर्यटक गन्तव्य : पंञ्चकोशी क्षेत्र" (नेपाली में). कारोबार.