नाई

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जो दूसरों के बाल काटता एवं सवांरता है उसे नाई (barber) कहते हैं। भारत में यह एक जाति भी है जिसके सदस्य मुख्यत: बाल काटने एवं हिन्दू संस्कारों में मुख्य सहायक का काम करते आये हैं।

महाराजा महापद्मनंद जो नन्द वंश (नाई) के जनक कहे जाते है। महान एवम् पराक्रमी योद्धा थे महापद्मनंद महाराज चक्रवर्ती सम्राट के नाम से भी जाना जाता था। कुछ कूटनीतिक चालो की वजह से इस वंश को क्षति पहुंचाया गया था, कहा जाता है कि चन्द्र गुप्त मौर्य भी इन्हीं के वंशज हैं। चन्द्रगुप्त मौर्य के बचपन का नाम चन्द्र नन्द था जिनका जन्म महाराज की दासी मुरा से हुआ था। दासी मुरा महाराज से अधिकाधिक प्रेम करती थी जिसके फलस्वरूप चन्द्र नन्द की उत्पत्ति हुई। चन्द्र नन्द का नाम "चन्द्रगुप्त" (चाणक्य) उर्फ विष्णुगुप्त ने रखा था, इन्होंने अपने नाम का आखिरी शब्द "गुप्त" और चन्द्र नन्द की माता के नाम मुरा से "मौर्य" कर दिया था, इस प्रकार चन्द्र नन्द से चन्द्र गुप्त मौर्य नाम पड़ा था।। नाई समझ में बहुत से महान एवम् पराक्रमी राजा हुए थे।

तत्कालीन वैज्ञानिक बाशिश्वर सेन ( बोसी सेन) भारत के पहले कृषि वैज्ञानिक थे, जिन्होंने भारत को संकर बीज की उत्पत्ति के बारे में बताया और वे कामयाब भी हुए थे।। इन्हें पद्मभूषण अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया था, और ये हरित क्रांति के प्रखर समर्थक और कार्यकर्ता भी थे। इनकी शोध शाला हरित क्रांति के समय अहम भूमिका निभाएं है।।

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