डाँगी

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
नेविगेशन पर जाएँ खोज पर जाएँ

दांगी / डांगी राजस्थान के मुख्य रूप से उदयपुर और इसके आसपास के जिलों में रहने वाला किसान वर्ग है। जो अपना उद्भव गुजरात के पावागढ़ क्षेत्र को मानते हैं।[1] सरकार ने डांगी वर्ग को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) में वर्गीकृत किया है।

वहीं दांगी समाज पूरे देश में फैला हुआ है, जिसमें मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, बिहार, राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा, महाराष्ट्र और इसके अलावा नेपाल और भूटान में भी दांगी समाज पाया जाता है ।

राजस्थान में दांगी अपने आप को डांगी पटेल कहते हैं, जबकि मध्यप्रदेश में बुंदेलखंड में दांगी ठाकुर, दांगी राजपूत के नाम से जाने जाते हैं। दांगी एक अति प्राचीन क्षत्रिय समाज हैं । जिसका अपना गौरव पूर्व अतीत और इतिहास रहा हैं । दांगी जाती का मुख्य व्यवसाय खेती और कृषि कार्य हैं, जबकि साथ ने व्यापार, सेवा क्षेत्र में भी समाज बहुत आगे बढ़ चुका है ।

डाँगी अपने वर्ग में शिक्षा और खेलकूद को प्रोत्साहन देने के लिए समय-समय पर प्रोत्साहन कार्यक्रम भी आयोजित करते हैं।[2]

पहनावा[संपादित करें]

पुरुष धोती, अंगरखा,पहनते हैं तथा महिलाएं घाघरा, कांछली, चुंदड़ी या पोमछा ओढ़तीं है।

आभूषणों में महिलाएं कड़ियां, नेवरियां, जांजरियां, सड़प, गाणी, नथ, बोर, कंदोरा, हांली, ऑगञा, गाळा, फोलरी, दामणा आदि पहनतीं हैं तो पुरुष मिरकी, लंगर, कंदोरा, मूंदड़ी आदि पहनते हैं।

लोक नृत्य व रीति रिवाज[संपादित करें]

मेवाड़ क्षेत्र उदयपुर और चितौड़गढ़ में होली के समय पुरुषों का गैर नृत्य उल्लेखनीय तो महिलाओं का गणगौर, घूमर आदि।

वहीं मृत्यु भोज और पंचायती जैसी कुुुरीतियां मौजूद है। प्रतापगढ़ क्षेत्र में मृत्युभोज सीमित हैं। तो शादियों में माताजी पूजन, गणेश स्थापना, भेरू पूजन, गोतीडा (चाक पूजन), रोड़ी नूतन, हेवरा,तोरण, मंगल फेरे, डोरडा खोलना आदि परंपराएं जीवंत है साथ ही चितौड़गढ़ व उदयपुर क्षेत्र के कुछ गावों में बैंड-बाजे पर सामाजिक प्रतिबंध है।

संदर्भ[संपादित करें]

  1. "डांगी समाज के हर घर से एक सदस्य हार्दिक से मिलेगा". Dainik Bhaskar. अभिगमन तिथि 2021-05-31.
  2. Rao, Surendra. "डांगी समाज की प्रतिभाएं सम्मानित". Patrika News. अभिगमन तिथि 2021-05-31.