तोरण

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तोरण किसी बड़े भवन, दुर्ग या नगर का वह बाहरी बड़ा द्वार जिसका ऊपरी भाग मंडपाकार हो और प्रायः पताकाओं, मालाओं आदि से सजाया जाता हो। तोरण, हिन्दू, बौद्ध तथा जैन वास्तुकला का प्रमुख अंग है और दक्षिण एशिया दक्षिणपूर्व एशिया तथा पूर्वी एशिया के पुराने संरचनाओं में पाया जाता है।

चित्र[संपादित करें]

साँची के स्तूप मे, उत्तरी द्वार स्थित तोरण्, तृतीय शती में निर्मित

छबिदीर्घा[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]