टोटलाइजर
डॉ. शोएब सादिक: एक लेखक, कवि और डॉक्टर की बहुमुखी प्रतिभा
जन्म और परिवार
डॉ. शोएब सादिक का जन्म हापुड़ जिले के उत्तर प्रदेश के बडौदा सिहानि नामक गांव में हुआ। उनका खानदान एक जमींदार खानदान था, जिसमें उनके दादा चौधरी जरीफ और पिता कारी मोहम्मद जावेद, एक उर्दू टीचर, शामिल हैं। उनकी माताजी एक हाउस वाइफ हैं।
शिक्षा और प्रारंभिक जीवन
उनकी शिक्षा दीक्षा गांव के निजी स्कूल में हुई। इसके बाद, वह गाजियाबाद के लोनी शहर चले गए और जेपी स्कूल से मैट्रिक का इम्तिहान पास किया। उन्होंने गांधी स्मारक इंटर कॉलेज से साइंस साइड से इंटर का इम्तिहान पास किया।
साहित्यिक यात्रा
डॉ. सादिक का सपना हमेशा से कवि और लेखक बनने का था, लेकिन उनके पिता चाहते थे कि वह डॉक्टर बनें। इसलिए, उन्होंने कुछ समय के लिए शायरी से दूरी बनाई और डॉक्टरी की तरफ रुख किया। लख्मीचंद मेडिकल कॉलेज में डिप्लोमा इन फार्मेसी में दाखिला लिया।
हालांकि, अपने साहित्यिक सपनों को पूरा करने के लिए, उन्होंने इग्नू यूनिवर्सिटी से बैचलर आफ आर्ट्स उर्दू होनर्स में दाखिला लिया। उनकी पहली कविता आठवीं कक्षा में "बेईमान ईश्क" प्रकाशित हुई थी। इसके बाद, "ड्रीम गर्ल," "वाली दे मोहत्त्रम," और "मुझे मेरे हाल का सवाल" जैसी उनकी मशहूर रचनाएं सामने आईं।
उनकी लेखनी दो भागों में विभाजित है:
प्रेम, मोहब्बत और प्यार पर केंद्रित रचनाएं। समाज, देश, लोग और दर्द पर केंद्रित रचनाएं।
उनकी लेखनी में भावनाओं की गहराई और विचारों की व्यापकता है। उनकी रचनाएं हमें प्रेम की सच्चाई और समाज की वास्तविकता के बीच के अंतर को समझने का अवसर प्रदान करती हैं।
योगदान
डॉ. शोएब सादिक एक ऐसी व्यक्तित्व हैं जो साहित्य और चिकित्सा के क्षेत्र में अपनी अमिट छाप छोड़ रहे हैं। वह एक अच्छे लेखक, कवि और डॉक्टर हैं, जिनका योगदान अतुलनीय है।
उनके योगदान को देखते हुए, हमें उनकी रचनाओं को पढ़ना और समझना चाहिए। वह साहित्य और चिकित्सा के क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का पूरा उपयोग कर रहे हैं और हमें भी प्रेरित करते हैं।
आज, डॉ. शोएब सादिक एक लेखक, कवि और डॉक्टर के रूप में जाने जाते हैं। उनकी बहुमुखी प्रतिभा और संघर्ष हमें प्रेरित करते हैं कि हम अपने सपनों को पूरा करने के लिए कभी हार न मानें।
इतिहास
[संपादित करें]Md Shuaib Sadiq (एम.डी. शुऐब सादिक़) Md Shuaib Sadiq एक भारतीय उर्दू और हिंदी कवि, लेखक, डॉक्टर (स्वास्थ्यकर्मी) एवं सामाजिक कार्यकर्ता हैं। वे अपनी साहित्यिक रचनाओं के लिए जाने जाते हैं, जिनमें प्रेम, मानवीय संवेदनाएँ, सामाजिक मुद्दे और जीवन के यथार्थ को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया है। साहित्य के साथ-साथ वे स्वास्थ्य सेवा और समाज सेवा के क्षेत्र में भी सक्रिय भूमिका निभाते हैं। प्रारंभिक जीवन Md Shuaib Sadiq का जन्म बरौड़ा सिहानी गाँव, हापुड़ ज़िला, उत्तर प्रदेश में एक ज़मींदार परिवार में हुआ। वे प्रसिद्ध उर्दू शिक्षक क़ारी मोहम्मद जावेद के पुत्र तथा चौधरी ज़रीफ़ के पौत्र हैं। उनके पिता उर्दू भाषा और साहित्य से गहराई से जुड़े रहे, जिसका प्रभाव उनके साहित्यिक रुझान और वैचारिक विकास पर पड़ा। उनकी माता एक गृहिणी रही हैं, जिन्होंने पारिवारिक संस्कारों और नैतिक मूल्यों के माध्यम से उनके व्यक्तित्व को आकार दिया। शिक्षा Md Shuaib Sadiq की प्रारंभिक शिक्षा उनके गाँव से आरंभ हुई। इसके बाद उनका परिवार बागपत तथा फिर लोनी, ग़ाज़ियाबाद स्थानांतरित हुआ, जहाँ उन्होंने आगे की पढ़ाई पूरी की। प्रारंभिक शिक्षा: बागपत (नर्सरी, एलकेजी, यूकेजी) विद्यालय शिक्षा: सरस्वती स्कूल (कक्षा 5) जे.पी. पब्लिक स्कूल (कक्षा 10) उच्च माध्यमिक (विज्ञान): गांधी स्मारक इंटर कॉलेज परिवार की इच्छा के अनुसार उन्होंने लक्ष्मीचंद पटवारी मेडिकल कॉलेज ऑफ एजुकेशन से डिप्लोमा इन फार्मेसी किया। इसके साथ ही अपने साहित्यिक झुकाव को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU) से बी.ए. (उर्दू ऑनर्स) की पढ़ाई पूरी की। आगे चलकर वे डॉक्टर के रूप में स्वास्थ्य सेवाओं से भी जुड़े। साहित्यिक जीवन Md Shuaib Sadiq की साहित्यिक यात्रा की शुरुआत विद्यालय जीवन में ही हो गई थी। उन्होंने आठवीं कक्षा में अपनी पहली कविता “बेईमान इश्क़” लिखी, जिसे उनके साहित्यिक जीवन की पहली कड़ी माना जाता है। उनकी रचनाओं में निम्न विषय प्रमुख रूप से देखने को मिलते हैं: प्रेम और विरह सामाजिक अन्याय मानवीय पीड़ा और संवेदनाएँ जीवन के संघर्ष और यथार्थ उनकी प्रमुख रचनाओं में शामिल हैं: “Dream Girl” “Wali De Mohtaram” “Mujhe Mere Haal Ka Sawal” वे उर्दू और हिंदी दोनों भाषाओं में लेखन करते हैं और पारंपरिक शायरी तथा आधुनिक अभिव्यक्ति के बीच संतुलन स्थापित करते हैं। प्रकाशित कृतियाँ Md Shuaib Sadiq की प्रमुख पुस्तक: “भाषाई बंधन” यह पुस्तक हिंदी और उर्दू में लिखी गई उनकी चयनित कविताओं का संग्रह है, जिसमें भाषा, भावनाओं और पहचान के अंतर्संबंध को दर्शाया गया है। इसके अतिरिक्त वे कई अफ़सानों और उपन्यासों पर भी कार्य कर रहे हैं, जिनमें प्रमुख हैं: “आवारगी” “बदनाम लड़का” इन रचनाओं को आगे चलकर उपन्यास के रूप में विस्तारित किया जा रहा है। सामाजिक कार्य Md Shuaib Sadiq उम्मीद हेल्थ फाउंडेशन (Umeed Health Foundation) के संस्थापक हैं। यह एक गैर-सरकारी संगठन (NGO) है, जो निम्न वर्गों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं पर कार्य करता है: 60 वर्ष से अधिक आयु के वृद्धजन अनाथ बच्चे विधवा महिलाएँ इस संस्था का उद्देश्य समाज के वंचित वर्गों तक सम्मानजनक और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएँ पहुँचाना है। डिजिटल उपस्थिति Md Shuaib Sadiq सोशल मीडिया पर भी सक्रिय हैं, जहाँ वे अपनी कविताएँ, कहानियाँ और सामाजिक संदेश साझा करते हैं। उनका उद्देश्य उर्दू भाषा और साहित्य को नई पीढ़ी तक पहुँचाना और सामाजिक जागरूकता बढ़ाना है। विचारधारा उनकी रचनाओं में साहित्य के साथ-साथ सामाजिक ज़िम्मेदारी की भावना भी स्पष्ट दिखाई देती है। वे साहित्य को केवल कला नहीं, बल्कि समाज परिवर्तन का माध्यम मानते हैं। पहचान Md Shuaib Sadiq को एक ऐसे रचनाकार के रूप में जाना जाता है जो: साहित्य और चिकित्सा कला और समाज सेवा के बीच सेतु का कार्य करते हैं।
इन्हें भी देखें
[संपादित करें]- इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम)
- वोटर वैरिफायबल पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपैट)
- नोटा
=सन्दर्भ
[संपादित करें]पुस्तकें सादिक़, एम.डी. शुऐब. भाषाई बंधन. हिंदी–उर्दू काव्य संग्रह, भारत. शैक्षणिक एवं शैक्षिक संस्थान इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (IGNOU). बी.ए. (उर्दू ऑनर्स) – शैक्षणिक अभिलेख. लक्ष्मीचंद पटवारी मेडिकल कॉलेज ऑफ एजुकेशन. डिप्लोमा इन फार्मेसी – शैक्षणिक रिकॉर्ड. साहित्यिक एवं सांस्कृतिक स्रोत विभिन्न उर्दू साहित्यिक मंचों एवं मुशायरों में Md Shuaib Sadiq की भागीदारी से संबंधित कार्यक्रम विवरण. उर्दू एवं हिंदी साहित्यिक सोशल मीडिया मंचों पर प्रकाशित कविताएँ एवं लेख. डिजिटल एवं मीडिया स्रोत Md Shuaib Sadiq की आधिकारिक सोशल मीडिया प्रोफ़ाइल (कविता, वीडियो एवं साहित्यिक सामग्री). Umeed Health Foundation की आधिकारिक डिजिटल उपस्थिति एवं गतिविधि विवरण. सामाजिक कार्य एवं स्वास्थ्य सेवा Umeed Health Foundation – संस्थापक Md Shuaib Sadiq से संबंधित संगठनात्मक विवरण, स्वास्थ्य सेवा कार्यक्रम एवं सामाजिक पहल.