नोटा

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नोटा का अर्थ है- नन ऑफ द एबव, यानि इनमें से कोई नहीं।

2015 से नोटा पूरे देश मे लागू हुआ।

भारत निर्वाचन आयोग ने दिसंबर २०१३ के विधानसभा चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन में इनमें से कोई नहीं अर्थात `नोटा`(नन ऑफ द एबव) बटन का विकल्प उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।[1],[2], नोटा के परिणाम । यद्यपि नोटा पर पड़ने बाले वोट भले ही अधिक हों परन्तु सार्बाधिक मतप्राप्त पार्टी बिजयी घोषित होगी। बास्तबिक परिणाम जिन्हें हम दुष्परिणाम भी कह सकते हैं उन सभी उम्मीदबारों के लिए होंगे जो सम्भावित वोट ना मिलने की बजह से पराजित हो सकते हैं । और चुनाव के माध्यम से पब्लिक का किसी भी उम्मीदवार के अपात्र,अविश्वसनीय अयोग्य अथवा नापसन्द होने का यह मत केवल यह सन्देश मात्र होगा कि कितने प्रतिशत मतदाता किसी भी प्रत्याशी को नहीं चाहते हैं । हो सकता है सम्भावित नोटा अन्य किसी प्रत्याशी को मिलने से बिजयी उसके पक्ष में आ जाती। अत:प्रत्याशियों का यह मत जो किसी को नहीं प्राप्त हुआ उनके राजनैतिक कैरियर के लिए एक प्रकार का दुष्परिणाम सिद्ध हो सकता है । और दुष्परिणाम के भय से कोई भी राजनयिक जनता के किसी विशेष हिस्से को ना देखकर कर समस्त जनों को एक समान दृष्टिकोण से देखें। हालाकि यह सम्भव नहीं है ।परन्तु नोटा किसी भी व्यक्ति बिशेष का विरोध किये वगैर किसी भी व्यक्ति को हानि पहुंचाये वगैर उसकी परिभाषा बताने का एकमात्र मताधिकारिक माध्यम है । किन्हीं विशेष परिस्थितियों में नोटा बिरोध प्रदर्शन का अथवा बिशेष आन्दोलन का सार्बाधिक सान्तिपूर्ण माध्यम भी बन सकता है हालाकि ऐसे आन्दोलन के परिणामों के बिषय में केबल बिशेष योग्य व्यक्ति ही परिकल्पना कर सकते हैं । निजी स्वार्थ सिद्ध करने हेतु तमाम भ्रष्टाचारी अशिक्षित भोली मतशक्ति को नोटा का उपयोग करके लाभ मिलने की दृष्टि से गुमराह भी कर सकते हैं ।परन्तु रष्ट्रहित में प्रत्येक नागरिक का यह कर्तव्य है ऐसी जानकारी जो रष्ट्रहित में नहीं है उसे सक्रिय ना होने दें।।।।।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]