जोरहाट

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जोरहाट
Jorhat
যোৰহাট
रात्रि में जोरहाट का दृश्य
रात्रि में जोरहाट का दृश्य
जोरहाट की असम के मानचित्र पर अवस्थिति
जोरहाट
जोरहाट
असम में स्थिति
निर्देशांक: 26°45′N 94°13′E / 26.75°N 94.22°E / 26.75; 94.22निर्देशांक: 26°45′N 94°13′E / 26.75°N 94.22°E / 26.75; 94.22
देश भारत
प्रान्तअसम
ज़िलाजोरहाट ज़िला
ऊँचाई116 मी (381 फीट)
जनसंख्या (2011)
 • कुल1,53,889
भाषाएँ
 • प्रचलितअसमिया
पिनकोड785001
दूरभाष कोड0376
वाहन पंजीकरणAS-03
साक्षरता दर89.42%
जगन्नाथ बरुआ कॉलेज, जोरहाट

जोरहाट (Jorhat) भारत के असम राज्य के जोरहाट ज़िले में भोगदोई नदी के किनारे बसा हुआ एक महत्वपूर्ण शहर है। यह ज़िले का मुख्यालय भी है।[1][2]

विवरण[संपादित करें]

जोरहाट की स्थापना 18 वीं सदी के अन्तिम दशक में हुई थी। यहां पर चौकीहाट और माचरहाट नाम के दो बाजार हैं। इसी कारण इसका नाम जोरहाट रखा गया है। यहां पर विभिन्न संस्कृतियों और जातियों से जुडे लोग रहते हैं। जिनमें असमिया, मुस्लिम, पंजाबी, बिहारी और मारवाड़ी प्रमुख हैं। जोरहाट को 1983 ई. में पूर्ण रूप से जिला घोषित किया गया था। जोरहाट में मुख्यत: वैष्णव धर्म को मानने वाले लोग रहते हैं। यहां पर वैष्णव धर्म से जुड़े अनेक मठ और सतरा भी बने हुए हैं।

इतिहास[संपादित करें]

जोरहाट की स्थापना 18वीं सदी के अन्तिम दशक में हुई थी। 18वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में यह नगर स्वतंत्र अहोम राज्य की राजधानी था; जोरहाट में ताई भाषा बोलने वाले अहोम लोगों ने लगभग पहली शताब्दी में चीन के युन्नान क्षेत्र से देशांतरण किया था। जोरहाट को 1983 ई. में पूर्ण रूप से ज़िला घोषित किया गया था।

मुख्य आकर्षण[संपादित करें]

जोरहाट में मुख्यत: वैष्णव धर्म को मानने वाले लोग रहते हैं। जोरहाट पर वैष्णव धर्म से जुड़े अनेक मठ और सतरा भी बने हुए हैं।

माजुली[संपादित करें]

यह वैष्णव धर्म का सबसे बड़ा तीर्थस्थान है। माजुली में वैष्णव धर्म के औनिआती, दक्षिणपथ, गारामूर और कमलाबाड़ी जैसे अनेक तीर्थस्थान हैं। इन तीर्थस्थानों को यहां के लोग सतरा पुकारते हैं। 2016 मैं माजुली को जोरहाट से अलग करके एक नए जिले का मान्यता दिया गया और इसी के साथ माजुली देश का प्रथम नदीदीप वन गया जिसे एक जिले का मान्यता प्राप्त हुआ।

दक्षिणपथ सतरा[संपादित करें]

दक्षिणपथ सतरा की स्थापना बनमालीदेव ने की थी। सतरा के साथ उन्होंने रासलीला की शुरूआत भी की थी। यहां पर हरेक साल रासलीला का आयोजन किया जाता है।

औनियाती सत्तरा[संपादित करें]

इसकी स्थापना निरंजन पाठकदेव ने की थी। यह सतरा अपने पालनाम और अप्सराओं के नृत्य के लिए प्रसिद्ध है। इसमें पर्यटक प्राचीन असम के बर्तनों, आभूषणों और हस्त निर्मित वस्तुओं को भी देख सकते हैं।

कमलाबाड़ी सतरा[संपादित करें]

बेदुलापदम अता ने इस सतरा की स्थापना की थी। यह सतरा वैष्णव धर्म का मुख्य तीर्थस्थान है। तीर्थस्थान होने के साथ ही यह कला, साहित्य, शिक्षा और संस्कृति का मुख्य केन्द्र भी है। इसकी एक शाखा भी है। इस शाखा का नाम उत्तर कमलाबाड़ी है। यह सतरा भारत और विश्व के अलग-अलग भागों में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का प्रदर्शन करते हैं।

बेंगेनाती सतरा[संपादित करें]

इस सतरा की स्थापना मुरारीदेव ने की थी। यहां पर पर्यटक असम की संस्कृति से जुडी प्राचीन व दुलर्भ वस्तुओं का संग्रह देख सकते हैं। इन वस्तुओं में अहोम शासक स्वर्गदेव गदाधर सिंह के राजसी वस्त्र और उनका शाही छाता प्रमुख हैं। यह दोनों वस्तुएं सोने से बनी हुई है।

शिक्षण संस्थान[संपादित करें]

शीर्ष शैक्षणिक संस्थानों में जोरहाट इंजीनियरिंग कॉलेज, असम कृषि विश्वविद्यालय, जोरहाट चिकित्सा महाविद्यालय, इंस्टिट्यूट ऑफ़ रेन ऐंड मॉयस्ट डेसिडुअस फ़ॉरेस्ट रिसर्च, कॉलेज ऑफ़ वेटनरी साइंस और कॉलेज ऑफ़ फ़िशरीज शामिल हैं।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "Planning and Development of Assam," Prafulla Chandra Barua, Mittal Publications, 1992, ISBN 9788170993575
  2. "Census of India 2001: Data from the 2001 Census, including cities, villages and towns (Provisional)". Census Commission of India. मूल से 2004-06-16 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 2008-11-01.