जादू-टोना

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जादू-टोना विश्वास है कि जादू असली है और इसमें कौशल पाएँ अपनी क्षमताओं से इसका उपयोग कर सकते हैं। यह एक प्रकार का अंधविश्वास है और इसका कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है।

जादू-टोना आदि के नाम पर भारत में महिला उत्पीड़न[संपादित करें]

भारतीय उपमहाद्वीप में कई पिछड़े इलाकों में चुड़ैल आदि के आरोप लगाकर महिलाओं को सार्वजनिक रूप से सजा देने की प्रथाएँ विद्यमान हैं। इसे भिन्न भिन्न स्थानों में भिन्न भिन्न नामों से जाना जाता है यथा चुड़ैल, डायन, डाकिनी, डाकण आदि।

राजस्थान आदि में इसे डाकण प्रथा नाम से भी जाना जाता है। यह एक कुप्रथा है, जिसमें माना जाता है कि जो महीला मन्त्र-विद्या जानती है जो छोटे बच्चों एवं नवविवाहित वधुऔ को खा जाती है। विशेष रूप से यह प्रथा आदिवासियों में पाई जाती है, सबसे पहले इस प्रथा की जानकारी राजस्थान के उदयपुर जिले में खेरवाडा क्षेत्र से अग्रेंजों को मिली थी।[कृपया उद्धरण जोड़ें]

डायन प्रथा बिहार के कई इलाकों में आज भी सक्रिय है इसमे जादू के नाम पर औरतों की बलि दी जाती है।[कृपया उद्धरण जोड़ें] उत्तरप्रदेश में भी इस तरह की बलि दी जाती है।

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