चरघातांकी क्षय

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चरघातांकी क्षय से गुजरने वाली एक राशी। क्षय नियतांक का मान जितना अधिक होगा राशी का मान उतना ही तेजी से कम होगा। उपरोक्त ग्राफ में x को 0 से 5 तक परिवर्तित करने पर समबंधित क्षय नियतांक (λ) के 25, 5, 1, 1/5 और 1/25 के क्षय जो दिखाया गया है।

एक राशी को चरघातांकी क्षय के रूप में अध्ययन किया जायेगा यदि राशी अपनी वर्तमान मान के अनुक्रमानुपाती कम हो रही है अर्थात इसके मान की कम होने की दर इसके वर्तमान मान के अनुक्रमानुपाती है। गणितीय रूप में उपरोक्त कथन को निम्न अवकल समीकरण द्वारा व्यक्त किया जा सकता है, जहाँ N मात्रा है और λ (लैम्डा) एक धनात्मक संख्या है जिसे क्षय नियतांक कहते हैं:

पार्स नहीं कर पाये (सर्वर '/mathoid/local/v1/' से अमान्य लेटेक्सएमएल उत्तर ('Math extension cannot connect to Restbase.')): {\displaystyle \frac{dN}{dt} = -\lambda N.}

उपरोक्त समीकरण का हल निम्न है: चरघातांकी परिवर्तन की दर

पार्स नहीं कर पाये (सर्वर '/mathoid/local/v1/' से अमान्य लेटेक्सएमएल उत्तर ('Math extension cannot connect to Restbase.')): {\displaystyle N(t) = N_0 e^{-\lambda t}. \,}

यहाँ N(t) समय t पर मात्रा है और N0 = N(0) इसका t=0 पर अर्थात प्रारम्भिक मान है।

क्षय की मापन दर[संपादित करें]

माध्य आयु[संपादित करें]

यदि समय t पर निकाय में क्षयित तत्व की मात्रा N(t) किसी निश्चित समुच्चय में विविक्त तत्वों की संख्या है, तब उस समय का माध्य मान कलित करना सम्भव है जिसमें तत्व समुच्चय में रहता है। इस समय को माध्य आयु (अथवा साधारणतया आयुकाल अथवा जीवनकाल) कहा जाता है, इसे τ से निरूपित किया जाता है और यह प्रदर्शित किया जा सकता है कि यह क्षय दर λ, से निम्न प्रकार सम्बंध होती है:

माध्य आयु (जिसे चरघातांकी कालांक भी कहा जाता है) को "एकक समय" के रूप में भी देखा जाता है, क्योंकि हम चरघातांकी क्षय दर समीकरण को क्षय नियतांक λ के स्थान पर माध्य आयु, τ द्वारा भी लिखा जा सकता है:

यहाँ हम देख सकते हैं कि τ वह समय है जब राशी की कुल मात्रा 1/e = 0.367879441 तक कम हो जाती है।

उदाहरण के लिए, यदि प्रारम्भिक मान, N(0) = 1000 है तो समय τ, पर इसका मान N(τ) = 368 होगा।

एक इसी तरह की राशी तब प्राप्त होती है जब आधार e के स्थान पर 2 लिया जाता है। उस स्थिति में इसे "अर्ध-आयु" कहते हैं।

अर्ध-आयु[संपादित करें]

अर्धायु काल, क्षय होते हुए किसी तत्त्व का वो काल होता है; जिसमें वो तत्त्व मूल मात्रा से आधा हो जाये। इसे उस तत्त्व की अर्ध-आयु कहा जाता है और प्रतीक t1/2 से निरूपित किया जाता है। अर्ध-आयु को माध्य आयु अथवा क्षय नियतांक के व्यंजकों के रूप में लिखा जा सकता है:

पार्स नहीं कर पाये (Conversion error. Server ("https://hi.wikipedia.org/api/rest_") reported: "Cannot get mml. Server problem."): {\displaystyle t_{1/2}={\frac {\ln(2)}{\lambda }}=\tau \ln(2).}

समीकरण को 2 के आधार में लिखने पर:

पार्स नहीं कर पाये (सर्वर '/mathoid/local/v1/' से अमान्य लेटेक्सएमएल उत्तर ('Math extension cannot connect to Restbase.')): {\displaystyle N(t) = N_0 2^{-t/t_{1/2}}. \,}

अतः पदार्थ की 2−1 = 1/2 मात्रा शेष रहती है।

अतः माध्य आयु , आर्ध-आयु को 2 के प्राकृत लघुगणक से भाजित करने पर प्राप्त होती है, अर्थात:

पार्स नहीं कर पाये (सर्वर '/mathoid/local/v1/' से अमान्य लेटेक्सएमएल उत्तर ('Math extension cannot connect to Restbase.')): {\displaystyle \tau = \frac{t_{1/2}}{\ln 2} \approx 1.44 \cdot t_{1/2}.}

उदाहरण के लिए पोलोनियम-210 की अर्ध-आयु 138 दिन है और इसकी माध्य आयु 200 दिन है।

अवकल समीकरण का हल[संपादित करें]

जो समीकरण चरघातांकी क्षय को निरूपित करती है निम्न प्रकार लिखी जाती है

या, पुनर्विन्यासित करने पर,

पार्स नहीं कर पाये (Conversion error. Server ("https://hi.wikipedia.org/api/rest_") reported: "Cannot get mml. Server problem."): {\displaystyle {\frac {dN}{N}}=-\lambda dt.}

समाकलित करने पर

जहाँ C समाकलन नियतांक (समाकलन-अचर) है अतः

जहाँ अन्तिम प्रतिस्थापन, N0 = eC, को समीकरण में t = 0 द्वारा प्राप्त किया गया है, N0, t = 0 पर पदार्थ की मात्रा है।

ये भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]