चंद्रग्रहण

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जून २०११ का पूर्ण चंद्रग्रहण

चंद्रग्रहण उस खगोलीय स्थिति को कहते है जब चंद्रमा पृथ्वी के ठीक पीछे उसकी प्रच्छाया में आ जाता है।[1] ऐसा तभी हो सकता है जब सूर्य, पृथ्वी और चन्द्रमा इस क्रम में लगभग एक सीधी रेखा में अवस्थित हों। इस ज्यामितीय प्रतिबंध के कारण चंद्रग्रहण केवल पूर्णिमा को घटित हो सकता है।[2] चंद्रग्रहण का प्रकार एवं अवधि चंद्र आसंधियों के सापेक्ष चंद्रमा की स्थिति पर निर्भर करते हैं। चांद के इस रूप को 'ब्लड मून' भी कहा जाता है।[3] चंद्र ग्रहण शुरू होने के बाद ये पहले काले और फिर धीरे-धीरे सुर्ख लाल रंग में तब्दील होता है।

किसी सूर्यग्रहण के विपरीत, जो कि पृथ्वी के एक अपेक्षाकृत छोटे भाग से ही दिख पाता है, चंद्रग्रहण को पृथ्वी के रात्रि पक्ष के किसी भी भाग से देखा जा सकता है। जहाँ चंद्रमा की छाया की लघुता के कारण सूर्यग्रहण किसी भी स्थान से केवल कुछ मिनटों तक ही दिखता है, वहीं चंद्रग्रहण की अवधि कुछ घंटों की होती है। इसके अतिरिक्त चंद्रग्रहण को, सूर्यग्रहण के विपरीत, आँखों के लिए बिना किसी विशेष सुरक्षा के देखा जा सकता है, क्योंकि चंद्रग्रहण की उज्ज्वलता पूर्ण चंद्र से भी कम होती है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार ग्रहण लगना अशुभ माना जाता है। इसलिए, ग्रहण की अवधि के दौरान अनेक शुभ कार्य करना वर्जित माना जाता है।[4]

हम जानते हैं की चन्द्रमा पृथ्वी का एक उपग्रह है, उपग्रह होने के कारण यह पृथ्वी के चारों ओर परिक्रमा करता है, इस परिक्रमा के दौरान चन्द्रमा का पथ परवलयकार होता है जिसके कारण चन्द्रमा कभी पृथ्वी के निकट तो कभी पृथ्वी के सबसे अधिकतम दूरी से गुजरती है। Super Moon (सुपर मून) एक ऐसी खगोलीय घटना को कहते हैं जिसमे चन्द्रमा, पृथ्वी के सबसे करीब होता है (लगभग 3,56,500 किलोमीटर) इस स्थिति में चन्द्रमा अपनी वास्तविक स्थिति से चौदह गुना अधिक चमकीला नजर आता है। खगोल वैज्ञानिको द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार यह Super Moon (सुपर मून) की घटना लगभग हर 33 साल बाद घटित होती है।[5]

जैसा की हमें पता हर महीने में कम से कम एक बार पूर्णिमा का दिन आता है जिसमे चाँद पूरा और चमकदार दिखाई देता है, परन्तु यह घटना महीने में अगर दो बार घटित हो तो दूसरे Full Moon अर्थात पूर्णिमा को हम Blue Moon (ब्लू मून) के नाम से जानते हैं।[6]

चन्द्रग्रहण का सरलीकृत चित्रण

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "Century's longest lunar eclipse July 27". मूल से 19 जुलाई 2018 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 19 जुलाई 2018.
  2. "चंद्रग्रहण 2019 जुलाई की सम्पूर्ण जानकारी". मूल से 4 अप्रैल 2019 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 3 अप्रैल 2019.
  3. "... और जब चांद हो गया सुर्ख लाल". मूल से 28 जुलाई 2018 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 28 जुलाई 2018.
  4. "साल 2020 में चंद्र ग्रहण कब लगेगा". www.nativekhabar.com. अभिगमन तिथि 2 जून 2020.[मृत कड़ियाँ]
  5. "Chandra Grahan (Lunar Eclipse), Surya Grahan (Solar Eclipse): जानें चंद्र ग्रहण और सूर्य ग्रहण कैसे होता है". अभिगमन तिथि 2020-06-18.
  6. "Chandra Grahan (Lunar Eclipse), Surya Grahan (Solar Eclipse): जानें चंद्र ग्रहण और सूर्य ग्रहण कैसे होता है". अभिगमन तिथि 2020-06-18.

Guru Purnima: गुरु पूर्णिमा के दिन चंद्र ग्रहण का रहस्य