घोटुल

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घोटुल भारत के कई जनजातीय समुदायों में एक बड़े कुटीर को कहते हैं जिसमें पूरे गाँव के बच्चे या किशोर सामूहिक रूप से रहते हैं। यह छत्तीसगढ़ के बस्तर ज़िले और महाराष्ट्रआंध्र प्रदेश के पड़ोसी इलाक़ों के गोंड ग्रामों में विशेष रूप से मिलते हैं। अलग-अलग क्षेत्रों की घोटुल परम्पराओं में अंतर होता है - कुछ में बच्चे घोटुल में ही सोते हैं और अन्य में वे दिन भर वहाँ रहकर रात को अपने-अपने घरों में सोने जाते हैं। घोटुल में क़बीले से सम्बन्धित आस्थाएँ, ज्ञान, नृत्य-संगीत, कला और कथाएँ सीखी जाती है। कुछ में किशोर-किशोरियाँ आपस में बिना बाधा मिलकर जीवन-साथी भी चुना करते हैं हालांकि यह आधुनिक शहरी मान्यताओं के दबाव में धीरे-धीरे कम हो रहा है।[1][2]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Tribes of India: Ongoing Challenges, pp. 44, M.D. Publications Pvt. Ltd., 1996, ISBN 9788175330078, ... The Muria Gond or the Ghotul Muria, found in around Narainpur tahsil of Bastar, became famous after Elwin's magnum-opus, The Muria and Their Ghotul, was published. The Muria Gonds still have the institution of ghotul but it is dying fast ...
  2. The Gonds Of Vidarbha, Shashishekhar Gopal Deogaonkar, pp. 95, Concept Publishing Company, 2007, ISBN 9788180694745, ... However, the nature and functions of the Ghotuls on Maharashtra side and on the Bastar side do differ largely. The Bastar Ghotuls are known for the free mixing of Gond girls and boys, their singing, dancing and sleeping in the Ghotul and ultimate pairing resulting in marriages ...