खालिद इब्न अल वालिद

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खालिद इब्न अल-वालिद
Khālid ibn al-Walīd
خالد بن الوليد
उपनाम अल्लाह की तलवार
जन्म 592
मक्का, सऊदी अरब
देहांत 642
होम्स, सीरिया
समाधिस्थल खालिद इब्न अल वालिद मस्जिद
निष्ठा Flag of Afghanistan (1880–1901).svg रशीदुन ख़िलाफ़ल
सेवा/शाखा रशीदुन सेना
सेवा वर्ष 632–638
उपाधि जनरल
दस्ता मोबाइल गार्ड
नेतृत्व कमांडर इन चीफ (632–634)
फील्ड कमांडर (634–638)
मोबाइल गार्ड के कमांडर(634–638)
इराक के सेना राज्यपाल (633–634)
Chalcia के राज्यपाल(637–638)

खालिद इब्न अल वालिद; Khālid ibn al-Walīd (अरबी: خالد بن الوليد‎ सैफ अल्लाह अल मासुल) खालिद इब्न अल वालिद जो रणनिति और कोशल के लिए विख्यात है इनका जन्म 592 ईस्वी में अरब के एक नामवर परिवार में हुआ था खालिद बिन वालिद ने जब इस्लाम धर्म ग्रहण नही किया था तब इस्लाम के कट्टर सत्रु थे लेकीन 628 ईस्वी में इस्लाम स्वीकार किया इसके बाद हजरत मुहम्मद सहाव के एक मुख्य मित्र (सहाबी) के रूप में पहचान वनायी पैग्बर हजरत मुहम्मद की मृत्यु के बाद जब इस्लाम के उत्तराधिकारी जिन्हें रशीदुन खलीफा के रूप में जाना जाता हजरत अबू वकर और खलीफा उमर की खिलाफल मेँ इस्लामी सेना के कमांडर नियुक्त किए गये 7 वी शताब्दी मेँ जो इस्लामी सेना को सफलता प्राप्त हुई उसका श्रेय खालिद बिन वालिद को दिया जाता है इन्होने अलग अलग सौ से अधिक युध्द तथा लड़ायो का नेत्तृव किया रशीदुन सेना का नेत्तृव करते हुए रोमन सीरिया, मिस्त्र, फारस, मेसोपोटामिया पर इस्लामी सेना ने सफलतापुर्वक विजय प्राप्त की जिसके लिए खालिद बिन वालिद को सैफ अल्लाह या अल्लाह की तलवार के नाम से जाता है। इनकी मृत्यु सेना सेवा समाप्ति के चार वर्ष वाद 642 ईस्वी मे होम्स सीरिया में हुई थी इन्हे होम्स मेँ ही दफनाया गया था जो उस स्थान पर खालिद बिन वालिद के नाम से मस्जिद स्थित है। और जहाँ तक इस्लामी युध्द तथा लड़ाईयो पर चर्चा की जाये तो खालिद बिन वालिद का नाम प्रमुखता से लिया जाता कियोकी हर युध्द में जंबाजी तथा पैंतरेबाजी होसयरी थी जिससे दुश्मन सेना के छक्के छुट जाते थे।तथा दुनिया के एकमात्र एसे कमांडर है जिन्होने अपने जीवन में एक भी युध्द या लड़ाई नही हारी।

सैन्य नेत्तृव[संपादित करें]

वर्ष लड़ाई/युध्द नेतृत्व/विवरण
23 मार्च 625 हुद की लड़ाई
629 मुत्हा की लड़ाई खालिद बिन वालिद ने विशाल रोम सेना के सामने एक छोटी सी मुस्लिम सेना का नेत्तृव किया और रोमन सेना को वूरी तहर पराजित कर विजय प्राप्त की
अप्रैल 633 चेन्स की लड़ाई खालिद बिन वालिद की फारसी साम्राज्य के विरुध्द पहली लड़ाई थी
मई 633 बलाजा की लड़ाई खालिद बिन वालिद निर्णाक पैंतरेबाजी का उपयोग कर फारसी साम्राज्य की बड़ी ताकतो को हरा दिया
मई 633 उल्लेश की लड़ाई
नबम्वर 633 जुमाइल की लड़ाई फारसी साम्राज्य को पराजित करके मेसोपोटामिया, इराक पर विजय प्राप्त की
जनवरी 634 फिराज की लड़ाई इस लड़ाई मेँ खालिद बिन वालिद ने फारसी साम्राज्य और ईसाई अरबो की वड़ी संयुक्त सेना को हरा दिया था
जून–जूलाई 634 बोसरा की लड़ाई खालिद बिन वालिद के नेत्तृव मे अरब मुस्लिम सेना ने रोमन और ईसाई अरबो की एक विशाल सेना को हरा कर सीरिया के छोटे से शहर वोसरा जीता,
जूलाई 634 अजंदायन की लड़ाई मुस्लिम सेना खालिद बिन वालिद के नेत्तृव तथा रोमन सेना हरक्यूलस के नेत्तृव में एक वड़ी लड़ाई हुई थी जिसमें मुस्लिम सेना ने विजय प्राप्त की,
635 फाल्ह की लड़ाई खालिद बिन वालिद ने रोमन साम्राज्य को हरा कर रोमन साम्राज्य से फिलिस्तीन, जार्डन और सीरिया को जीता जिसका नेत्तृव हरक्यूलस ने किया था
अगस्त 636 यरमूक की लड़ाई खालिद बिन वालिद के नेत्तृव में रोमन साम्राज्य को अरब मुस्लिम सेना ने वूरी तहर पराजित किया
637 आयरन ब्रिज की लड़ाई हरक्यूल्स के नेत्तृव मेँ मुस्लिम सेना से अन्तिम लड़ाई थी खालिद बिन वालिद ने जिसमे रोमन सेना को हराकर उत्तरी सीरिया तथा दक्षिण तुर्की पर विजय प्राप्त की
637 हजिर की लड़ाई खालिद बिन वालिद के नेत्तृव में मुस्लिम सेना ने सीरिया मेँ स्थित वाईजेँटाईन चौकी किन्नासरीन से रोमन सेना को भगाया,

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

रशीदुन सेना

सन्दर्भ[संपादित करें]