कोशिका विज्ञान

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घटक अणुओं के रूप में कोशिकाओं की समझ

कोशिका विज्ञान (Cytology) या कोशिका जैविकी (Cell biology) में कोशिकाओं के शरीरक्रियात्मक गुणों (physiological properties), संरचना, कोशिकांगों (organelles) , वाह्य पर्यावरण के साथ क्रियाओं, जीवनचक्र, विभाजन तथा मृत्यु का वैज्ञानिक अध्यन किया जाता है। यह अध्ययन सूक्ष्म तथा आणविक स्तरों पर किया जाता है।

कोशिकाओं के घटकों तथा उनके कार्य करने की विधि का ज्ञान सभी जैविक विज्ञानों के लिये मूलभूत तथा महत्व का विषय है। विशेषतः विभिन्न प्रकार की कोशिकाओं के बीच समानता और अन्तर की बारीक समझ कोशिकाविज्ञान, अणुजैविकी (molecular biology) तथा जैवचिकित्सीय क्षेत्रों के लिये महत्वपूर्ण है।

कोशिकीय प्रक्रियाएँ[संपादित करें]

प्रोटीन का संचलन[संपादित करें]

अलग-अलग प्रकार के प्रोटीन कोशिका के अलग-अलग और निश्चित भाग में भेजे जाते हैं। कोशिका जैविकी का एक प्रमुख प्रभाग इसी बात की जाँच-परख करता है कि किन आणविक मेकेनिज्मों द्वारा प्रोटीनों को कोशिका के भिन्न-भिन्न स्थानों पर पहुँचाया जाता है या किन मेकेनिज्मों के द्वारा कोशिकाओं के अन्दर प्रोटीनों का संश्लेषण होता है।

अन्य प्रक्रियाएँ[संपादित करें]

  • Active transport and Passive transport - Movement of molecules into and out of cells.
  • स्वत:भोजिता (Autophagy) - The process whereby cells "eat" their own internal components or microbial invaders.
  • जनन - Made possible by the combination of sperm made in the testiculi (contained in some male cells' nuclei) and the egg made in the ovary (contained in the nucleus of a female cell). When the sperm breaks through the hard outer shell of the egg a new cell embryo is formed, which, in humans, grows to full size in 9 months.
  • कोशिका संगमन: Chemotaxis, Contraction, cilia and flagella.
  • कोशिका संकेतन (Cell signaling) - Regulation of cell behavior by signals from outside.
  • डीएनए पुनर्निर्माण तथा कोशिका की मृत्यु
  • Transcription and mRNA splicing - gene expression.

कोशिका संरचना[संपादित करें]

प्रोटोज़ोआ (Protoza) बैक्टीरिया और विषाणु (Virus) से ऊँची श्रेणी के प्रत्येक जंतु अथवा वनस्पति का शरीर छोटी कोशिकाओं से मिलकर बना होता है। कोशिकाएँ इतनी छोटी होती हैं कि सूक्ष्मदर्शी के बिना देखी नहीं जा सकतीं। प्राणी जितना ही बड़ा होता है, वह उतनी ही अधिक कोशिकाओं से बना होता है। जंतुओं और वनस्पति की कोशिकाओं में कुछ अंतर अवश्य होता है, परंतु साधारण्त: उनकी संरचना एक ही ढंग की होती है। भिन्न भिन्न प्राणियों की कोशिकाओं में भी अंतर होता है। एक ही प्राणी के विभिन्न अंगों की कोशिकाओं के आकार और गुणों में भी विशेषताएँ होती हैं, जैसे किसी भी स्तनधारी (mammal) के यकृत और गुर्दे की कोशिकाओं की संरचना एक समान नहीं होती। इनके कार्य भी भिन्न हैं। यह विभिन्नता होते हुए भी कल्पित साधारण कोशिका का वर्णन किया जा सकता है।

कोशिका दो मुख्य भागों की बनी होती हैं :

  • (1) केंद्रक कोशिकाद्रव्य (Cytoplasm) और
  • (2) केंद्रक (Nucles)

वानस्पतिक कोशिकाओं के चारों ओर सेल्युलोस की एक भित्ति होती हैं, परंतु जंतुओं में ऐसी भित्ति नहीं मिलती। कोशिकाद्रव्य में कुछ अंगक होते हैं जिनका वर्णन आगे किया जायगा।

लैंगिक प्रजनन करनेवाला प्रत्येक प्राणी अपना जीवन कोशिका अवस्था से ही आरंभ करता है। कोशिका अंडा होती है और इसके निरंतर विभाजन से बहुत सी कोशिकाएँ उत्पन्न हो जाती हैं। कोशिका विभाजन की क्रिया उस समय तक होती रहती है जब तक प्राणी भली भाँति विकसित नहीं हो जाता।

कोशिका विभाजन के समय केंद्रसूत्र दिखाई पड़ते हैं, किंतु स्थित (resting) केंद्रक में ये प्राय: नहीं दिखाई पड़ते। केंद्रक सब ओर एक आवरण से घिरा होता हैं।कोशिकाद्रव्य एक पॉलिफ़ेज़िक कलिल (Polyphasic colliod) है, परंतु यह साधारण कलिलों से भिन्न होता है क्योंकि यह संगठित (organised) होता है। कोशिकाद्रव्य में कई पदार्थ ऐसे होते हैं जो इसकी संरचना में कोई कार्य नहीं करते, किंतु उनका कोशिका के जीवन में बड़ा महत्व है।

कोशिका-अध्ययन की तकनीकें[संपादित करें]

कोशिकाओं का प्रेक्षण करने के लिये सूक्ष्मदर्शी का उपयोग किया जा सकता है। प्रकाशीय सूक्ष्मदर्शी, ट्रांसमिशन एलेट्रॉन सूक्ष्मदर्शी, स्कैनिंग एलेट्रॉन सूक्ष्मदर्शी, फ्लुरोसेंट सूक्ष्मदर्शी तथा कॉनफोकल सूक्ष्मदर्शियों सहित अन्य प्रकार के सूक्ष्मदर्शी उपयोग में लाये जाते हैं।

कोशिकाविभाजन[संपादित करें]

कोशिका के प्रत्येक विभाजन के पूर्व उसके केंद्रक का विभाजन होता है। केंद्रकविभाजन रीत्यनुसार होनेवाली सुतथ्य घटना है, जिसे कई अवस्थाओं में विभाजित किया जा सकता है। ये अवस्थाएँ निम्नलिखित हैं :

(1) पूर्वावस्था (Prophase), (2) मध्यावस्था (Metaphase),

(3) पश्चावस्था (Anaphase) तथा (4) अंत्यावस्था (Telophase)

पूर्वावस्था में केंद्रक के भीतर पतले पतले सूत्र दिखाई पड़ते हैं, जिनको केंद्रकसूत्र कहते हैं। ये केंद्रकसूत्र क्रमश: सर्पिलीकरण (spiralization) के कारण छोटे और मोटे हो जाते हैं। मध्यावस्था आते समय तक ये पूर्वावस्था की अपेक्षा कई गुने छोटे और मोटे हो जाते हैं। मध्यावस्था आने तक कोशिका के भीतर कुछ और महत्वपूर्ण परिवर्तन होते हैं। केंद्रक का आवरण नष्ट हो जाता है और उसकी जगह एक तर्कुवत्‌ उपकरण (spindle apparatus) उत्पन्न होता है। अधिकांश प्राणियों की उन कोशिकाओं में, जिनमें विभाजन की क्षमता बनी रहती है, एक विशेष उपकरण होता है जिस सेंट्रोसोम (Centrosomo) कहते हैं और जिसके मध्य में एक कणिका होती हैं, जिसे ताराकेंद्र (Centriole) कहते हैं।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]