कुछ रंग प्यार के ऐसे भी

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कुछ रंग प्यार के ऐसे भी
कुछ रंग प्यार के ऐसे भी.jpg
शैली प्रेम, नाट्य
निर्माण का देश भारत
भाषा(एं) हिन्दी
सत्र संख्या 2
प्रकरणों की संख्या कुल 414
निर्माण
निर्माता यश पटनायक,
ममता यश पटनायक
स्थल मुंबई, महाराष्ट्र, भारत
कैमरा सेटअप बहु-कैमरा
प्रसारण अवधि लगभग 24 मिनट
प्रसारण
मूल चैनल सोनी
छवि प्रारूप
  • 576आई (एसडीटीवी)
  • 1080आई (एचडीटीवी)
मूल प्रसारण फ़रवरी 29, 2016 (2016-02-29) – 2 नवम्बर 2017 (2017-11-02)
बाह्य सूत्र
आधिकारिक जालस्थल

कुछ रंग प्यार के ऐसे भी भारतीय हिन्दी धारावाहिक है, जिसका प्रसारण सोनी पर 29 फरवरी 2016 से 2 नवम्बर 2017 तक हुआ। इस धारावाहिक के निर्माता यश पटनायक और ममता यश पटनायक हैं।

कहानी[संपादित करें]

देव एक बहुत बड़ा व्यापारी है, जो अपनी माँ ईश्वरी और तीन बहनों के साथ रहता है। देव आठ वर्ष की उम्र में ही अपने पिता को खो चुका होता है। उसकी माँ ईश्वरी अपने बच्चों को पालने हेतु बहुत से त्याग करती है। देव अपनी माँ के खुशी के लिए कुछ भी करने को तत्पर रहता है। देव अपनी माँ की घर में देख रेख के लिए सोनाक्षी को रखता है। बाद में दोनों एक दूसरे से प्यार करने लगते हैं। जब उन दोनों के प्यार के बारे में ईश्वरी को पता चलता है तो वो यकीन नहीं कर पाती कि उसका बेटा उससे बातें छुपाने लगा है। देव को अपने मामा से पता चलता है कि उसकी माँ को उसके प्यार के बारे में पता है। वो अपनी माँ से सोनाक्षी के बारे में बात करता है और उसकी माँ मान जाती है।

देव को सोनाक्षी के प्यार में पागल हुए फिरते देख उसकी माँ अवसाद (डिप्रेशन) में चले जाती है। जब देव को पता चलता है कि उसके माँ की उदासी की वजह सोनाक्षी है तो वो उसके साथ रिश्ता तोड़ देता है। इस तरह से रिश्ता तोड़ देने से सोनाक्षी दुःखी हो जाती है और जल्द से जल्द किसी से भी शादी करने के पीछे पड़ जाती है। सोनाक्षी के इस फैसले से देव की हालत खराब होने लगती है और मजबूरी में ईश्वरी को सोनाक्षी को वापस लाने के लिए कहना पड़ता है। इसके बाद उन दोनों की शादी हो जाती है और शादी के बाद देव की मामी उर्फ गरीब की बेटी अपना रंग दिखाना शुरू कर देती है और परिवार वालों के बीच आग लगाने का काम शुरू कर देती है। जिससे दीक्षित और बोस परिवार वालों के बीच इतना तनाव बढ़ जाता है कि देव और सोनाक्षी अलग हो जाते हैं और सोनाक्षी दिल्ली से बाहर चले जाती है।

सात साल बाद

सोनाक्षी अपने काम से कोलकाता से दिल्ली आती है और वो अपनी 6 साल की बेटी, सुहाना को बताती है कि उसके पिता भी दिल्ली में रहते हैं। देव और सोनाक्षी दिल्ली में एक पुरस्कार समारोह में मिलते हैं। देव को जल्द ही एहसास हो जाता है कि सुहाना उसकी ही बेटी है और कई कोशिशों के बाद वो देव को अपना लेती है। बाद में ईश्वरी भी सोनाक्षी को पसंद करने लगती है और वो दोनों फिर से एक हो जाते हैं। देव और सोनाक्षी का शुभ नाम का एक बच्चा भी होता है।

6 माह बाद

देव और सोनाक्षी न तो अच्छी तरह बच्चों को संभाल पा रहे हैं और न तो ठीक से अपना अपना काम कर पा रहे हैं। बच्चों की चिंता कर रही ईश्वरी, सोनाक्षी से कहती है कि वो अपनी नौकरी छोड़ कर शुभ और सुहाना की देख रेख करे। देव को सोनाक्षी का अपने काम के लिए प्यार का पता होता है और वो सोनाक्षी को अपना काम जारी रखने को कहता है और खुद काम छोड़ कर घर संभालने बैठ जाता है। कहानी के अंत में शुभ अपने माता-पिता का नाम लेने लगता है और इसी के साथ कहानी समाप्त हो जाती है।

कलाकार[संपादित करें]

  • शाहीर शेख - देवरथ दीक्षित[1]
  • एरिका फर्नांडेज़ - डॉ॰ सोनाक्षी बोस, देव की पत्नी
  • सुप्रिया पिलगावकर - ईश्वरी दीक्षित
  • मुश्ताक खान - ईश्वरी के भाई
  • अल्का मोघा - ईश्वरी की भाभी
  • मून बेनर्जी - सोनाक्षी की माँ
  • आशिका भाटिया - निक्की
  • अंकिता बहुगुणा - रिया
  • चेष्ठा भगत - नेहा
  • जिया खान - बाल कलाकार
  • पवन चोपड़ा - नताशा के पिता
  • रूप दुर्गपाल - नताशा गुजराल
  • हेमन्त चौधरी - डॉ॰ सिन्हा

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "Even though she spoke English, we Could hardly understand each other's emotions: Shaheer Sheikh" (अंग्रेज़ी में). टाइम्स ऑफ इंडिया. अभिगमन तिथि 20 जनवरी 2016.

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]