कालीमठ
कालीमठ
Kalimath | |
|---|---|
| निर्देशांक: 30°33′50″N 79°05′06″E / 30.563887°N 79.085083°Eनिर्देशांक: 30°33′50″N 79°05′06″E / 30.563887°N 79.085083°E | |
| देश | |
| प्रान्त | उत्तराखण्ड |
| ज़िला | Rudraprayag District |
| जनसंख्या (2011) | |
| • कुल | 545 |
| भाषा | |
| • प्रचलित भाषाएँ | हिन्दी, गढ़वाली |
| समय मण्डल | भामस (UTC+5:30) |
कालीमठ (Kalimath) भारत के उत्तराखण्ड राज्य के रुद्रप्रयाग ज़िले में स्थित एक गाँव है। राष्ट्रीय राजमार्ग १०७ यहाँ से गुज़रता है। कालीमठ से करीब 4 किमी दूर कबिल्ठा में महाकवि कालिदास का जन्म हुआ था।[1][2]
कालीमठ में मां काली का सिद्धपीठ है। इस स्थान पर मां काली ने रक्तबीज दैत्य का संहार किया। इसके पश्चात मां काली यंत्र के नीचे समा गई।
कालीमठ में महालक्ष्मी मंदिर में अखंड धुनी एवं अखंड ज्योति निरंतर जलती आ रही है। अखंड धुनी में नित्य यज्ञ होते रहते हैं। इसकी विभूति/भस्म धारण करने से समस्त कष्टों का निवारण हो जाता है।[3]
यहां माता सरस्वती अस्त्र-शस्त्रों से सुशोभित हैं। महाकवि कालिदास जी ने इसी स्थान पर तपस्या को थी, जिसके पश्चात उन्हें सिद्धि प्राप्त हुई।
यहां भगवान गौरी-शंकर जी सपरिवार विराजमान हैं तथा भगवान श्री शिव का कालेश्वर लिंग भी इसी स्थान पर विराजमान है। प्रेत शिला भी इसी स्थान पर है, जहां पर प्रेत दोष एवं पितृ दोष का भी निवारण होता है। यही भैरवनाथ जी भी विराजमान हैं।
वर्तमान में इस मंदिर के मठाधिपति श्री अब्बल सिंह राणा जी हैं।
इन्हें भी देखें
[संपादित करें]सन्दर्भ
[संपादित करें]- ↑ "Map and weather of Dharasu". मूल से से 3 मार्च 2016 को पुरालेखित।. अभिगमन तिथि: 25 सितंबर 2019.
- ↑ "Start and end points of National Highways". 22 सितंबर 2008 को मूल से पुरालेखित. अभिगमन तिथि: 23 April 2009.
- ↑ श्रोत: मंदिर के पुजारियों एवं मंदिर समिति के कर्मचारियों से यह जानकारी प्राप्त की गई है।