आँख

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मानव आँख का पास से लिया गया चित्र
मानव नेत्र का योजनात्मक आरेख

आँख या नेत्र जीवधारियों का वह अंग है जो प्रकाश के प्रति संवेदनशील है। यह प्रकाश को संसूचित करके उसे तंत्रिका कोशिकाओ द्वारा विद्युत-रासायनिक संवेदों में बदल देता है। उच्चस्तरीय जन्तुओं की आँखें एक जटिल प्रकाशीय तंत्र की तरह होती हैं जो आसपास के वातावरण से प्रकाश एकत्र करता है; मध्यपट के द्वारा आंख में प्रवेश करने वाले प्रकाश की तीव्रता का नियंत्रण करता है; इस प्रकाश को लेंसों की सहायता से सही स्थान पर केंद्रित करता है (जिससे प्रतिबिम्ब बनता है); इस प्रतिबिम्ब को विद्युत संकेतों में बदलता है; इन संकेतों को तंत्रिका कोशिकाओ के माध्यम से मस्तिष्क के पास भेजता है।



आँखें दिखने में भले ही छोटी और खूबसूरत होती हैं लेकिन इनकी बनावट और इनके काम करने की क्षमता बहुत जटिल होती है। ऐसे में आज आपको बताते हैं आँख का वजन कितना होता है और आँखों से जुड़ी कुछ ख़ास और दिलचस्प बातें।


आँख के कार्यों से जुड़ी जानकारी-

सामान्य तौर पर हमारी आईबॉल का वजन 1 औंस (28.35 ग्राम) होता है।

दिमाग का आधे से भी ज्यादा हिस्सा आँखों को कण्ट्रोल करने में ही व्यस्त रहता है।

हमारी आँखें केवल तीन रंग ही देख पाती है – नीला, हरा और लाल। बाकी सारे रंग इन तीन रंगों को मिलाकर ही बनते हैं।

हमारी आँखें 1 करोड़ रंग पहचानने की क्षमता रखती है।

आँखों को कण्ट्रोल करने वाली मसल शरीर में सबसे ज्यादा एक्टिव रहती है।

हमारी आँखें 576 मेगापिक्सल की हैं। इन्हें एक जगह फोकस करने के लिए केवल 2 मिलीसेकंड का समय लगता है।

आँखों का रंग मेलेनिन पिगमेंट की मात्रा पर निर्भर करता है।

दिमाग के बाद आँखें ही शरीर का सबसे जटिल भाग है।

आँखें एक मिनट में लगभग 17 बार, एक दिन में 14,280 बार और एक साल में लगभग 52 लाख बार झपकती है।

एक आँख से 150 डिग्री और दोनों आँखों से 180 डिग्री तक देखा जा सकता है।


आँख की संरचना से जुड़ी जानकारी-


आँख में मौजूद आईबॉल पानी, जैली और प्रोटीन की बनी होती है और ये 3D इमेज बनाती हैं।

आँखों में पाया जाने वाला श्वेतपटल आँखों को मूवमेंट देता है।

कॉर्निया आँख का वो पारदर्शी हिस्सा होता है जिस पर बाहर का प्रकाश पड़ता है।

आइरिस कॉर्निया के नीचे स्थित होता है और आईबॉल में आने वाले प्रकाश की मात्रा को कण्ट्रोल करता है।

आइरिस के अंदर काले रंग का गोल बिंदु पुपिल पाया जाता है जो लाइट को आईबॉल तक पहुंचाकर नजर को बढ़ाता है।

लेंस भी कॉर्निया की तरह पारदर्शी ऊतक होता है जो पुपिल के पीछे स्थित रहता है।

आईबॉल के अंदर भरा रहने वाला जैली जैसा पदार्थ विट्रियस जैल होता है जो आँख के आकार को बनाये रखता है।

रेटिना आईबॉल के पीछे स्थित ऊतक होता है जिस पर वस्तु का वास्तविक और उल्टा प्रतिबिम्ब बनता है।

संरचना[संपादित करें]

आंखे के विभिन्न भाग इस प्रकार है-

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]