अश्वनाल

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आधुनिक अश्वनाल इस्पात के बने होते हैं और कीलों के साथ खुरों के निचले भाग से जोड़े जाते हैं
शुभ संकेत के लिए दरवाज़ें पर टंगा अश्वनाल

अश्वनाल (horseshoe) धातु या सख़्त प्लास्टिक का बना एक चपटा आकार होता है जिसे घोड़ों के खुरों को पत्थरों, सड़कों व अन्य कठोर स्थानों पर चलते हुए या भार ढोते हुए सुरक्षित रखने के लिए उनके खुरों के नीचे कीलों से लगाया जाता है। खुर केराटिन के बने होते हैं और उनमें कोई स्पर्शबोध नहीं होता इसलिए प्राणी को इस से कोई चोट या पीढ़ा नहीं होती बल्कि उसका खुर घिसने या टूटने से बचा रहता है। कभी-कभी इसे कील से जोड़ने की बजाए एक मज़बूत गोंद से भी चिपकाया जाता है।[1][2] इसे कभी-कभी घुड़नाल भी कहते हैं हालांकि ध्यान दें कि पारम्परिक रूप से "घुड़नाल" वास्तव में घोड़े की पीठ पर रख के चलाई जाने वाली एक प्रकार की तोप हुआ करती थी (इसी प्रकार ऊँट की पीठ पर "शतुरनाल" और हाथी की पीठ पर "गजनाल" हुआ करती थीं)।[3]

अश्वनालों के बारे में सांस्कृतिक अवधारणाएँ व अंधविश्वास[संपादित करें]

कई संस्कृतियों में माना जाता है कि अश्वनालों द्वार पर टंगाने से सौभाग्य आता है और "बुरी नज़र" व "बुरी आत्माएँ" दूर रहती हैं। यह इसलिए भी हो सकता है क्योंकि अश्वनाल लोहे के बने हुए होते थे और लोहे को बुरे प्रभावों के लिए अवरोधक माना जाता है।[4]

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. Price, Steven D. (ed.) The Whole Horse Catalog: Revised and Updated New York:Fireside 1998 ISBN 0-684-83995-4 p. 84–87
  2. Evans, J. Warren et al. The Horse Second Edition New York: Freeman 1990 ISBN 0-7167-1811-1 p. 731–739
  3. "सवाई जयसिंह," विरेंद्रस्वरूप भटनागर, राज्स्थान हिन्दी ग्रन्थ अकादमी, १९७२
  4. "Superstition Bash: Horseshoes". Committee for Skeptical Inquiry.