अम्बष्ठ

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संस्कृत और पालि साहित्य में अंबष्ठ जाति तथा अम्बष्ठ देश का उल्लेख अनेक स्थलों पर मिलता है। इनके अतिरिक्त सिकन्दर के इतिहास से संबंधित कतिपय ग्रीक और रोमन लेखकों की रचनाओं में भी अंबष्ठ जाति का वर्णन हुआ है। दिओदोरस, कुर्तियस, जुस्तिन तथा तालेमी ने विभिन्न उच्चारणों के साथ इस शब्द का प्रयोग किया है। प्रारंभ में अंबष्ठ जाति युद्धोपजीवी थी। सिकन्दर के समय (३२७ ई. पू.) उसका एक गणतंत्र था और वह चिनाब के दक्षिणी तट पर निवास करती थी। आगे चलकर अंबष्ठों ने संभवत चिकित्साशास्त्र को अपना लिया, जिसका परिज्ञान हमें मनुस्मृति से होता है।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]