अमेरिकी अधिकार विधेयक १७८९

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अमेरिका के राष्ट्रीय लेखागार में सुरक्षित अधिकारों का विधेयक की मूल प्रति
अधिकारों का विधेयक के प्रथम सृजनकर्ता जेम्ज़ मैडिसन थे

अधिकारों का विधेयक (अंग्रेज़ी: Bill of Rights, बिल ऑफ़ राइट्स) संयुक्त राज्य अमेरिका के संविधान के पहले दस संशोधनों का सामूहिक नाम है। यह अमेरिका की सरकार की शक्तियों पर रोक लगाते हैं और नागरिकों के लिए कुछ अधिकारों को हमेशा के लिए सुरक्षित करते हैं। इस विधेयक के संशोधन अमेरिकी कांग्रेस (यानि अमेरिकी संसद) में सन् १७८९ में जेम्ज़ मैडिसन द्वारा प्रस्तावित हुए, २५ सितम्बर १७८९ को पारित हुए और १५ दिसंबर १७९१ को क़ानून बन गए।[1]

दस संशोधनों की सूची[संपादित करें]

अधिकारों के विधेयक के दस संशोधन इस प्रकार हैं:

  • प्रथम संशोधन: सरकार धर्म के सम्बन्ध में कोई क़ानून नहीं बनाएगी। न किसी धर्म को किसी रूप में स्थापित किया जाएगा, न किसी धर्म को रोकने का कोई प्रयास किया जाएगा। सरकार ऐसा कोई क़ानून नहीं बनाएगी जिस से किसी के भी कुछ बोलने पर रूकावट हो। अख़बारों और प्रेस की बोलचाल पर किसी भी प्रकार की रोक लगाना वर्जित है। नागरिकों के शांतिपूर्वक एकत्रित होने के अधिकार पर कोई रोक नहीं होगी। नागरिकों के सरकार से किसी अन्याय की दुहाई देकर उसे सही करने की मांग करने पर कोई रोक नहीं होगी।
  • दूसरा संशोधन: किसी भी स्वतन्त्र राष्ट्र के लिए एक नियमित सशस्त्र बल की आवश्यकता है, इसलिए नागरिकों के हथियार रखने के अधिकार पर कोई रोक नहीं होगी।
  • तीसरा संशोधन: शांति के समय किसी भी सैनिक को किसी भी घर में, बिना घर के मालिक की अज़ादाना अनुमति के, रखना मना होगा। युद्ध के समय सैनिक किसी घर में केवल क़ानूनन ढंग से रह सकते हैं।
  • चौथा संशोधन: किसी के बदन, घर, काग़ज़ात और अन्य सम्पति की अकारण तलाशी लेना या उसे ज़ब्त करना मना है। अगर तलाशी लेने या ज़ब्त करने का कोई उचित कारण है जो यह केवल क़ानून ढंग से अधिपत्र (वारंट) लेकर ही किया जाएगा, और इस अधिपत्र को बनवाने के लिए कारण को बताना और शपथ लेकर उसकी सच्चाई जतलाना आवश्यक है।
  • पाँचवा संशोधन: युद्ध या जनसंकट की स्थिति में लड़ने वाले व्यक्तियों को छोड़कर, किसी व्यक्ति पर भी किसी मृत्युदंड-योग्य अपराध का आरोप बिना बड़ी अदालत में निर्णायक जूरी द्वारा सुनवाई और तहकीकात के बिना सही नहीं ठहराया जाएगा। किसी भी व्यक्ति पर एक ही आरोप को लेकर एक से अधिक दफ़ा मुक़द्दमा नहीं चलाया जाएगा। किसी पर भी अपने ही विरुद्ध गवाही देने पर मजबूर नहीं किया जा सकता। किसी को भी उचित न्यायिक कार्यवाही के बिना अपनी स्वतंत्रता, जीवन या सम्पति से वंछित नहीं किया जाएगा। किसी की भी निजी सम्पति को बिना उचित मुआवज़े के जन-प्रयोग के लिए लेना निषेद है।
  • छठा संशोधन: हर अपराध की कार्यवाही में मुलज़िम (जिसपर आरोप लगा हो) के साथ शीघ्रता से और बिना किसी रहस्यमय क्रिया के न्याय किया जाएगा। मुक़द्दमे के लिए चुनी गई जूरी में निष्पक्ष व्यक्ति शामिल होंगे। मुलज़िम को स्पष्ट शब्दों में उसपर लगे आरोप के बारे में बताया जाएगा। किसी पर भी छुपकर इलज़ाम नहीं लगाया जाएगा: इलज़ाम लगाने वाले को अदालत में मुलज़िम के सामने आरोप लगाना होगा। हर मुलज़िम को वकील की सहायता मिलेगी।
  • सातवा संशोधन: वह क़ानूनी कार्यवाहियाँ जिनमें कोई अपराध विषय नहीं है (जैसे की विक्रेता-उपभोक्ता में मतभेद) लेकिन जिनमें बीस डॉलर से अधिक राशि दांव पर है, उनमें मुक़द्दमा लड़ने वालों को जूरी द्वारा न्याय करवाने का अधिकार होगा। किसी मुक़द्दमे में अगर जूरी फ़ैसला सुना दे उसे अमेरिका के किसी न्यायलय द्वारा दुबारा लड़वाना वर्जित है।
  • आठवा संशोधन: किसी भी गिरफ़्तार हुए व्यक्ति से उचित से अधिक ज़मानत नहीं मांगी जाएगी। किसी को भी क्रूर या अजीब दंड देना वर्जित है।
  • नौवा संशोधन: संविधान में जो अधिकार लोगों को दिए गए हैं वे पूरे नहीं हैं, यानि सरकार के लिए यह जतलाना वर्जित है की अगर कोई अधिकार इस संविधान में नहीं दिया गया है तो वह नागरिकों को प्राप्त नहीं है।
  • दसवा संशोधन: अमेरिकी केन्द्रीय सरकार को केवल वही शक्तियाँ उपलब्ध हैं जो इस संविधान में दी गई हैं। अन्य सभी शक्तियाँ या तो राज्य सरकारों को मिली हैं या फिर नागरिकों में ही निहित हैं।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

सन्दर्भ[संपादित करें]