अभिधर्मकोश

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search

आचार्य असंग के छोटे भाई आचार्य वसुबंधु ने अपने जीवन के प्रथम भाग में सर्वास्तिवाद सिद्धांत के अनुसार कारिकाबद्ध अभिधर्मकोश ग्रंथ की रचना की। यह इतना प्रसिद्ध और लोकप्रिय हुआ कि कवि बाण ने लिखा है कि तोते-मैने भी अभिधर्मकोश के श्लोकों का उच्चारण करते थे। अपने सिद्धांत का प्रतिपादन करते हुए आचार्य ने यथास्थान अन्य दर्शनों की समीक्षा भी की है। ग्रंथ पर आचार्य ने स्वयं एक विस्तृत भाष्य की भी रचना की, जिसपर कई टीकाएँ लिखी गई। प्रसिद्ध यात्री विद्वान्‌ हुएन्सांग ने चीनी भाषा में इसका अनुवाद किया था जो आज भी प्राप्त है।