अनंत पई
अनन्त पई | |
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| चित्र:Uncle anant pai.jpg | |
| जन्म | 17 सितम्बर 1929 |
| मृत्यु | 24 फ़रवरी 2011 (उम्र 81 वर्ष) मुम्बई, महाराष्ट्र |
| अन्य नाम | चाचा पई भारत के वाल्ट डिजनी[1] |
| आलमा माटर | रसायन प्रौद्योगिकी संस्थान (इसके पहले UDCT) |
| प्रसिद्धि का कारण | अमर चित्र कथा की स्थापना |
| जीवनसाथी | ललिता पई (1961–2011) |

अनंत पई (17 सितम्बर 1929, कार्कल, कर्नाटक — 24 फ़रवरी 2011, मुंबई), जो अंकल पई के नाम से लोकप्रिय थे, भारतीय शिक्षाशास्री और कॉमिक्स, ख़ासकर अमर चित्र कथा शृंखला, के रचयिता थे। इंडिया बुक हाउज़ प्रकाशकों के साथ 1967 में शुरू की गई इस कॉमिक्स शृंखला के ज़रिए बच्चों को परंपरागत भारतीय लोक कथाएँ, पौराणिक कहानियाँ और ऐतिहासिक पात्रों की जीवनियाँ बताई गईं। 1980 में टिंकल नामक बच्चों के लिए पत्रिका उन्होंने रंग रेखा फ़ीचर्स, भारत का पहला कॉमिक और कार्टून सिंडिकेट, के नीचे शुरू की। 1998 तक यह सिंडिकेट चला, जिसके वो आख़िर तक निदेशक रहे।
दिल का दौरा पड़ने से 24 फ़रवरी 2011 को शाम के 5 बजे अनंत पई का निधन हो गया।
आज अमर चित्र कथा सालाना लगभग तीस लाख कॉमिक किताबें बेचता है, न सिर्फ़ अंग्रेजी में बल्कि 20 से अधिक भारतीय भाषाओं में। 1967 में अपनी शुरुआत से लेकर आज तक अमर चित्र कथा ने 10 करोड़ से भी ज़्यादा प्रतियाँ बेची हैं। 2007 में अमर चित्र कथा ACK Media द्वारा ख़रीदा गया।
शुरुआती ज़िन्दगी और शिक्षा
[संपादित करें]कर्नाटक के कार्कल शहर में जन्मे अनंत के माता पिता का देहांत तभी हो गया था, जब वो महज दो साल के थे। वो 12 साल की उम्र में मुंबई आ गए। मुंबई विश्वविद्यालय से दो डिग्री लेने वाले पई का कॉमिक्स की तरफ़ रुझान शुरू से था लेकिन अमर चित्रकथा की कल्पना तब हुई, जब वो टाइम्स ऑफ इंडिया के कॉमिक डिवीजन से जुड़े।
कृतियाँ
[संपादित करें]बीरबल दि क्लैवर
रानी ऑफ झाँसी
झाँसी की रानी
टेल्स ऑफ शिव
कार्तिकेय
गणेश
एलीफेंन्टा
कृष्ण और शिशुपाल
ह्वेन सांग
राम शास्त्री
गुरु नानक
नहुष
श्रीरामकृष्ण
चन्द्रहास
गुरु तेगबहादुर
माँ दुर्गा की कहानियाँ
कृष्ण की कहानी
श्री रामकृष्ण
नल-दमयन्ती
हनुमान
महर्षि दयानंद
गणेश
विष्णु की कथाएँ
स्यमन्तक मणि
शिव पार्वती
लव-कुश
कार्तिकेय
कृष्ण और जरासन्ध
रुक्मिणी परिणय
न्यायप्रिय बीरबल
सम्राट अशोक
ध्रुव और अष्टावक्र
मददगार बीरबल
सुभाषचन्द्र बोस
विद्वान पंडित
जातक कथाएँ सियार की कथाएँ
हरिशचन्द्र
सती और शिव
बलराम की कथाएँ
प्रह्लाद
कुंभकर्ण
तानसेन
सोने की मुहरोंवाली थैली
हितोपदेश मित्रलाभ
महावीर
सुनहला नेवला
गुरु नानक
महावीर
आगे
गांधारी
दुर्गादास
आगे
जमसेतजी टाटा दि मैन हू सॉ टुमॉरो
सम्मान एवं पुरस्कार
[संपादित करें]- लाइफटाइम एचिवमेन्ट पुर्स्कार – 19 फरवरी 2011[2]
- उत्तर प्रदेश बाल कल्याण संस्थान का कर्पूरचन्द पुरस्कार (1994)
- हैदराबाद में युधवीर स्मारक पुरस्कार (1996)
- महाराष्ट्र राज्य हिन्दी साहित्य अकादमी पुरस्कार (1996)
- डॉ० टी एम ए पई स्मारक पुरस्कार , मणिपाल (1997)
- मुम्बई विश्वविद्यालय के रसायन प्रौद्योगिकी विभाग का अतिविशिषिष्ट पूर्वछात्र पुरस्कार (1999)
- सहस्राब्दी कोंकणी सम्मेलन पुरस्कार, इलियन्स, यूएसए (2000)
- राजा राममोहन राय पुस्तकालय फाउण्डेशन पुरस्कार (2001)
- प्रियदर्शिनी अकादमी पुरस्कार (2002)
- विश्व सारस्वत पुरस्कार (2003)
इन्हें भी देखें
[संपादित करें]बाहरी कड़ियाँ
[संपादित करें]- बाल साहित्यः वैज्ञानिक यथार्थ से परिचय Archived 2025-01-23 at the वेबैक मशीन
- वीरान हो गई स्वदेशी कॉमिक्स की दुनिया
- अमर चित्र कथा के संस्थापक का निधन
- Official site
- Amar Chitra Katha
- Tinkle Online
- url.com/ackOnIPhone/ ACK On IPhone,IPad and ITouch[मृत कड़ियाँ]
- ↑ PTI (26 February 2013). "Business Line : Features News : Amar Chitra Katha pays tribute to Uncle Pai with a comic title". Thehindubusinessline.com. अभिगमन तिथि: 8 March 2013.
- ↑ उद्धरण त्रुटि:
<ref>का गलत प्रयोग;anant pai obitनाम के संदर्भ में जानकारी नहीं है।