अंधक

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अंधक पुराणों में वर्णित एक हज़ार सिरों वाला दैत्य है, कुछ मतों के अनुसार जिसे दिति के गर्भ से उत्पन्न कश्यप ऋषि का पुत्र बताया गया है और कहीं हिरणाक्ष का पुत्र बताया गया है। अंधक को शिव और विष्णु को छोड़कर अन्य किसी से भी पराजित न होने का वरदान प्राप्त था। इस वरदान से यह अत्यन्त उद्दंड और अत्याचारी बन गया था। आँख रहते हुए भी अंधों की तरह चलता था। इसीलिए इसका नाम अंधक पड़ा।


अंधक एक जाट गोत्र भी है। यह भारत में हरियाणा, पंजाब राज्यों में पाया जाता है।

  1. कश्यप और दिति का पुत्र एक दैत्य, जो पौराणिक कथाओं के अनुसार हजार सिर, हजार भुजाओं वाला, दो हजार आँखों और दो हजार पैरों वाला था। शक्ति के मद में चूर वह आँख रहते अंधे की भाँति चलता था, इसी कारण उसका नाम अंधक पड़ गया था। स्वर्ग से जब वह परिजात वृक्ष ला रहा था तब शिव द्वारा वह मारा गया, ऐसी पौराणिक अनुश्रुति है।
  1. क्रोष्ट्री नामक यादव का पौत्र और युधाजित का पुत्र, जो यादवों की अंधक शाखा का पूर्वज तथा प्रतिष्ठाता माना जाता है। जैसे अंधक से अंधकों की शाखा हुई, वैसे ही उसके भाई वृष्णि से वृष्णियों की शाखा चली। इन्हीं वृष्णियों में कालांतर में वार्ष्णेय कृष्ण हुए। महाभारत की परंपरा के अनुसार अंधकों और वृष्णियों के अलग-अलग गणराज्य भी थे, फिर दोनों ने मिलकर अपना एक संघराज्य (अंधक-वृष्णि-संघ) स्थापित कर लिया था।