हरी चाय

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खुले गायवान में पकी हरी चाय की पत्तियाँ
किण्वन की विभिन्न श्रेणियों में चाय

हरी चाय (अंग्रेज़ी: ग्रीन टी) एक प्रकार की चाय होती है, जो कैमेलिया साइनेन्सिस नामक पौधे की पत्तियों से बनायी जाती है। इसके बनाने की प्रक्रिया में ऑक्सीकरण न्यूनतम होता है। इसका उद्गम चीन में हुआ था और आगे चलकर एशिया में जापान से मध्य-पूर्व की कई संस्कृतियों से संबंधित रही। इसके सेवन के काफी लाभ होते हैं।[1] प्रतिदिन कम से कम आठ कप ग्रीन टी हृदय रोग होने की संभावनाओं को कम करने कोलेस्ट्राल को कम करने के साथ ही शरीर के वजन को भी नियंत्रित करने में सहायक सिद्ध होती है। प्रायः लोग ग्रीन टी के बारे में जानते हैं लेकिन इसकी उचित मात्र न ले पाने की वजह से उन्हें उनका पूरा लाभ नहीं मिल पाता है।

हरी चाय का फ्लेवर ताज़गी से भरपूर और हल्का होता है तथा स्वाद सामान्य चाय से अलग होता है। इसकी कुछ किस्में हल्की मिठास लिए होती है, जिसे पसंद के अनुसार दूध और शक्कर के साथ बनाया जा सकता है।[2] ग्रीन टी बनाने के लिए एक प्याले में २-४ ग्राम चाय पड़ती है। पानी को पूरी तरह उबलने के बाद २-३ मिनट के लिए छोड़ देते हैं। प्याले में रखी चाय पर गर्म पानी डालकर फिर तीन मिनट छोड़ दें। इसे कुछ देर और ठंडा होने पर सेवन करते हैं। विभिन्न ब्रांड के अनुसार एक दिन में दो से तीन कप ग्रीन टी लाभदायक होती है। इसका अर्थ है कि एक दिन में ३००-४०० मिलीग्राम ग्रीन टी पर्याप्त होती है।अब तक ग्रीन टी का सिर्फ एक ही नुकसान ज्ञात हुआ है, अनिद्रा यानी नींद कम आने की बीमारी।[2] इसका कारण चाय में उपस्थित कैफीन है। हालांकि इसमें कॉफी के मुकाबले कम कैफीन होता है।


लाभ[संपादित करें]

आसाम की हरी चाय

एक व्यस्क व्यक्ति द्वारा इसका नियमित सेवन कई रोगों से छुटकारा ही नहीं दिलाता बल्कि कई रोगों के प्रति शरीर के रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ाती है। ग्रीन टी एंटी-एजिंग के साथ-साथ एंटी-ऑक्सीडेंट का काम भी करती है। अति व्यस्तता के कारण नियमित व्यायाम न कर पाने वाले लोगों के लिये उन्हें ग्रीन टी का नियमित सेवन करना काफी लाभदायक सिद्ध होता है। इसमें दूध नहीं मिलाना चाहिए क्योंकि इससे उसकी एंटी-आक्सीडेंट तत्व समाप्त हो जाती है।[1] यह चाय कालेस्ट्रोल को भी नियत्रित करने में सहायक होती है। इसका प्रयोग शरीर में उपापचय दर या वसा ऑक्सीकरण को भी बढ़ाता है। इसके सेवन से मस्तिष्क के उत्तकों को मृत होने से रोका जा सकता है। ग्रीन टी को भाप पर बनाना चाहिए।

ग्रीन टी के नियमित सेवन से न सिर्फ वजन नियंत्रित होता है, बल्कि उनमें कई तरह की बीमारियों के होने की संभावना भी कम हो जाती है। इसके सेवन से कैंसर जैसी जानलेवा बीमारी से भी बचा जा सकता है। जापान में आमतौर पर लोग खाने के दौरान भी ग्रीन टी का सेवन करते हैं जो खाना पचाने में तो मदद करती ही है और हृदय रोग से भी सहायक सिद्ध होती है।[1]

चाय के बागान

अध्ययनों के अनुसार दांतों के लिए भी ग्रीन-टी काफी लाभदायक है। जीवाणु, विषाणु और गले के संक्रमण से भी यह बचाव करती है। ग्रीन टी में पॉलीफिनोल्स होते हैं, जो दांतों को केविटी से बचाते हैं। इसके अलावा कैंसर से बचाव, ब्लैडर, कोलन, इसोफेगल, पैनक्रियाज, रेक्टम और पेट के कैंसर से ग्रीन टी काफी बचाव करती है। इसमें उपस्थित तत्व ऐसी कोशिकाओं को कम या न के बराबर पनपने देते हैं। इससे खून के थक्के जमने की समस्या भी कम होती एंटी इंफ्लेमेटरी होने के कारण इसमें दर्द को कम करने की क्षमता होती है। इसमें उपस्थित कुछ एंटी-ऑक्सीडेंट्स ऑर्थराइटिस के खतरे को कम भी करते हैं। ग्रीन टी यकृत की दो तरह से सुरक्षा करती है। पहले तो यह लीवर की कोशिकाओं की सुरक्षा करती है और दूसरे प्रतिरोधी प्रणाली को भी मजबूत बनाती है। गर्भावस्था के दौरान यह शरीर को लौह, कैल्शियम और मैग्नेशियम की मात्रा देती है।[3] रात को सोते वक्त और भूख लगने पर कैफीन नहीं पीना चाहिये। रात को पीने से यह भूख बढ़ाता है और नींद में समस्या आती है। जबकि ग्रीन टी रात में भी पी सकते हैं, क्योंकि इसमें सिर्फ कैफीन की मात्रा कम होती है।

चीनी चाय[संपादित करें]

हुनान प्रांत[संपादित करें]

जुनशान यिनज़ेन (सिल्वर नीडल टी), चीन की सर्वोत्तम दस चायों में से एक, श्वेत चाय की एक किस्म है। इसकी खेती जुनशान द्वीप, युएयांग शहर, हुनान प्रांत में की जाती है।

जेजियांग प्रांत[संपादित करें]

जेजियांग में सबसे प्रसिद्ध चाय, शी हू लोंगजिंग का केन्द्र है। इसके अलावा भी अन्य कई उच्च-किस्में यहां उगाई जाती हैं।

यह हांगजोउ से प्रसिद्ध चाय है, जिसका चीनी में अर्थ है अज़दहे का कुआं। इसे चौड़े मुंह के खास बर्तन में बनाया जाता है। इस किस्म की अधिकांश मात्रा का उत्पादन लोंगजिंग में होता है।
जेजियांग के एक मंदिर के नाम पर बनी।
काईहुआ काउंटी की एक चाय जिसे ड्रैगन माउंटेन कहते हैं।
तियानताई काउंटी की एक चाय, जिसका नाम तियानताई पर्वत शृंखला के ऊपर रखा हुआ है।
तियान मु की एक चाय, जिसे ग्रीन टॉप भी कहते हैं।
जुचा नामक चाय, जिसका उद्गम जेजियांग में हुआ, किन्तु अब चीन में अन्य स्थानों पर उगाई जाती है।

जियांगसू प्रांत[संपादित करें]

चीन के जियांग सू प्रांत की बी लुओ चुन चाय, की पत्तियां।
चीन की एक प्रसिद्ध चाय, जिसे ग्रीन स्नेल स्प्रिंग भी कहते हैं, डोंग टिंग से है।
नानजिंग की एक प्रसिद्ध चाय।

फ़ूजियान प्रांत[संपादित करें]

कैमेलिया साइनेसिस, चाय का पौधा
फ़ूजियान प्रांत में पहाड़ी क्षेत्र में उगायी जाने वाली ऑर्गैनिक चाय तथा वाइट एवं ऊलोंग चाय प्रसिद्ध हैं। इन चायों के लिये तटीय पर्वतीय क्षेत्र उपयुक्त होते हैं। हरी चाय यहां वसंत ऋतु और ग्रीष्म ऋतुओं में चुनी जाती हैं।
चीन की मुख्य भूमि के दक्षिण-पूर्वी क्षेत्र की प्रसिद्ध किस्मों में माओ फेंग ("फर टिप"), कुइ जियान ("जेड स्वोर्ड") एवं मो ली हुआ चा ("ड्रैगन पर्ल ") ग्रीन टी तथा बाइ मू दान (वाइट पियॉनी) श्वेत चाय और ती क्वान यिन ("आयरन गॉडेस") ऊलॉग टी आती हैं। हरी चाय ओवन में सुखायी जाती है। और श्वेत चाय फास्ट-ड्राई तथा ऊलोंग चाय ध्यानपूर्वक नियंत्रित फर्मेन्टेशन द्वारा ऑक्सीकृत की जातीं हैं।

हुबेइ प्रांत[संपादित करें]

ग्योकुरो (जेड ड्यू) भाप से बानायी गई एक चाय जापानी शैली में बनायी जाती है।

हेनान प्रांत[संपादित करें]

कुछ ऊंची किस्म की चीनी हरी चाय, माओ जियान
चीन की प्रसिद्ध चाय, ग्रीन टिप या टिपी ग्रीन होती है।

जियांगज़ी प्रांत[संपादित करें]

इसके नाम का अर्थ है "मूल्यवान भ्रू"; और ये जियांगज़ी से है। अब अन्य स्थानों में भि उगायी जाती है।
एक चीनी चाय जिसे कई चीनी राष्ट्रीय सम्मान मिले हैं।
इस चाय का अन्य नाम है क्लाउद एण्ड मिस्ट अर्थात बादल और धुंध।

अन्हुई प्रांत[संपादित करें]

अन्हुई प्रांत में विभिन्न किस्म की चायें उगायी जाती हैं। इनमें तीन प्रमुख हैं:

माउंट हुआंगशान की एक चाय, जिसे बिग स्क्वायर सुनीट भि कहते हैं।
माउंट हुआंग की प्रसिद्ध चीनी चाय।
प्रसिद्ध चीनी चाय, जिसे मैलन सीड भी कहते हैं।
एक प्रसिद्ध चीनी चाय किस्म जिसे मंकी टी भी कहते हैं।
तुनज़ी जिले की एक चाय।
जिंग काउंटी की एक चाय, जिसे फ़ायर ग्रीन भी कहते हैं।
एक पूर्व-कृषित चीनी चाय़।

सिनचुआन प्रांत[संपादित करें]

चाय जिसे मेंग डिंग कुई ज़ू या ग्रेट बैम्बू भी कहते हैं।
पीली-हरी चाय, जिसको पीने के बाद मीठा स्वाद आता है।

संदर्भ[संपादित करें]

  1. ग्रीन टी।हिन्दुस्तान लाइव।६ जनवरी, २०१०
  2. ग्रीन टी इज बेस्ट।दैनिक भास्कर।१ मार्च, २००८
  3. ग्रीन टी - फायदे ही फायदे।।दैनिक भास्कर।३१ मार्च, २००९

साहित्य[संपादित करें]

बाहरी सूत्र[संपादित करें]