विद्या
विद्या है वो जानकारी और गुण, जो हम दिखाने, सुनाने, या पढ़ाने (शिक्षा) के माध्यम से प्राप्त करते है। हमारे जीवन के शुरुआत में हम सब जीना सीखते है। शिक्षा लोगों को ज्ञान और विद्या दान करने को कहते हैं अथवा व्यवहार में सकारात्मक एंव विकासोन्मुख परिवर्तन को शिक्षा माना जाता है।
- त्वमेव माता च पिता त्वमेव त्वमेव बन्धुश्च सखा त्वमेव ।
- त्वमेव विद्या द्रविणं त्वमेव त्वमेव सर्वं मम देवदेव ॥
(भागवान)तुम्हि हो विद्या
सत्य विद्या का ज्ञान भागवान के ज्ञान के समान है।
अनुक्रम |
विद्या का बाधा, और अविद्या का सहारे [संपादित करें]
भहुत सारे बाधाएं है, जो माया को सहरे देता है। विद्या का बाधा मानव जाति के विनाश ला सकता है।[1]
विद्या का अधिकार [संपादित करें]
वर्ष 1500 और 2000 के बीच कोइ समय म्य्, अंग्रेजी देशो विद्या को वैयक्तिक माल बना दिया था, खारिद्ने और बेचने के अधिकार के साथ। विद्या को बौद्धिक संपदा बोल्ते है, और् उस्कि अधिकार को बौद्धिक सम्पदा अधिकार। इस्कि कइ प्रकार बनाए गय है, जैसे प्रतिलिप्यधिकार और पेटेन्ट।
गलत सूचना [संपादित करें]
अभिवेचक [संपादित करें]
बिना रुचि [संपादित करें]
रुचि के बिना कोइ शिक्षा नहि हो सक्ति। रुचि के बिना विद्या प्रसार नहि हो सक्ता।