लियोनार्ड ओइलर

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लियोनार्ड ओइलर

लियोनार्ड ओइलर (Leonhard Euler; १५ अप्रैल १७०७, बाज़ेल - १८ सितंबर १७८३) एक स्विस गणितज्ञ थे। ये जोहैन बेर्नूली के शिष्य थे।

गणित के संकेतों को भी ऑयलर की देन अपूर्व है। इन्होंने संकेतों में अनेक संशोधन करके त्रिकोणमितीय सूत्रों को क्रमबद्ध किया। 1734 ई. में ऑयलर ने x के किसी फलन के लिए f (x), 1728 ई. में लघुगणकों के प्राकृत आधार के लिए e, 1750 ई. में अर्ध-परिमिति के लिए s, 1755 ई. में योग के लिए Σ और काल्पनिक ईकाई के लिए i संकेतों का प्रचलन किया।

1766 ई. में ये अंधे हो गए, परंतु मृत्यु पर्यंत (18 सितंबर, 1783 ई.) शोधकार्य में संलग्न रहे।

कृतियाँ[संपादित करें]

इनके मुख्य ग्रंथ निम्नलिखित हैं जो फ्रेंच भाषा में हैं :

1. 'ऐत्रोद्युक्स्यो इन अनालिसिन इन्फ़िनितोरुम' (Introduction in analysin infinitorum 1748 ई.), जिसने वैश्लेषिक-गणित-संसार में क्रांति मचा दी। इसमें इन्होंने फलन की परिभाषा दी और त्रिकोणमिति को विश्लेषण की एक शाखा एवं त्रिकोणमितीय मानों की निष्पत्ति को अवधारित किया।

2. 'इंस्तित्युस्योनिस कालकूली दिफ़रेंस्यालिस' (Institutiones calculi differentialis) (1975 ई.) और 'इंस्तित्युस्योनिस कालकूलि इंतेग्रालिस (Institutiones calculi integralis 1768-1770 ई.)-इन ग्रंथों में उस समय तक ज्ञात समस्त कलन और बीटा एवं गामा फलनों तथा लेखक के कुछ अन्य अन्वेषणों का वर्णन है।

3. 'मेथोदुस इन्वेनियेंदि लिनेआस कुरवास माक्सीमी मिनिमीवे प्रोप्रियेताते गौदेंतिस' (Methodus inveniendi lineas curvas maximi minivive proproetate gaudentes, 1744 ई.)। इसमें इनके परिणमन-कलन के अन्वेषणों का वर्णन है।

4. 'थेओरिया मोतुउम प्लानेतारुम एत कोमेतारुम' (Theoria motuum planetarum et cometarum 1744 ई.), 'थेओरिया मोतुस लुनी' (Theoria motus lunae, 1753 ई.) और 'थेओरिया मोतुउम लुनी' (Theoria motuum lunae, 1722 ई.)-इनमें खगोलशास्त्र का विवेचन है।

5. 'से लेत्रआ ऊन प्रेंसेस दालमाञ् सुर केल्के सूज़े द फ़िजीक ए द फ़िलोज़ोफ़ी' (Ses lettres a' une princesse d' Allemangne sur quelques suiets de physique et de philosophic 1770 ई.)-इसमें दिए गए मौलिक एवं महत्वपूर्ण अन्वेषणों के कारण ऑयलर को बहुत ख्याति प्राप्त हुई।

इन्हें भी देखें[संपादित करें]

संदर्भ[संपादित करें]