याक

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याक

याक (वैज्ञानिक नाम: Bos Grunniens) एक पशु है जो तिब्बत के ठण्डे तथा वीरान पठार, नेपाल और भारत के उत्तरी क्षेत्रों में पाया जाता है। यह काला, भूरा, सफेद या धब्बेदार रंग का होता है।[1] इसका शरीर घने, लम्बे और खुरदरे बालों से ढँका हुआ होता है। इसे कुछ लोग तिब्बत का बैल भी कहते हैं। इसे 'चमरी' या 'चँवरी' या 'सुरागाय' भी कहते हैं।

परिचय[संपादित करें]

याक अंग्युलेटा (Ungulata) गण के बोविडी (Bovidae) कुल का शाकाहारी स्तनपोषी जीव है, जिसका निवास तिब्बत के ऊँचे पठार हैं।[1] यह एक प्रकार की गाय जाति का जंगली पशु है, जिसकी कुछ जातियाँ तो पालतू कर ली गई हैं, लेकिन कुछ अभी तक जंगली अवस्था में ही जंगलों में रहती हैं। भारत में यह उत्तरी लद्दाख के आसपास १५-२० हजार फुट की ऊँचाई पर पाया जाता है। भारत और तिब्बत के बीच सामान ढोने और सवारी के काम में ये ही जानवर आते हैं।

चमरी को सुरागाय और याक भी कहा जाता है, जिसमें बड़ा याक कद में सबसे बड़ा होता है। याक का कंधा ऊँचा, पीठ चौरस, पैर छोटे और गठीले होते हैं। इसकी पीठ और शरीर की बगल के बाल छोटे रहते हैं, लेकिन सीने के निचले और पैर के ऊपरी हिस्से पर के बाल लंबे होते हैं। इसकी दुम काफी घनी, गोल और झबरी रहती है, जो चमर बनाने के काम आती है।

चमरी की जंगली जाति काले रंग की होती है, लेकिन पालतू याक काले, सफेद और चितकबरे भी होते हैं। इनके थूथन के पास का कुछ हिस्सा सफेद रहता है और पुराने हो जाने पर नरों की पीठ का कुछ भाग ललछौंह हो जाता है।[कृपया उद्धरण जोड़ें]

याक पालतू गाय बैल से बड़े नहीं होते, लेकिन ऊँचे कंधे तथा बड़े बालों के कारण ये उनसे अधिक रोबीले दिखाई पड़ते हैं। जंगली याक, जो पालतू याकों से बड़े होते हैं, छह फुट ऊँचे और लगभग सात फुट लंबे होते हैं। मादा नर से कुछ छोटी होती है।[2][3]

याक वैसे तो सीधे और डरपोक जानवर हैं, लेकिन घायल होने पर बहुत भंयकर हमला करते हैं। इनका मुख्य भोजन घास पात है। ये पानी बहुत पीते हैं और जाड़ों में बरफ खा खाकर अपनी प्यास बुझाते रहते हैं।[कृपया उद्धरण जोड़ें]

याक तिब्बत के निवासियों के लिये बहुत ही उपयोगी जीव है। वहाँ के लोग इसका दूध और मांस तो खाते ही हैं, साथ ही साथ ये इस पर सवारी भी करते हैं और सामान ढोने में भी इसका उपयोग करते हैं।[1]

याक की मादा 257 और 270 दिनों पर एक बच्चे को जन्म देती है।[4] मादा जन्म देने के लिए एक सुनसान जगह ढूँढती है, लेकिन बछड़ा जन्म के दस मिनट के भीतर चलने में सक्षम होता है और दोनों जल्द ही झुंड में पुन: शामिल हो जाते है।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "याक". अभिव्यक्ति. http://www.abhivyakti-hindi.org/phulwari/jaankari/junglekepashu/j_yak.htm. अभिगमन तिथि: 1 नवंबर 2014. 
  2. Buchholtz, C. (1990). True Cattle (Genus Bos). pp. 386–397 in S. Parker, ed. Grzimek's Encyclopedia of Mammals, Volume 5. New York: McGraw-Hill Publishing Company. (quoted in Oliphant, M. (2003). Bos grunniens (On-line), Animal Diversity Web. Accessed 4 अप्रैल 2009)
  3. Wild yak photo – Bos mutus – G13952. ARKive. Retrieved on 2012-12-19.
  4. Wiener, Gerald; Jianlin, Han; Ruijun, Long (2003). "4 The Yak in Relation to Its Environment", The Yak, Second Edition. Bangkok: Regional Office for Asia and the Pacific Food and Agriculture Organization of the United Nations, ISBN 92-5-104965-3. Accessed 8 August 2008.