मिश्री

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इससे मिलते जुलते मिस्री शब्द का प्रयोग मिस्र देश से संबंधित के लिए किया जाता है, अतः कृपया उससे भ्रमित न हों।


मिश्री या मिसरी शक्कर के क्रिस्टलों का एक रूप है, जिसे भारतपाकिस्तान में एक मिष्ठान्न के रूप में प्रयोग किया जाता है, अथवा दूध को मीठा करने में प्रयोग किया जाता है।

सांस्कृतिक महत्त्व[संपादित करें]

भारत में इसे हिन्दुओं द्वारा देवताओं को भोग लगाने व प्रसाद के रूप में बाँटने में भी प्रयोग किया जाता है। भगवान कृष्ण को मक्खन व मिश्री प्रिय मानी जाती हैं। ब्रजभूमि में लिखे गये कई भक्तिगीतों में "माखन और मिश्री" शब्द एक साथ आते हैं। मिश्री को सात्त्विक खाद्य की श्रेणी में रखा जाता है। उत्तर भारत में होने वाले भगवती-जागरणों में प्रायः आधी रात की वेला में, उपस्थित लोगों को मिश्री प्रसाद के रूप में बाँटी जाती है, तब इसके सेवन से सात्त्विकता का पुनः संचार हो जाता है, तथा नींद नहीं आती है।
मिश्री को संस्कृत में सिता, बंगाली में मिचरी कहा जाता है।

पाककला में[संपादित करें]

भारत में मिश्री से कई मिठाइयाँ भी बनाई जाती हैं, जैसे- मिश्री-मावा, मिश्री-पेड़ा, जिन्हें प्रायः उत्तर-पश्चिम भारत, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, गुजरात, पंजाब आदि में खाया जाता है।

आलंकारिक प्रयोग[संपादित करें]

मिश्री स्वाभाविक रूप से ही मिठास का उपमान है। किसी भी मीठी बात या सौम्य व्यक्ति को मिश्री की डली का विशेषण दिया जाता है। मीठी वाणी या स्वर बोलने को "कानों में मिश्री घोलना" कहा जाता है। इसी कारण से यह उत्तर भारत में प्रचलित नाम भी है, जैसे- मिश्रीलाल, मिसरीदेवी आदि।