बहुजन समाज पार्टी

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बहुजन समाज पार्टी
दल अध्यक्ष मायावती
महासचिव सतीश चन्द्र मिश्र
संसदीय दल अध्यक्ष मायावती
नेता लोकसभा राजेश वर्मा
नेता राज्यसभा उर्मिलेश कुमारी भारती
गठन 1984
मुख्यालय 11, गुरुद्वारा रकाबगंज रोड,
नई दिल्ली - 110001
लोकसभा मे सीटों की संख्या 21
राज्यसभा मे सीटों की संख्या 6
विचारधारा दलित समाजवाद
प्रकाशन आदिल जाफरी, मायायुग
जालस्थल [1]
भारत की राजनीति
राजनैतिक दल
चुनाव


बहुजन समाज पार्टी (अंग्रेजी: Bahujan Samaj Party) समाजवादी सोच वाला, भारत का एक राष्ट्रीय राजनीतिक दल है। इसका गठन मुख्यत: भारतीय जाति व्यवस्था के अन्तर्गत सबसे नीचे माने जाने वाले बहुजन , जिसमें अन्य पिछड़ा वर्ग, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अल्पसंख्यक शामिल थे ऐसे समाज का प्रतिनिधित्व करने के लिए किया गया था। इसके बारे में ऐसा भी कहा जाता है, कि दल का दर्शन बाबा साहेब अम्बेडकर के बौद्ध दर्शन से प्रेरित है जिन्होंने अपनी मृत्यु से डेढ माह पूर्व बौद्ध धर्म अपना लिया था।

संक्षिप्त इतिहास [संपादित करें]

बसपा का गठन उच्च प्रोफ़ाइल वाले करिश्माई दलित नेता कांशीराम द्वारा 14 अप्रैल 1984 में किया गया था। इस पार्टी का राजनीतिक प्रतीक (चुनाव चिन्ह) एक हाथी है। 13 वीं लोकसभा (1999-2004) में पार्टी के 14 सदस्य थे। 14 वीं लोक सभा में यह संख्या 17 और वर्तमान यानी 15 वीं लोक सभा में यह संख्या 21 है। बसपा का मुख्य आधार उत्तर प्रदेश है और पार्टी ने इस प्रदेश में कई बार अन्य पार्टियों के समर्थन से सरकार भी बनाई है। मायावती कई वर्षों से पार्टी की अध्यक्ष हैं।

==बहुजन शब्द का इतिहास==LIndi Khani Party Hai YE बहुजन शब्द का सबसे पहले प्रयोग भारत के सुप्रसिद्ध क्रान्तिकारी पण्डित राम प्रसाद 'बिस्मिल' ने सन् 1920 में प्रकाशित ऐतिहासिक उपन्यास बोल्शेविकों की करतूत में (पृष्ठ 125 पर) उस समय किया था जब कांशीराम पैदा भी नहीं हुए थे। हाँ इतना अवश्य हुआ है कि अब इस पार्टी की प्रत्येक नीति सर्वजन हिताय सर्वजन सुखाय में बदल दी गयी है ताकि सभी वर्ग का समर्थन भी प्राप्त हो सके।

उ०प्र० में पूर्ण बहुमत [संपादित करें]

11 मई 2007 को घोषित विधान सभा चुनाव परिणामों के पश्चात् उत्तर प्रदेश राज्य में 1991 से 15 वर्षों तक त्रिशंकु विधान सभा का परिणाम भुगतने के बाद भारत के सर्वाधिक आबादी वाले राज्य में स्पष्ट बहुमत प्राप्त कर सत्ता में आयी। बसपा अध्यक्ष मायावती ने मुख्यमंत्री के रूप में उत्तर प्रदेश में अपने चौथा कार्यकाल शुरू करते हुए 13 मई 2007 को प्रदेश की राजधानी लखनऊ में 50 अन्य मन्त्रियों के साथ मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण की। बहुजन शब्द का सबसे पहले इस्तेमाल गौतम बुध ने किया था |

पार्टी की आलोचना [संपादित करें]

जहाँ एक ओर उत्तर प्रदेश की जनता ने बसपा को सरकार बनाकर काम करने का मौका दिया वहीं दूसरी ओर मुख्यमन्त्री मायावती की इस बात के लिये दबी जुबान में आलोचना भी हो रही है कि जनता के टैक्स के पैसे से अपनी, कांशीराम एवम् अनेकों दलित समाज सुधारकों की बडी-बडी मूर्तियों पर अरबों-खरबों रुपया पानी की तरह बहाने में मुगल बादशाह शाहजहां को भी काफी पीछे छोड दिया। यह लोकतन्त्र है कोई सामन्तशाही नहीं, जनता इसका हिसाब चुकाना भी जानती है।