प्रोटीनोमिक्स

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प्रोटीनोमिक्स एक ऐसा विज्ञान है, जिससे हम मानव शरीर की कोशिका में पाए जाने वालेप्रोटीनों की विभिन्न अवस्थाओं में, एक ही समय में, तथातीव्र गति से विश्लेषण कर सकते हैं। और इससे कोशिका में प्रोटीनों की अंतःस्थिओति का मानचित्र तैयार कर सकते हैं।

मानव शरीर में अनेक प्रकार के प्रोटीन होते हैं। प्रोटीनों में अमीनो अम्लों की लम्बी शृंखलाएं होतीं हैं, तथा वे २० विभिन्न अमीनो अम्लों द्वारा निर्मित होतीं हैं। प्रत्येक अमीनो अम्ल के रासायनिक गुण भिन्न होते हैं, तथा उनका विभिन्न प्रोटीनों में होने वाला अनुक्रम भी भिन्न होता है। इसके कारण प्रत्येक प्रोटीन एक विशेष रूप से संरचित होता है और यह संरचना उसके द्वारा किए जाने वाले कार्य के लिए हर प्रकार से उपयुक्त होती है। प्रोटीण किसी जीव की जीवन क्षमता और कोशिकीय क्रियाविधि के लिए सीधे सीधे उत्तरदायी होते हैं।

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प्रोटीनों का महत्व

प्रोटीनोमिक्स के लाभ[संपादित करें]

एम.ए.एल.डी.आई मास स्पैक्ट्रोस्कोपी नमूनों की प्रतिरूप कैरियर पर रोबोटिक तैयारी

जीव विज्ञान में जीन और जीनोम का महत्व किसी भवन की नींव की तरह होता है। अतः जीनोम परियोजना के द्वारामिलने वाली सूचना अति महत्वपूर्ण होती है। प्रोटीनोमिक्स विधि में हुई प्रगति से हमें यह जानने में सहायता मिलेगी कि किस प्रकार विभिन्न रोग उत्पन्न होते हैंतथा किस प्रकार इनके विरुद्ध कार्य करने के लिए नई औषधियों का निर्माण किया जा सकता है। इस प्रकार प्रोटीनोमिक्स का उपयोग किसी रोगसे संबंधित प्रोटीन की पहचान करने में किया जाता है, जिसे हम डिज़ीज़ मार्कर कहते हैं।

कैंसर, हृदय रोग आदि रोगों को समझना, तथा किसी पोषण स्तर का अध्ययन करने के लिएभी प्रोटीनोमिक्स का भारी उपयोग होता है। वनस्पति शास्त्र में प्रोटीनोमिक्स विधि किसी पौधे और प्रजाति के लक्शःअणों का वर्णन करने, एक प्रकार के पौधे में आनुवंशिक भिन्नता का अनुमान लगाने तथा पर्यावरणीय तनाव से प्रभावित प्रोटीनों की पहचान में उपयोगी देखी गई है। अतं भविष्य में प्रोटीनोमिक्स से जीव विज्ञान अनुसंधान को एक नई दिशा प्राप्त होगी और मानव रोग संबंधित अनुसंधान में उसे एक प्रभावशाली स्थान प्राप्त होगा।

संदर्भ[संपादित करें]

विस्तृत पाठ[संपादित करें]

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बाहरी कड़ियां[संपादित करें]

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