प्रवेशद्वार:विज्ञान

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विज्ञान प्रवेशद्वार

विज्ञान प्रकृति का व्यवस्थित अध्ययन है जो परीक्षण योग्य स्पष्टीकरण और पूर्वानुमान उपलब्द्ध करवाती है। प्राचीन भारतीय विज्ञान तथा तकनीक को जानने के लिये पुरातत्व और प्राचीन साहित्य का सहारा लेना पडता है। प्राचीन भारत का साहित्य अत्यन्त विपुल एवं विविधतासम्पन्न है। इसमें धर्म, दर्शन, भाषा, व्याकरण आदि के अतिरिक्त गणित, ज्योतिष, आयुर्वेद, रसायन, धातुकर्म, सैन्य विज्ञान आदि भी वर्ण्यविषय रहे हैं। (अधिक जानकारी के लिए प्राचीन भारतीय विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी देखें।) पुरातन काल में विज्ञान और दर्शन शास्त्र लगभग एक समान विषय थे। आधुनिक युग से पूर्व अंग्रेज़ी में विज्ञान के लिए प्रयुक्त शब्द साईंस और दर्शन के लिए प्रयुक्त शब्द फिलोसोपी को एक दूसरे के पर्याय के रूप में काम में लिया जाता था।

विज्ञान एक प्रक्रिया है जिसके तहत प्रकृति को समझने और उसके महत्वपूर्ण सत्यों को जानने का प्रयास किया जाता है अर्थात विज्ञान एक पद्धति है।

निर्वाचित लेख

सूक्ष्मजीवों से स्ट्रीक्ड एक अगार प्लेट
सूक्ष्मजैविकी उन सूक्ष्मजीवों का अध्ययन है, जो एककोशिकीय या सूक्ष्मदर्शीय कोशिका-समूह जंतु होते हैं। इनमें यूकैर्योट्स जैसे कवक एवं प्रोटिस्ट, और प्रोकैर्योट्स, जैसे जीवाणु और आर्किया आते हैं। विषाणुओं को स्थायी तौर पर जीव या प्राणी नहीं कहा गया है, फिर भी इसी के अन्तर्गत इनका भी अध्ययन होता है। संक्षेप में सूक्ष्मजैविकी उन सजीवों का अध्ययन है, जो कि नग्न आँखों से दिखाई नहीं देते हैं। सूक्ष्मजैविकी अति विशाल शब्द है, जिसमें विषाणु विज्ञान, कवक विज्ञान, परजीवी विज्ञान, जीवाणु विज्ञान, व कई अन्य शाखाएँ आतीं हैं। सूक्ष्मजैविकी में तत्पर शोध होते रहते हैं एवं यह क्षेत्र अनवरत प्रगति पर अग्रसर है। अभी तक हमने शायद पूरी पृथ्वी के सूक्ष्मजीवों में से एक प्रतिशत का ही अध्ययन किया है। हाँलाँकि सूक्ष्मजीव लगभग तीन सौ वर्ष पूर्व देखे गये थे, किन्तु जीव विज्ञान की अन्य शाखाओं, जैसे जंतु विज्ञान या पादप विज्ञान की अपेक्षा सूक्ष्मजैविकी अपने अति प्रारम्भिक स्तर पर ही है। विस्तार से पढ़ें...

क्या आप जानते हो?

काली मिर्च

विज्ञान समाचार

क्षुद्रग्रह
  • गुरुत्व के अध्ययन के लिए यूरोपीय अन्तरिक्ष एजेंशी द्वारा २००९ में प्रक्षेपित जीओसीई उपग्रह ने वापस पृथ्वी के वायुमण्डल में प्रवेश किया।
  • पर्थ म्यूजियम के क्यूरेटरों ने फैसला किया है कि वे मिस्र की पुरानी ममी को सीटी स्कैन और एक्स-रे के लिए भेजेंगे।
  • डॉक्टर अब इस बात पर अंतरराष्ट्रीय सहमति बनाने का प्रयास कर रहे हैं कि किसी व्यक्ति को कब और कैसे मृत माना जाए।
  • विशेषज्ञों का मानना है कि स्तन कैंसर के युवा मरीजों के लंबे समय तक जीवित न रहने की समस्या के लिए कुछ हद तक क्लीनिकल परीक्षण की कमी को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है
  • भारतीय समयानुसार 1 जून 2013 को रात 02:30 बजे धरती पर जीवन तबाह करने में सक्षम लगभग 2.7 किलोमीटर चौड़ा एक क्षुद्रग्रह (चित्रित कार्टून) शुक्रवार की रात धरती के पास से गुज़रा
  • मिलने पर जैसे कई इंसान बेहद उत्तेजित होकर प्रतिक्रिया करते हैं ठीक उसी तरह चिंपाज़ी और बोनोबो (बौना चिंपाज़ी) भी करते हैं।

निर्वाचित चित्र

चाँद की ओर गतिशील अपोलो १७ देखा गया पृथ्वी का दृश्य।
श्रेय : पृथ्वी विज्ञान और छवि विश्लेषण प्रयोगशाला, नासा
चाँद की ओर गतिशील अपोलो १७ देखा गया पृथ्वी का दृश्य।

वैज्ञानिक जीवनी

१९२१ में आइन्स्टाइन
आइन्स्टीन एक सैद्धांतिक भौतिकविद् थे। वे सापेक्षता के सिद्धांत और द्रव्यमान-ऊर्जा समीकरण E = mc2 के लिए जाने जाते हैं।