निर्माण सामग्री

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बहुत से प्राकृतिक पदार्थ (मिट्टी, बालू, लकड़ी, चट्टानें, पत्तियाँ, आदि) निर्माण के लिये प्रयुक्त होते रहे हैं। इसके अलावा अब अनेक प्रकार के कृत्रिम या मानव-निर्मित पदार्थ भी निर्माण के लिये प्रयोग किये जाने लगे हैं; जैसे सीमेंट, इस्पात, अलुमिनियम, आदि।

निर्माण सामग्री के विभिन्न प्रकार[संपादित करें]

ईंट के ढ़ेर

भारत में कच्‍ची ईंटों से मकान बनाने की परंपरा[संपादित करें]

भारत में हमेशा से निर्माण सामग्री के रूप में मिट्टी का सबसे अधिक प्रयोग होता आ रहा है तथा यह इसकी संस्‍कृति का हिस्‍सा है। परंपरागत रूप में, विभिन्‍न क्षेत्रों की स्‍थलाकृति, जलवायु एवं आवश्‍यकताओं के आधार पर मिट्टी की दीवारों के निर्माण में काफी अंतर है। मिट्टी का घर बनाने की आम विधियां हैं: ढेला, टट्टर एवं लेप, सनी हुई मिट्टी, कच्‍ची ईंट एवं कतरन ब्‍लाक। आज भी लगभग 55 प्रतिशत भारतीय मकानों की दीवारें कच्‍ची मिट्टी की बनती हैं।

आश्‍चर्य है कि भार वहन करने की मिट्टी की सीमित क्ष‍मता परंपरागत निर्माताओं के लिए कोई अड़चन नहीं है। सभी परंपरागत तकनीकें इतनी मजबूत हैं कि ग्रामीण निर्माताओं की आवश्‍यकताएं पूरी हो जाती हैं। पूरे भारत में इनके सुंदर उदाहरण देखें जा सकते हैं। आज भी भवन सामग्री के रूप में मिट्टी का व्‍यापक स्‍तर पर प्रयोग होता है। निर्माण के लिए मिट्टी का प्रयोग करने के आम लाभों में शामिल हैं: ताप रोधी गुण, आसानी से उपलब्‍धता और सुंदरता।

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]