तबाशीर

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तबाशीर बाँस से आता है
सन् १९१५ में छपी एक पुस्तक में तबाशीर के कुछ टुकड़ों का चित्र

तबाशीर या बंसलोचन बांस की कुछ नस्लों के जोड़ों से मिलने वाला एक पारभासी (ट्रांसलूसॅन्ट) सफ़ेद पदार्थ होता है। यह मुख्य रूप से सिलिका और पानी और कम मात्रा में खार (पोटैश) और चूने का बना होता है।[1] भारतीय उपमहाद्वीप की आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सा प्रणालियों की दवा-सूचियों में इसका अहम स्थान है।[2] पारम्परिक चीनी चिकित्सा के कई नुस्ख़ों में भी इसका प्रयोग होता है।[3]

तथाकथित स्वास्थ्य-लाभ[संपादित करें]

पारम्परिक चिकित्सा विधियों में तबाशीर के कई फ़ायदे बताए जाते हैं, जैसे कि बुख़ार उतारना, स्पैज़्म (अकड़न की लहरें) से राहत दिलाना, लकवे में सहायता करना और कामोत्तेजक बनना (यानि काम-इच्छा तीव्र करना)।[4] बंसलोचन का उपयोग भारत में गर्भवती महिलाओं को जी मत्लने की अवस्था में एक टुकड़ा मुह में रखकर चूसने से लाभ मिलता है।[कृपया उद्धरण जोड़ें]

तबाशीर के प्रकार[संपादित करें]

हलकी नीलिमा वाले तबाशीर (जिसे आम तौर पर "नील" या "नीलकंठ" बुलाया जाता है) साधारण पीले या सफ़ेद तबाशीर से उत्तम माना जाता है।[5]

तबाशीर ढूंढना[संपादित करें]

हर बांस की डंडी में तबाशीर नहीं होता। तबाशीर ढूँढने के लिए डंडियों को हिलाया जाता है। अगर अंदर तबाशीर बना हुआ हो तो अक्सर उसके डले खड़कने की आवाज़ पैदा करते हैं। इन बांसों को चीरकर तबाशीर निकला जाता है।[5][6]

इतिहास[संपादित करें]

हालांकि तबाशीर प्राचीन आयुर्वेद चिकित्सा प्रणाली का हिस्सा है, कुछ इतिहासकारों का मानना है कि इसका पहला प्रयोग भारत की आदिवासी समुदायों में शुरू हुआ।[1] हज़ारों साल तक भारत से तबाशीर निर्यात होता था और मध्य काल में यह अक्सर अरब सौदागरों के द्वारा किया जाता था।[1] बारहवी शताब्दी ईसवी में भारत के पश्चिमी तट के क़रीब स्थित ठाणे शहर में निर्यात होने वाले तबाशीर की मंदी लगा करती थी।[7] रोम में नीरो के ज़माने में रहने वाले पेदानियोस दिओस्कोरीदिस (Πεδάνιος Διοσκουρίδης) नामक यूनानी चिकित्सक ने अपनी लिखाइयों में तबाशीर को साख़ारोन (σάκχαρον) का नाम दिया।[4]

नामोत्पत्ति और अन्य नाम[संपादित करें]

"तबाशीर" शब्द संस्कृत के "त्वक्षीर" शब्द से आया है, जिसका अर्थ "त्वचा का क्षीर" यानि "(पेड़ की) छाल का दूध" है।[4][8] इस के लिए कुछ अन्य संस्कृत नाम भी प्रयोग होते हैं, जैसे कि "वंस शर्कर" (यानि "बांस की शक्कर") और वंस कर्पूर ("बांस का कपूर")।[7] मैंडारिन चीनी भाषा में इसे "तिआन झु हुआंग" कहा जाता है, जिसका मतलब "दिव्य बांस पीला" (यानि बांस का दिव्य पीला पदार्थ) है।[3]

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. The National druggist, Volume 37, H. R. Strong, 1907, http://books.google.com/books?id=wmvnAAAAMAAJ, "... 'Tabasheer' or 'banslochan' is sold in all Indian bazars ... originated among the aboriginal tribes ... article of commerce with early Arab traders ... silica, with traces of lime and potash ..." 
  2. G.K. Ghosh, Bamboo: The Wonderful Grass, APH Publishing, 2008, आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 9788131303696, http://books.google.com/books?id=FH4Bb7dD4qYC, "... 'Tabasheer' or 'Bangsa Lochan' used in Unani and Ayurvedic medicines ..." 
  3. Heather Newman, Tabasheer, Virtual Herbarium, http://www.virtualherbarium.org/grass/bamboo/tabasheer.htm, अभिगमन तिथि: 2010-09-19, "... Called “tian zhu huang” in Mandarin, which translates to “heavenly bamboo yellow,” tabasheer is a versatile, highly demanded substance described to be cold in nature and sweet in taste ..." 
  4. Sir George Watt, Edgar Thurston, A dictionary of the economic products of India, Department of Revenue and Agriculture, Government of India, 1885, http://books.google.com/books?id=x07iKb5rVk4C, "... the σάκχαρον of the Greeks was tabasjeer 'beyond all controversy' ... The Sanscrit name for tabascher is tvakkschira, bark milk ... called Bansolochan (or tabashir) is supposed to be efficacious in paralytic complications, flatulency, and poisoning cases ... a stimulant and aphrodisiac ... a febrifuge ..." 
  5. Edited by Edward Smedley, Hugh James Rose, and Henry John Rose, Encyclopaedia Metropolitana, B. Fellowes, 1845, http://books.google.com/books?id=x2pBAAAAcAAJ, "... On shaking the Bamboo a rattling noise is perceived, as if small stones were contained in the cavity ... that reckoned the best if of a bluish-white color ..." 
  6. Sir Norman Lockyer, Nature: international journal of science, Volume 35, Macmillan Journals Ltd., 1887, http://books.google.com/books?id=wI4DbxBSp7AC, "... splitting open those bamboo stems which give a rattling sound when shaken ..." 
  7. The National druggist, Volume 30, H. R. Strong, 1900, http://books.google.com/books?id=PWrnAAAAMAAJ, "... Bamboo manna derives its name from the Sanskrit words - Tvak-kshira, 'bark milk'; Vansa-sarkara, 'bamboo sugar'; and Vansa-karpura, 'bamboo camphor' ... known to the early Arab travelers in the East, and the port of Thana, on the western coast of India, was famous for this product in the twelfth century ..." 
  8. Nasir Ahmad Khan, Jadeed Hindi-Urdu Shabdkosh: Pa-Ha, Qaumi Council Bara-e-Farogh-e-Urdu Zabān, New Delhi, India, 2005, आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ 9788175871144, http://books.google.com/books?id=6l9jAAAAMAAJ, "... तबाशीर और ..."