गोण्डा
नोट: यह लेख गोण्डा जिला मुख्यालय (उत्तर प्रदेश) के संबंध में है। गोंडा जिले के लिए गोंडा जिला देखें।
| गोण्डा | |||||
| — जिला मुख्यालय — | |||||
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| समय मंडल: आईएसटी (यूटीसी+५:३०) | |||||
| देश | |||||
| राज्य | उत्तर प्रदेश | ||||
| ज़िला | गोंडा जिला | ||||
| सांसद | कीर्तिवर्धन सिंह उर्फ 'राजा भैया | ||||
| जनसंख्या • घनत्व |
३४,३१,३८६ (२००१ के अनुसार [update]) | ||||
| क्षेत्रफल • ऊँचाई (AMSL) |
७३५२ वर्ग किलोमीटर कि.मी² • १२० मीटर |
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विभिन्न कोड
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| आधिकारिक जालस्थल: gonda.nic.in | |||||
यह भारत के प्रान्त उत्तर प्रदेश के एक प्रमुख जिला गोंडा जिले का मुख्यालय है जो पूर्व में बस्ती, पश्चिम में बहराइच, उत्तर में बलरामपुर तथा दक्षिण में बाराबंकी और फैजाबाद से घिरा हुआ है। यहाँ की जिला जेल में काकोरी काण्ड के एक प्रमुख क्रान्तिकारी राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी को निर्धारित तिथि से दो दिन पूर्व १७ दिसम्बर १९२७ को बेरहम ब्रिटिश सरकार द्वारा फाँसी दी गयी थी।
अनुक्रम |
नामकरण [संपादित करें]
मान्यता के अनुसार अयोध्या के राजा दशरथ की गायें चरा करती थीं, जिस कारण इसका नाम गोनर्द पड़ा। कालान्तर में यही गोनर्द अपभ्रंश होकर गोण्डा बन गया।
भूगोल [संपादित करें]
गोण्डा २६° ४७' तथा २७° २०' उत्तरी अक्षांश के मध्य एवं ८१° ३०' तथा ८२° ४६' देशान्तर के मध्य में स्थित है। जहाँ इस जिले का बहुत बडा हिस्सा पश्चिम में बहराइच तथा थोड़ा हिस्सा श्रावस्ती से, उत्तर में बलरामपुर, पूर्व में बस्ती जिले से घिरा हुआ है वहीं घाघरा नदी इसे दक्षिण में बाराबंकी एवं फैजाबाद जिले से अलग करती है। इसका कुल क्षेत्रफल ७३५२ वर्ग किलो मीटर है।
इतिहास [संपादित करें]
गोण्डा प्राचीन काल में कोशल महाजनपद का भाग था, मुगलों के शासन में यह फरवरी १८५६ तक अवध का हिस्सा था और मुगलों के आधीन था जिसे बाद में अंग्रेजों ने कब्ज़ा लिया।
ऐसा माना जाता है कि प्राचीन समय में अयोध्या के राजा भगवान श्रीराम की गायें इस क्षेत्र में चरा करती थी, जिससे इस क्षेत्र का नाम "गोनर्द" पड़ा। यही कालान्तर में अपभ्रंश होकर गोण्डा कहलाया। आज भी बहुत से ग्रामीण "गोण्डा" को "गोंड़ा" कहते हैं। गोण्डा को महाभाष्यकार पतञ्जलि की जन्मभूमि भी माना जाता है। पतंजलि को "गोनर्दीय पतञ्जलि" भी कहा जाता है। यहाँ स्थित "सूकरखेत", जो सूकरक्षेत्र का ही अपभ्रंश है, तुलसीदास जी की जन्मस्थली माना जाता है।
जनसांख्यिकी [संपादित करें]
सन २००१ की जनगणना के अनुसार इस जिले की कुल जनसंख्या ३४,३१,३८६ थी जिसमें १७,८५,६२९ पुरुष एवं १६,४५,७५७ स्त्रियाँ थीं।
आदर्श स्थल [संपादित करें]
स्वामी नारायण छापिया: यह जगह जिला मुख्यालय से लगभग ५० किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह स्थान सन्त सहजानन्द का जन्म स्थान है। इनका जन्म १७८० ईसवी में हुआ था। बहुत ही कम उम्र में वह काफी प्रसिद्ध हो गये थे और गुजरात जाकर बस गये थे। जूनागढ़ स्थित वैष्णव मठ के प्रमुख रामानन्द ने उन्हें गोद ले लिया था। सहजानन्द की मृत्यु केवल ४९ वर्ष की आयु में ही हो गई थी। उनकी मृत्यु के पश्चात, उनके सम्मान में उनके भक्तों ने स्वामी नारायण मंदिर का निर्माण करवाया था। कार्तिक माह के अन्त और रामनवमी के अवसर पर काफी संख्या में भक्त यहाँ आते हैं। स्वतन्त्रता संग्राम के समय में भी इस जगह का योगदान महत्वपूर्ण रहा है।
पसका: जिला मुख्यालय के दक्षिण-पश्चिम से लगभग ४५ किलोमीटर की दूरी पर स्थित पसका सरयू नदी के तट पर स्थित है। यह काफी प्राचीन संगम स्नान स्थल है। पशु-योनि से मुक्ति पाने के लिए काफी संख्या में श्रद्धालु सरयू नदी में स्नान करने के लिये यहाँ आते हैं। ऐसा माना जाता है कि भगवान वराह ने इस जगह पर अवतार लिया था। कहा जाता है कि यहाँ स्थित भगवान वराह के प्राचीन मन्दिर का निर्माण १९वीं शताब्दी में करवाया गया था। मन्दिर में स्थित मूर्ति कुछ वर्ष ही पुरानी है। इसके अतिरिक्त यहाँ कई छोटे-छोटे मन्दिर और काचा घाट भी स्थित है। पसका को गोस्वामी तुलसीदास और उनके गुरु की भूमि के रूप में जाना जाता रहा है। इस जगह को गुरू नरहरिदास के स्थान के रूप में जाना जाता है। इस जगह की दक्षिण दिशा की ओर एक सन्त की कुटिया स्थित है जहाँ तुलसीदास राम-कथा सुनाया करते थे।
वाराही देव: पसका के पूर्व में लगभग ६ किलोमीटर की दूरी पर वाराही देव स्थित है। वाराही देव को उत्तरी भवानी के नाम से भी जाना जाता है। भगवती के इस प्राचीन मन्दिर में काफी संख्या में भक्त यहाँ आते हैं, विशेष रूप से नवरात्रों के अवसर पर। यह जगह सुकर झट के एक हिस्से के रूप में जानी जाती है। माना जाता है कि मन्दिर स्थित आदिशक्ति वाराही की प्रतिमा का सम्बन्ध पासका के वारहा की शक्ति से है।
पृथ्वीनाथ महादेव: खड़गपुर के दक्षिण से कुछ दूरी पर भगवान शिव का प्राचीन मन्दिर स्थित है। इस जगह का सम्बन्ध महाभारत काल से है। जिस वजह से इस क्षेत्र को पंचारायन के नाम से जाना जाता है। वर्तमान मन्दिर का पुनर्निर्माण अयोध्या के महाराजा मानसिंह ने करवाया था। माना जाता है कि जिस जगह पर इस मन्दिर का निर्माण करवाया गया था, प्राचीन समय में उस स्थान पर एक विशाल शिवलिंग प्राप्त हुआ था। इसके अतिरिक्त, मन्दिर से कुछ ही दूरी पर पचराननाथ का अन्य मन्दिर भी स्थित है।
देवीपाटन शक्तिपीठ: गोण्डा से ७० किलोमीटर और तुलसीपुर से सिर्फ दो किलोमीटर की दूरी पर देवीपाटन शक्तिपीठ स्थित है। ऐसी मान्यता है कि यहाँ सती का वामस्कन्ध गिरा था। इस पीठ की स्थापना नाथ सम्प्रदाय के गुरु गोरखनाथ ने की थी। माना जाता है कि जिस जगह पर यह मन्दिर स्थित है उसका निर्माण राजा विक्रमादित्य ने करवाया था। यह प्रसिद्ध स्थल ५१ शक्तिपीठों में से एक है। नवरात्रों के दौरान मन्दिर में बहुत बड़े मेले का आयोजन किया जाता है। प्रत्येक वर्ष शव पंचमी के अवसर पर भगवान पीर रतननाथ को नेपाल के डंग से देवीपाटन मन्दिर लाया जाता है। जिसके पश्चात् भगवान पीर रतननाथ और देवीपतन सिद्ध की पूजा की जाती है।
तिरर मनोरमा: गोण्डा शहर के उत्तर से २१ किलोमीटर की दूरी पर यह पवित्र स्थान स्थित है। माना जाता है कि यहाँ पर मुनि उद्दालक का आश्रम स्थित है। इसके अलावा यहीं से मनोरमा नदी की उत्पत्ति हुई थी। साथ ही यहाँ पक्का घाट के साथ प्राचीन सरोवर और मण्दिर स्थित है। प्रत्येक वर्ष कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर यहाँ मेले का आयोजन किया जाता है।
प्राश अथवा परास: यह जगह सरयू नदी के उत्तर और तहसील तरबगंज में स्थित है। इस जगह का सम्बन्ध वशिष्ठ के पौत्र और शक्ति के पुत्र, प्राचीन ऋषि पराशर से है। कहा जाता है कि इनकी माता का नाम अदृश्यवन्ती था। ऋषि पराशर को प्रसिद्ध समर्थन के सृष्टिकर्ता के रूप में भी जाना जाता है। उन्ही की याद में यहाँ प्राश का निर्माण करवाया गया है।
गोस्वामी तुलसीदास जन्मस्थली: इसी जनपद के परसपुर ब्लाक के राजापुर नामक गाँव में रामचरितमानस के जैसे महाकाव्य के रचनाकार की जन्मस्थली भी है। सरयू नदी के उत्तर में राजापुर गाँव है जहाँ पर तुलसीदास का जन्म हुआ था। साथ ही साथ सूकरखेत में गोस्वामी जी के गुरु नरहरिदास की मूर्ति एक जीर्ण-शीर्ण मन्दिर में मौजूद है।
अन्य दर्शनीय स्थल इस प्रकार हैं:
- अमृत बाबा मन्दिर (पारसपुर रोड)
- झाली धाम
- पार्वती महादेव
- करनैलगंज सकरौरा
- करौहाँनाथ
यातायात [संपादित करें]
गोण्डा रेलवे स्टेशन यातायात के लिये एक महत्वपूर्ण स्टेशन है। यहाँ से देश की सभी दिशाओं के लिये ट्रेन मिलती है, गोण्डा पूर्वोतर रेलवे का एक महत्वपूर्ण स्टेशन है जो लखनऊ और गोरखपुर के बीच में पड़ता है. याती सुविधा के मामले में गोण्डा रेलवे स्टेशन अव्वल है। गोण्डा प्रदेश की राजधानी लखनऊ, फैज़ाबाद, बलरामपुर एवं बहराईच से सडक मार्ग द्वारा बहुत अच्छी तरह से जुडा हुआ है। प्रदेश के अन्य बडे शहरों जैसे इलाहाबाद, वाराणसी, कानपुर, बरेली आदि तथा राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली को मोटर मार्ग द्वारा नियमित परिवहन बस सेवायें हैं।
शिक्षा [संपादित करें]
शिक्षा की दृष्टि से गोण्डा जिला काफी समृद्ध है। यहाँ स्कूल कालेज से लेकर डिग्री कालेज स्तर तक के विद्यालय प्रचुर संख्या में हैं।
स्कूल कालेज [संपादित करें]
- एस०आर०डी० चाँद अकादमी, वज़ीरगंज, गोण्डा
- एम०डी०बी०एस० इण्टर कॉलेज, तराबगंज, गोण्डा
- ए०आई०एम०एस० अकैडमी गर्ल्स स्कूल, सिविल लाइन्स, गोण्डा
- ब्लूमिंग बड्स् पब्लिक स्कूल, बलरामपुर, गोण्डा
- चैम्बर्स मेमोरियल स्कूल नजदीक बस स्टेशन, गोण्डा
- सिटी मॉन्टेसरी स्कूल, गोण्डा
- डी०ए०वी० इण्टर कॉलेज, आई०टी०आई० टाउनशिप, मनकापुर, गोण्डा
- एफ०ए०ए० राजकीय इण्टर कॉलेज नजदीक बस स्टेशन, बाडगाँव रोड, गोण्डा
- फातिमा स्कूल सरकुलर रोड, गोण्डा
- गाँधी विद्यालय इण्टरमीडिएट कॉलेज, रेलवे कॉलोनी
- गोण्डा सिटी मॉन्टेसरी स्कूल, गोण्डा
- राजकीय गर्ल्स इण्टर कॉलेज, गोण्डा
- एच०एम०एस० पब्लिक स्कूल, इटियाथोक बाजार, गोण्डा
- जवाहर नवोदय विद्यालय, मनकापुर, गोण्डा
- जिगर मेमोरियल इण्टर कॉलेज, गोण्डा
- के०एल० इण्टर कॉलेज, कर्नलगंज, गोण्डा
- केन्द्रीय विद्यालय, मनकापुर, गोण्डा
- महाराजा देवी बक्स सिंह इण्टर कॉलेज, बेलसर, गोण्डा २७१४०१
- महर्षि विद्या मन्दिर, गोण्डा
- नगर पालिका गर्ल्स इण्टर कॉलेज, नवाबगंज, गॉण्डा
- राजेन्द्र लाहिडी स्कूल, पन्तनगर, गोण्डा
- सरस्वती विद्या मन्दिर, मालवीय नगर, गोण्डा
- एस०जी०वी० इण्टर कॉलेज, नवाबगंज, गोण्डा
- एस०जी०वी०आर०सी०, बडगाँव रेलवे कॉलोनी, गोण्डा
- श्री जी०वी०एम० इण्टर कॉलेज, राधाकुण्ड, गोण्डा
- श्री रघुकुल विद्यापीठ, आई०टी०आई० रोड, गोण्डा
- सेण्ट.माइकेल कॉन्वेन्ट स्कूल, मनकापुर टाउनशिप, गोण्डा
- शहीदे-आजम सरदार भगतसिंह इण्टर कॉलेज, लखनऊ रोड, गोण्डा
- तुलसी स्मारक इण्टर कॉलेज, पारसपुर, गोण्डा
- नवोदय विद्यालय विद्यालय,द्योरिया, मनकापुर, गोण्डा
- विकास निलयम हायर सेकेण्डरी स्कूल, सरकुलर रोड ,गोण्डा
- स्टार पब्लिक स्कूल छेदीपुरवा, (नजदीक जिला अस्पताल) ,गोण्डा
- बेनीमाधव इण्टर कॉलेज, पारसपुर, गोण्डा
- तुलसीदास महाविद्यालय, पारसपुर, गोण्डा
डिग्री कॉलेज [संपादित करें]
गोण्डा जनपद के सभी डिग्री कालेज व महाविद्यालय फैजाबाद विश्वविद्यालय से सम्बद्ध है। उनकी सूची इस प्रकार है:आचार्य
- आचार्य नरेन्द्र देव किसान महाविद्यालय
- बाबा गयादीन वैद्य बाबूराम महाविद्यालय
- बैकुन्ठनाथ महाविद्यालय
- भागीरथी सिंह मेमोरियल महाविद्यालय
- चन्द्रशेखर श्यामराजी महाविद्यालय
- दशरथसिंह मेमोरियल महाविद्यालय
- डॉ० भीमराव अम्बेडकर महाविद्यालय
- हकीकुल्ला चौधरी महाविद्यालय
- जगदम्बाशरण सिंह एजूकेशनल इंस्टीच्यूट
- कामताप्रसाद मथुराप्रसाद जनता महाविद्यालय
- किसान डिग्री कॉलेज
- लाल बहादुर शास्त्री महाविद्यालय गोण्डा (शहर)
- लखनलाल शरणसिंह महाविद्यालय
- माँ गायत्रीदेवी रामसुख पाण्डेय महाविद्यालय
- महाकवि तुलसीदास महाविद्यालय
- नन्दिनी नगर महाविद्यालय (नवाबगंज)
- नन्दिनी नगर विधि महाविद्यालय (नवाबगंज)
- पं० दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण महाविद्यालय
- पं० जगनारायण शुक्ल ग्रामोदय महाविद्यालय
- पं० रामदत्त शुक्ल महाविद्यालय
- राघोराम दिवाकर दत्त ज्ञानोदय महाविद्यालय
- राजा रघुराज सिंह महाविद्यालय
- रामनाथ मेमोरियल महाविद्यालय
- रवीन्द्रसिंह मेमोरियल महाविद्यालय
- सरस्वतीदेवी नारी ज्ञानस्थली महाविद्यालय गोण्डा (शहर)
- सरदार मोहरसिंह मेमोरियल महिला महाविद्यालय
- सरयू डिग्री कॉलेज
- श्रीमती सरजूदेवी महिला महाविद्यालय
- श्री रघुकुल महिला विद्यापीठ गोण्डा (शहर)
- सुभाष चन्द्र बोस मेमोरियल महाविद्यालय
संदर्भ [संपादित करें]
- Official Web Site Of the District Gonda
- www.gondvi.com * Other Web Site Of the District Gonda
- www.sureshmokalpuri.blogspot.com