कालका मेल

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1906 में कालका स्टेशन से रवाना होती ईस्ट इंडिया रेलवे मेल।

कालका मेल, भारतीय रेल द्वारा संचालित एक रेलगाड़ी है जो भारत के पूर्वी राज्य पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के निकट स्थित हावड़ा को एक अन्य राज्य हरियाणा के पंचकुला में स्थित कालका, रेलवे स्टेशन से जोड़ती है, जो एक समय भारत की ग्रीष्मकालीन राजधानी शिमला, जाने वाली रेलवे लाइन का प्रारंभिक स्टेशन भी है।

इतिहास[संपादित करें]

कालका मेल (1 अप / 2 डाउन) सन 1866 में कलकत्ता और दिल्ली के बीच चलनी शुरु हुई, और 1891 में इसे दिल्ली से लेकर कालका तक बढ़ाया गया। यह रेलगाड़ी मुख्य रूप से ब्रिटिश सिविल सेवकों को राजधानी कलकत्ता से ग्रीष्मकालीन राजधानी शिमला ले जाने के लिए चलाई गयी थी।[1]

इसका संचालन ईस्ट इंडियन रेलवे कंपनी, द्वारा किया जाता था और इसका मूल नाम "ईस्ट इंडिया रेलवे मेल" था। इस रेलगाड़ी की संख्या अब हावड़ा से 2311 है और हावड़ा की ओर 2312 है।

लोकप्रिय संस्कृति में[संपादित करें]

भारतीय फिल्म निर्देशक और लेखक सत्यजीत रे, ने अपनी एक लघु कहानी में कालका मेल को आधार बनाया है। “कालका मेल का रहस्य", नामक कहानी के तीन मुख्य पात्र इस रेलगाड़ी से कलकत्ता से दिल्ली और फिर कालका जाने के लिए सवार होते हैं। कहानी में एक हीरे की चोरी और एक अप्रकाशित पांडुलिपि भी शामिल है।[2] कहानी पर एक रेडियो नाटक भी बनाया गया था।

दुर्घटना[संपादित करें]

10 जुलाई 2011 को उत्तर प्रदेश में कानपुर के निकट फतेहपुर के मलवां स्टेशन के पास दोपहर के समय इस रेलगाड़ी के 13 डिब्बे पटरी से उतर गये। इस दुर्घटना में कम से कम अस्सी लोगों की मौत हो गई है। जबकि साढ़े तीन सौ लोग घायल हो गए। प्रधानमंत्री ने रेल मंत्रालय की ओर से मृतकों के परिजनों के लिए पांच-पांच लाख रुपये के मुआवजे की घोषणा की है।

संदर्भ[संपादित करें]