1991 में भद्रक फसाद

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1991 की भद्रक सांप्रदायिक हिंसा[1][2][3] एक सांप्रदायिक घटना थी जो 20 मार्च 1991 को राम नवमी के दिन भद्रकओडिशा में घटित हुई। एक हिंदू जुलूस भद्रक टाउन के मुस्लिम बहुल क्षेत्र से गुजर रहा था, जब जुलूस में एक हिंदू जनूनी ने हिंदी में एक विवादास्पद टिप्पणी "जब भारत में रहना होगा राम नाम कहना होगा" पारित कर दिया। इस से मुसलमानों और हिंदुओं.के बीच एक सांप्रदायिक दंगा हो गया।

सांप्रदायिक हिंसा के बाद[संपादित करें]

यह फसाद के दौरान पत्थर फेंकने, लूटपाट, और सार्वजनिक संपत्तियों की व्यापक रूप से आगजनी की घटनाएँ घटी। इस सांप्रदायिक दंगा में सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र भद्रक शहर के पुराण बाजार और चंदन बाजार इलाके थे। दो समुदायों में शांति और सामंजस्य बहाल करने के लिए मोहम्मद अब्दुल बारी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। बाद में उन्हें भद्रक दंगों और भारत में कई अन्य दंगे के बाद के उनके महत्वपूर्ण प्रयासों के लिए 2011 में प्रणव मुखर्जी द्वारा राष्ट्रीय सद्भाव पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. "Tehelka – India's Independent Weekly News Magazine". Archive.tehelka.com. अभिगमन तिथि 2014-02-22.
  2. "Odisha: Md. Abdul Bari from district Bhadrak wins National Communal Harmony Award, Odisha Current News, Odisha Latest Headlines". Orissadiary.com. 2012-01-25. मूल से 25 December 2018 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 2014-02-22.
  3. "Abdul Bari presented with National Harmony Award". OdishaSunTimes.com. मूल से 25 December 2018 को पुरालेखित. अभिगमन तिथि 2014-02-22.