२ दिसंबर असम रेल धमाका

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असम में 2 दिसम्बर, २००८, मंगलवार सुबह 7 बजकर 50 मिनट पर गुवाहाटी से तिनसुकिया जा रही पैसेंजर ट्रेन में हुए धमाके में तीन लोग मारे गए और 30 अन्य घायल हो गए।[1][2]

दीफू स्टेशन पर खड़ी ट्रेन में हुए इस हादसे के बाद स्टेशन से ट्रेनों का आवागमन रोक दिया गया है। स्टेशन पर ट्रेन खाली कराकर उसकी तलाशी ली जा रही है। धमाका सुबह 8.10 बजे हुआ है। दिफू एक संवेदनशील इलाका है।

दीफू एसपी ने बताया कि यह धमाका आतंकियों ने टाइमर लगाकर किया है। उन्होंने बताया कि इस घटना में 3 लोग मारे गए और 30 घायल हो गए। आशंका जताई जा रहीं है कि यह धमाका के एल एन एफ आतंकियों ने किया है। दिफू रेलवे स्टेशन के आगे दकमोका नामक जगह पर दो जिंदा बम मिले। ये बम रेलवे ट्रेक पर ही रखा था।

घटना[संपादित करें]

लमडिंग के पास ये धमाका उस वक्त हुआ जब ट्रेन दिफू स्टेशन पर खड़ी थी। ये धमाका ट्रेन की बोगी नंबर 8209 में हुआ है। स्टेशन पर अफरा-तफरी मच गई है। पुलिस मौके पर पहुंच गई है।[3]

धमाके की शक की सुई केएलएनएलएफ पर जताई जा रही है। धमाका सुबह 8.10 बजे हुआ है। दिफू एक संवेदनशील इलाका है। यहां पर उग्रवादियों के ताडंव बीच-बीच में होते रहते हैं।

जिम्मेदारी[संपादित करें]

असम में सक्रिय विद्रोही संगठनों में से किसी ने भी इस घटना की ज़िम्मेदारी नहीं ली है। पुलिस का कहना है कि उसे कार्बी जनजाति के कोर्बी लोंगरी नेशनल लिब्रेशन फ़्रंट का इस घटना में हाथ होने का शक़ है। ये गुट पहले भी हिंदी भाषी लोगों को वहाँ निशाना बना चुका है।

तीस अक्टूबर को असम के चार नगरों में हुए धमाकों में 80 लोग मारे गए थे। उन धमाकों के लिए राज्य सरकरा ने अल्फ़ा और नेशनल डेमोक्रिटेक फ़्रंट ऑफ़ बोडोलैंड को ज़िम्मेदार ठहराया था।

सन्दर्भ[संपादित करें]