२००३ क्रिकेट विश्व कप फाइनल

मुक्त ज्ञानकोश विकिपीडिया से
Jump to navigation Jump to search

अंगूठाकार

२००३ क्रिकेट विश्व कप फाइनल
घटना २००३ क्रिकेट विश्व कप
ऑस्ट्रेलिया भारत
ऑस्ट्रेलिया भारत
३५९/२ २३४
५० ओवर ३९.२ ओवर
तिथि २३ मार्च २००३
स्थान वेंडरर्स स्टेडियम
अंपायर स्टीव बकनर और डेविड स्टिफ़र्ड
उपस्थिति ३१,७७९

अंगूठाकार २००३ क्रिकेट विश्व कप का फाइनल मैच ऑस्ट्रेलिया बनाम भारत के बीच जोहान्सबर्ग के वाडंर्स [1][2]में गया था। यह विश्वकप क्रिकेट का आठवां संस्कण था।इस मैच में आस्ट्रेलियाई टीम ने 125 रनों से भारत को हराया था।[3]

फाइनल तक का सफर[संपादित करें]

ग्रुप स्टेज[संपादित करें]

भारत और आस्टृेलिया दोनो एक ही ग्रुप में शामिल थे। जंहा आस्टेृलियाई टीम ने शुरू से ही अपना दबदबा कायम रखते हुए सभी मैच जीते वही जहाँ विश्वकप  के पहले ही मैच ही नीड्सलैंड जैसी कमजोर टीम के खिलाफ भारत केवल २॰४ ही बना सकी तो वहीं आस्ट्रेलिया के खिलाफ महज़ १२५ पर सिमट गई। लेकिन उसके बाद टीम ने संभल कर खेलना शुरू किया और अपने शेष मुकाबलों को बढ़िया अंतर से जीत हासिल की और अपने ग्रुप में आस्टृलिया के बाद दूसरे नंबर पर रही। 1 मार्च को सैचुरियन में चिरप्रतिद्वंदी पकिस्तान के खिलाफ मुकाबला जीत कर अगले दौर में स्थान पक्का किया।

सुपर सिक्स स्टेज[संपादित करें]

भारत और आस्टृेलिया के अलावा केन्या, श्रीलंका, न्यूजीलैंड और जिबांबे ने सुपर सिक्स के दौर में प्रवेश किया। यहां भारत और आस्टृलियाई टीम ने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए अपने अपने मुकाबले बढ़िया अंतर से जीत हासिल करके अगले दौर में प्रवेश किया।

सेमीफाइनल[संपादित करें]

केन्या ने अपने प्रदर्शन से सबको चैंकाते हुए पहली बार विश्व कप क्रिकेट के सेमीफानल में प्रवेश किया। जहां उसका मुकाबला भारत से हुआ।

टूर्नामैंट के पहले सेमीफानल मुकाबला पोर्ट एलिजाबेथ में आस्ट्लिया और श्रीलंका के बीच 18 मार्च 2003[4] को खेला गया। पोर्ट एलिजाबेथ[5] की मुश्किल पिच पर आस्टृलियाई कप्तान ने टाॅस जीता और पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया। श्रीलंकाई गेंदबाजों की बेहतरीन कसी हुई गंेदबाजी के कारण आस्टृलियाई टीम अपने निर्धारित 50 ओवरों में 7 विकेट के नुकसान पर केवल 212 रन ही बना सकी। जबाव में श्रीलंकाई टीम की बल्लेबाजी भी धाराशयी हो गई। पारी के 39वें ओवर में वर्षा ने खलल डाल दिया और मैच दुबारा शुरू नहीं किया जा सका। और इस प्रकार डक वर्थ लुईस पदति के आधार पर आस्ट्लियाई टीम 48 रनों से मुकाबला जीत कर फाॅईनल में पहुंचने में कामयाब रहीं।

वहीं, टूर्नामैंट के दूसरे सेमीफाॅइनल मुकाबले में केन्या का मुकाबला भारत से 20 मार्च 2003[6] को डरबन में खेला गया। भारतीय कप्तान सौरव गांगुली ने टाॅस जीता और पहले बल्लेबाजी का फैसला किया। भारत की शुरूआत अच्छी रही। तीसरे नंबर पर आये कप्तान सौरव ने सचिन तेंदुलकर के साथ मिल कर दुसरे विकेट के लिए शतकीय साझेदारी की। और इस तरह सौरव गांगुली के शानदार नाबाद 111 रनों के दम पर भारतीय टीम ने 4 विकेट के नुकसान पर 270 रनों का चुनौती पूर्ण लक्ष्य खड़ा किया। जवाब में केन्याई टीम के कप्तान स्टीव टीकोलो के अलावा कोई भी बल्लेबाज टिक कर खेल नहीं सका और इस प्रकार टीम निर्धारित 50 ओवर भी नहीं खेल सकी, और 46.2 ओवर में 179 पर सिमट गई। इस प्रकार भारत 91 रनों से यह मुकाबला जीतने में सफल रहा और फाॅईनल में प्रवेश करने में कामयाब रहा।

फाइनल[संपादित करें]

आस्ट्रेलियाई टीम पिछले विश्व कप से अपने अजेय अभियान को जारी रखती हुई पांचवी बार फाइॅनल तक पहुँची। जबकि भारतीय टीम का फाॅइनल तक का सफर इसके बिलकुल ऊल्ट रहा टीम ने अपने शुरूआत हल्की और फीके प्रदर्शन से की। लेकिन इसके बाद टीम ने रफ्तार पकङी और सभी मुकाबले में जीत हासिल करती हुई 1983 के विश्व कप के बाद दूसरी बार विश्व कप फाइॅनल में पहुंची।

टॉस अंगूठाकार|टॉस ३१७७९ दर्शकों की मौजूदगी में भारतीय कप्तान सौरव गांगुली ने टाॅस जीता और पिछली रात की हुई वर्षा को ध्यान में रखते हुए आस्ट्रेलिया को पहले बल्लेबाजी करने का न्यौता  दिया। अंगूठाकार|रिकी पोंटिग पहली पारी।

पहले ही ओवर से आस्ट्रेलिया ने प्रहार शरू कर दिया। जल्द ही भारत को अपना फैसला गलत होता दिखने लगा। जब पहले ५॰ रन आस्टेªलिया ने ८ ओवर में पूरे कर लिए। आस्ट्रेलिया ने ठोस शुरुआत की और पहले विकेट के लिए १४ ओवर तक १॰५ रन जोडे़। खतरनाक होती इस साझेदारी को हरभजन सिंह ने तोड़ा। एक समय पर २ विकेट पर १२५ पर भारतीय टीम मैंच में वापसी करते हुए लग रही थी, लेकिन तीसरे विकेट के लिए हुई नाबाद २३४ की रिकी पोंटिग और डेमिन मार्टिन के बीच हुई इस साझेदारी ने कई रिकार्ड तोड़ दिए। इस मैच में ऑस्ट्रेलियाई टीम ने [1] पहले बल्लेबाजी करते हुए ५० ओवरों में कुल ३५९ रन बनाए थे । भारत की ओर से हरभजन सिंह सबसे सफल गेंदबाज रहे जिन्होने ८ ओवर में ४९ देकर दोनो विकेट ने झटकेे। भारतीय टीम ने ३७ अतिरिक्त रन दिए जो किसी विश्व कप फाइनल में दिए जो इंग्लैंड के पिछले ३२ रन के रिकाॅर्ड को तोड़ दिया। ऑस्ट्रेलिया की ओर से रिकी पोंटिंग ने १४० रनों की पारी खेली थी , जिसने किसी भी विश्व कप फाइनल में सर्वोच्च स्कोर को १९७५ के सर विवियन रिचर्डसन के १३८ के पिछले रिकार्ड को तोड़ दिया।

दूसरी पारी

360 के चुनौती पूर्ण लक्ष्य का पीछा करते हुए भारत की षुरूआत बेहद खराब रही। पूरे टूर्नामेंट मे बेहतरीन बल्लेबाजी कर रहे सचिन को मेक्ग्रा को उन्ही की गेंद पर ४ के निजी योग पहले ओवर की पाचवीं गेंद पर आऊट हो गए। तीसरे ओवर में शून्य पर खेल रहे विरेन्द्र सहवाग को एक जीवनदान मिला जब ब्रेट ली की गेंद पर डेमिन मार्टिन ने कैच पकड़ लिया लेकिन अंपायर ने इसे नोबाल करार दे दिया । तीसरे नंबर पर आए कप्तान सौरव गांगुली ने सहवाग के साथ मिल कर दूसरे विकेट के लिए 55 रन जोड़ें लेकिन जल्द रन बनाने के चक्कर में 24 के निजी स्कोर पर ब्रेट ली की गेंद पर लेहमन को कैच थमा बैठें। अगले ही ओवर में मौहम्मद कैफ को शून्य पर मेक्ग्रा ने आऊट कर भारत की कमर ही तोड़ दी। ५९ पर तीन विकेट गंवाने के बाद विरेन्द्र सहवाग और राहुल द्राविड़ ने चौथे विकेट के लिए ८८ रन की साझेदारी करके भारत को मैच मे वापसी करवाने की भरपूर कोशिश की लेकिन ८२ के निजी स्कोर पर सहवाग के रन आऊट होते ही इस साझेदारी का अंत हुआ। पारी के १७ ओवर में मैच में बरसात ने व्यधान डाल दिया और आधे घंटे तक मैच रूका रहा। जिसने भारत की मुश्किलों को और बढ़ा दिया। हालाकि ओवर में किसी तरह की कटौती नहीं की गई। एक समय १८७ पर चार विकेट खोकर सघंर्ष करती हुई लग रही भारतीय टीम, बढ़ते हुए आवश्यक रन गति के दवाब को भारतीय टीम झेल नहीं सकी और पूरी टीम भारतीय टीम ४०वें ओवर में मात्र २३४ रनों पर सिमट गई और इस तरह से भारत मैच और टूर्नामेंट को १२५ रनों से आस्ट्रेलिया के हाथों गवां दिया। भारत की ओर से वीरेन्द्र सहवाग ने सबसे ज्यादा ८२ रन बनाए। आस्ट्रेलियाई कप्तान को उनकी बेहतरीन बल्लेबाजी के लिए मैन आॅफ द मैच नवाजा गया। वहीं पूरे टूर्नामैंट में सबसे ज्यादा रन (673) बनाने वाले सचिन रमेश तेंदुलकर को मैन आफ द सीरिज से नावाजा गया।

रिकार्ड[संपादित करें]
  • फाइनल में आस्ट्रेलियाई टीम द्वारा बनाये 359 किसी भी टीम के द्वारा विश्वकप क्रिकेट फाइनल में सर्वश्रेष्ठ है। इससे पहले आस्ट्रेलियाई टीम नें ही वेस्ट इंडीज़ टीम के खिलाफ 1975 58.4 ओवर में 274 लार्डस, लंदन में बनाये थे।[7]
  • आस्ट्रेलिया विश्व की पहली टीम बनी जिसने तीन विश्वकप जीते। साथ में आस्ट्रेलिया ने वेस्ट इंडीज़ के लगातार दो विश्वकप जीतने की बराबरी की।
  1. "Wanderers Stadium", Wikipedia (अंग्रेज़ी में), 2020-02-09, अभिगमन तिथि 2020-02-18
  2. "The Wanderers Stadium | South Africa | Cricket Grounds | ESPNcricinfo.com". Cricinfo. अभिगमन तिथि 2020-02-18.
  3. "Full Scorecard of Australia vs India, World Cup, Final - Score Report | ESPNcricinfo.com". ESPNcricinfo (अंग्रेज़ी में). अभिगमन तिथि 2020-02-18.
  4. "Full Scorecard of Australia vs Sri Lanka, World Cup, 1st SF - Score Report | ESPNcricinfo.com". ESPNcricinfo (अंग्रेज़ी में). अभिगमन तिथि 2020-02-18.
  5. "St George's Park | South Africa | Cricket Grounds | ESPNcricinfo.com". Cricinfo. अभिगमन तिथि 2020-02-18.
  6. "India beat Kenya by 91 runs - India vs Kenya, World Cup, 2nd SF Match Summary, Report | ESPNcricinfo.com". ESPNcricinfo (अंग्रेज़ी में). अभिगमन तिथि 2020-02-18.
  7. "List of Cricket World Cup records", Wikipedia (अंग्रेज़ी में), 2020-01-03, अभिगमन तिथि 2020-02-18