होलिका

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होलिका
Holika dhan.jpg
होलिका
संबंध असुरानी
माता-पिता दिति (माता) , कश्यप (पिता)
भाई-बहन हिरण्याक्ष व हिरण्यकसिपु
त्यौहार होलिका दहन

होलिका हिरण्याक्ष एवं हिरण्यकसिपु नामक दैत्यों की बहन और कश्यप ऋषि और दिति की कन्या थी ।[1] जिसका जन्म जनपद- कासगंज के सोरों शूकरक्षेत्र नामक स्थान पर हुआ था।[कृपया उद्धरण जोड़ें]

कहानी[संपादित करें]

होलिका हिरण्याक्ष और हिरण्यकश्यप नामक योद्धा की बहन और प्रह्लाद, अनुह्लाद, सह्लाद और ह्लाद की बुआ थी। साथ ही ये महर्षि कश्यप और दिति की कन्या थी। इसका जन्म जनपद- कासगंज के सोरों शूकरक्षेत्र नामक पवित्र स्थान पर हुआ था। उसको यह वरदान प्राप्त था कि वह आग में नहीं जलेगी। इस वरदान का लाभ उठाने के लिए विष्णु-विरोधी हिरण्यकश्यप ने उसे आज्ञा दी कि वह प्रह्लाद को लेकर अग्नि में प्रवेश कर जाए, जिससे प्रह्लाद की मृत्यु हो जाए। होलिका ने प्रह्लाद को लेकर अग्नि में प्रवेश किया। ईश्वर कृपा से प्रह्लाद बच गया और होलिका जल गई। होलिका के अंत की खुशी में होली का उत्सव मनाया जाता है।

सन्दर्भ[संपादित करें]

  1. The Hindu, Opinion. "होली की फोटो वॉलपेपर".[मृत कड़ियाँ]