हिम्मत जौनपुरी

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हिम्मत जौनपुरी  
अंतरनाद

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|caption= मुखपृष्ठ |label1= लेखक |data1= राही मासूम रज़ा |label2= मूल शीर्षक |data2= |label3= अनुवादक |data3= |label4= चित्र रचनाकार |data4= |label5= आवरण कलाकार |data5= |label6= देश |data6= भारत |label7= भाषा |data7= हिंदी |label8= शृंखला |data8= |label9= विषय |data9= साहित्य |label10= प्रकार |data10= |label11= प्रकाशक |data11= राजकमल प्रकाशन |label12= प्रकाशन तिथि |data12= २२ अप्रैल १९९७ |label13= हिन्दी में
प्रकाशित हुई |data13= |label14= मीडिया प्रकार |data14= |label15= पृष्ठ |data15= १२५ |label17= आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ |data17 = |label18= ओसीएलसी क्र. |data18= |label19= पूर्ववर्ती |data19= |label20= उत्तरवर्ती |data20= }} हिम्मत जौनपुरी राही मासूम रजा का दूसरा उपन्यास था जो मार्च १९६९ में प्रकाशित हुआ। आधा गांव की तुलना में यह जीवन चरितात्मक उपन्यास बहुत ही छोटा है। हिम्मत जौनपुरी लेखक का बचपन का साथी था और लेखक का विचार है कि दोनों का जन्म एक ही दिन पहली अगस्त सन सत्तईस को हुआ था। हिम्मत जौनपुरी एक ऐसे निहत्थे की कहानी है जो जीवन भर जीने का हक माँगता रहा, सपने बुनता रहा परन्तु आत्मा की तलाश और सपनों के संघर्ष में उलझ कर रह गया। यह बंबई के उस फिल्मी माहौल की कहानी भी है जिसकी भूल-भुलैया और चमक-दमक आदमी को भटका देती है और वह कहीं का नहीं रह जाता।

राही मासूम रज़ा की चिर-परिचित शैली का ही कमाल है कि इसमें केवल सपने या भूल-भूलैया का तिलिस्मी यथार्थ नहीं बल्कि उस समाज की भी कहानी है, जिसमें जमुना जैसी पात्र चाहकर भी अपनी असली जिंदगी बसर नहीं कर सकती। एक तरफ इसमें व्यंगात्मक शैली में सामाजिक खोखलेपन को उजागर करता यथार्थ है तो दूसरी तरफ भावनाओं की उत्ताल लहरें।

राही मासूम रज़ा साहब ने हिम्मत जौनपुरी को माध्यम बनाकर सामान्य व्यक्ति के अरमान के टूटने और बिखरने को जिस नये अंदाज और तेवर के साथ लिखा है वह उनके अन्य उपन्यासों से बिल्कुल अलग है।