ओस की बूंद

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ओस की बूंद  
अंतरनाद

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|caption= मुखपृष्ठ |label1= लेखक |data1= राही मासूम रज़ा |label2= मूल शीर्षक |data2= |label3= अनुवादक |data3= |label4= चित्र रचनाकार |data4= |label5= आवरण कलाकार |data5= |label6= देश |data6= भारत |label7= भाषा |data7= हिंदी |label8= शृंखला |data8= |label9= विषय |data9= साहित्य |label10= प्रकार |data10= |label11= प्रकाशक |data11= राजकमल प्रकाशन |label12= प्रकाशन तिथि |data12= २१ अप्रैल २००४ |label13= हिन्दी में
प्रकाशित हुई |data13= |label14= मीडिया प्रकार |data14= |label15= पृष्ठ |data15= ११४ |label17= आई॰ऍस॰बी॰ऍन॰ |data17 = |label18= ओसीएलसी क्र. |data18= |label19= पूर्ववर्ती |data19= |label20= उत्तरवर्ती |data20= }} ओस की बूंद राही मासूम रज़ा का तीसरा उपन्यास है। यह उपन्यास हिन्दू-मुस्लिम समस्याओं को लेकर शुरू होता है लेकिन आखिर तक आते-आते पाठकों को पता चलता है कि हिन्दू-मुस्लिम समस्या वास्तव में कुछ नहीं है, यह सिर्फ राजनीति का एक मोहरा है और जो असली चीज है वह है इंसान के पहलू में धड़कने वाला दिल और उस दिल में रहने वाले ज़ज्बात और इन दोनों का मजहब और जात से कोई ताल्लुक नहीं। इसलिए साम्प्रदायिक दंगों के बीच सच्ची इंसानियत की तलाश करने वाला यह उपन्यास एक शहर और एक मजहब का होते हुए भी हर शहर और हर मजहब का है ! एक छोटी-सी जिन्दगी की दर्द भरी दास्तान जो ओस की बूँद की तरह चमकीली और कम उम्र है।

बाहरी कड़ियाँ[संपादित करें]